जानिए '10 बीघा जमीन' का पूरा मामला जिसके लिए स्वीडन से 'बिहार की एक बेटी' ने नीतीश कुमार से लगाई गुहार

मधुबनी में रैयती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश के बाद बवाल.

मधुबनी में रैयती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश के बाद बवाल.

Madhubani News: अपनी पैतृक जमीन को कब्जा मुक्त करवाने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये सीएम नीतीश कुमार से गुहार लगाने वालीं स्वाति पराशर स्वीडन के गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की विजिटिंग फैकल्टी भी हैं.

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मधुबनी. कोई परिवार हंसी-खुशी अपनी पैतृक जमीन पर दशकों से खेती-बारी कर रहा हो, जमीन के मालिकाना हक को लेकर कभी कोई विवाद न हुआ हो. जमीन के सारे कागजात उस परिवार के नाम से हो, लेकिन अचानक रातों-रात उनकी जमीन पर कुछ लोग जबरन कब्जा करने पर अमादा हों तो यह सुनकर आपको हैरानी होगी. मधुबनी के पंडौल अंचल में इसी तरह का वाकया सामने आया है, जिसके बाद स्वीडन में रहने वाली बिहार की एक बेटी स्वाति पराशर ने सीएम नीतीश कुमार से न्याय की गुहार लगाई तो मामला सुर्खियों में आया. हालांकि, इस मामले में पहले स्थानीय प्रशासन ने भी अपने स्तर पर कार्रवाई की है, लेकिन अब इस पर नीतीश कैबिनेट के मंत्री संजय झा ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि उन्होंने मधुबनी के डीएम से इस पूरे मसले पर बातचीत भी की है. संजय झा ने कहा है कि उन्होंने इस मामले में कार्रवाई का आदेश दिया है. आइये हम इस मामले के तमाम पहलुओं को जानते हैं कि आखिर यह इतना चर्चा में क्यों है?

10 बीघा रैयती जमीन पर जबरन कब्जा और फिर रैयत की शिकायत के बाद पुलिस-प्रशासन द्वारा जबरन कब्जा करने वाली भीड़ को बलपूर्वक हटाने की यह घटना मधुबनी जिले के पंडौल अंचल स्थित डीहटोल गांव की है. रैयत अरविंद झा के मुताबिक, बीते 9 अप्रैल को तड़के 4 बजे सैकड़ों की संख्या में पहुंची भीड़ ने उनकी रैयती जमीन पर धावा बोला और फेंसिंग को तोड़ते हुए जमीन पर अस्थायी झोपड़ी डाल दी. घटना की सूचना मिलने पर रैयत अरविंद झा ने पुलिस प्रशासन को जानकारी दी, जिसके बाद मधुबनी सदर के एसडीएम अभिषेक रंजन और एसडीपीओ कामिनी बाला के नेतृत्व में मौके पर पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम ने जबरन कब्जा पर अमादा भीड़ को बलपूर्वक हटाया. इस दौरान हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में आए इन लोगों ने किसी की रैयती जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश आखिर क्यों की?

जमीन पर कृषि आधारित उद्योग लगाने की चल रही थी तैयारी

अरविंद झा झारखंड सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के रिटायर्ड अधिकारी हैं. उनका कहना है कि उन्हें भी यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर इस तरह उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश क्यों हुई? उनकी मानें तो यह जमीन उनकी पैतृक संपत्ति है और पिछले करीब 100 साल से उनका परिवार इस पर खेती-बारी करता आया है. जमीन के सारे कागजात भी उनके पास हैं. पिछले करीब 1 साल से अपने बेटे पंकज पराशर के साथ मिलकर इस जमीन पर कृषि आधारित उद्योग लगाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक उनकी जमीन पर कब्जा किए जाने की कोशिश की घटना से वे जहां दहशत में हैं, वहीं उनका पूरा परिवार हताश और निराश है. अरविंद झा का कहना है कि उनका बेटा पंकज पराशर 1 साल पहले तक गुड़गांव में विप्रो में जॉब करता था, लेकिन कोरोना काल में घर लौटने के बाद पंकज ने जॉब छोड़कर अपनी इस पैतृक जमीन पर एग्रो इंडस्ट्रीज स्थापित करने की योजना बनाई थी, जिस पर काफी कुछ काम भी हो चुका था. लेकिन 9 अप्रैल को हुई घटना ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया.
झारखंड सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के रिटायर्ड अधिकारी रहे अरविंद झा को यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर इस तरह उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश क्यों हुई?


