मधुबनी हत्याकांड: सियासत ने तो खूब की थी साजिश पर बेनीपट्टी की फिजा में नहीं पड़ी दरार

मधुबनी में मारे गए पांच लोगों के बच्चे (फाइल फोटो)

मधुबनी में मारे गए पांच लोगों के बच्चे (फाइल फोटो)

Madhubani Murder Case: बिहार के मधुबनी जिले में होली के दिन पुरानी रंजिश में एक ही परिवार के पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया है.

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पटना. मधुबनी के बेनीपट्टी (Madhubani Murder Case) की धरती एक ऐसी सामाजिक समरसता की भूमि रही है जहां लोगों के बीच आपसी प्यार और भाईचारा की मिसाल दी जाती है. बेनीपट्टी की भूमि उच्चैठ भगवती की भूमि है जहां राजा से लेकर दीन तक एकसाथ दर्शन करते रहे हैं. उच्चैठ भगवती की वो भूमि जहां ना जाति न धर्म ना संम्प्रदाय की कोई बाध्यता रही. इस दरबार मे पहुचने वाला स्वर्ण हो पिछड़ा या फिर दलित समाज मां सबकी मनोकामना पूरी करती रही है. यहां के समाज मे मिठास हमेशा से घुली रही है लेकिन होली के दिन वो घटना घटी जिसे बेनीपट्टी की धरती ने कभी नही देखा था.

होली के दिन हुई थी पांच लोगों की हत्या

होली का वह दिन जहां पूरी दुनिया रंग गुलाल के बीच खुशियां मना रही थी वही बेनीपट्टी के महमदपुर गांव में खून की होली खेली गई. चंद मिनटों में एक ही परिवार के पांच लोगो