कथित भूमिहीन परिवारों ने की थी जमीन कब्जाने की कोशिश

अरविंद झा की पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा करने पहुंचे लोगों की अपनी दलील है.भीड़ में शामिल उर्मिला देवी नामक महिला का कहना था कि हमलोग भूमिहीन हैं और ये जमीन सरकारी है, इसलिए सैकड़ों भूमिहीन परिवार इस जमीन पर कब्जा कर घर बनाना चाहते हैं. हालांकि, पंडौल के अंचल कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, 10 बीघा रैयती जमीन सरकारी नहीं बल्कि अरविंद झा के परिवार की है और मार्च 2021 तक की रसीद भी अरविंद झा ने कटवा रखी है. इतना ही नहीं पिछले करीब 100 साल से अरविंद झा का परिवार इस जमीन पर खेती-बारी करता आया है.



साजिश में परिवार का भी हाथ होने की आशंका

इस घटना के पीछे क्या वजह हो सकती है, इसको लेकर अरविंद झा और उनके बेटे पंकज पराशर फिलहाल संशय में हैं. न्यूज 18 से बातचीत में अरविंद झा ने कहा कि इस घटना के पीछे एक बड़ी साजिश हो सकती है. अरविंद झा का कहना है कि साजिश में उनके कुछ परिजनों का हाथ भी हो सकता है, क्योंकि जिस जमीन को लेकर ये बवाल हुआ, उस जमीन के बीच में उनके चचेरे भाई की भी कुछ जमीन है, लेकिन उनके भाई की जमीन पर कब्जा की कोशिश नहीं हुई.

अपनी पैतृक जमीन पर स्वरोजगार का सपना

इतना ही नहीं अरविंद झा का यह भी कहना है कि जब उन्होंने अपनी जमीन पर फेंसिंग का काम शुरू किया, तो कुछ अनजान लोगों ने उनसे संपर्क साधकर जमीन बेच देने की पेशकश भी की थी, लेकिन उन्होंने जमीन बेचने से मना कर दिया था. बहरहाल डीहटोल की इस घटना ने अरविंद झा के बेटे पंकज पराशर के हौसले को तोड़कर रख दिया है. पंकज ने विप्रो जैसी बड़ी कंपनी में अच्छी-खासी जॉब छोड़कर अपने गांव में एग्रो इंडस्ट्रीज लगाने का सपना देखा था. पंकज का कहना है कि वह अपनी पैतृक जमीन पर मखाना उत्पादन के साथ ही बागवानी और डेयरी लगाकर खुद के साथ गांव के युवाओं को रोजगार से जोड़ना चाहते थे. इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए लाखों रुपये खर्च भी कर चुके थे, लेकिन जमीन पर उतरने से पहले ही उनका सपना धराशायी हो गया.

पंकज पराशर ने विप्रो जैसी बड़ी कंपनी में अच्छी-खासी जॉब छोड़कर अपने गांव में एग्रो इंडस्ट्रीज लगाने का सपना देखा था.


कानून तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई जारी है. एसडीएम अभिषेक रंजन का कहना है कि अंचल अधिकारी से जमीन संबंधी सारी जानकारी लेने के बाद पूरे मामले की तहकीकात की जा रही है. वहीं, एसडीपीओ कामिनी बाला का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, पुलिस की तफ्तीश जारी है. कई लोगों के खिलाफ पंडौल थाने में नामजद केस दर्ज किया गया है. वहीं कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है.

कौन हैं स्वाति पराशर जिनकी हो रही चर्चा

मामला सूबे के सीएम नीतीश कुमार के संज्ञान में है और इस पूरे मामले में कार्रवाई जारी है. बता दें कि जिन स्वाति पराशर के ट्वीट पर बिहार सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है, उनकी परवरिश रांची में हुई है. उनके पिता अरविंद झा रांची में पोस्टेड थे. उनका जन्म मधुबनी में ही हुआ है. इन दिनों स्वाति पराशर स्वीडन के गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. स्कूल ऑफ ग्लोबल स्टडीज में शांति और विकास विषय पढ़ाती हैं. इसके पहले वो ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी में पढ़ाती थीं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की विजिटिंग फैकल्टी भी हैं. इससे पहले सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) दिल्ली की विजिटिंग फेलो रह चुकी हैं. इसके अलावा कई विषयों पर आर्टिकल लिखती हैं, खासकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर.
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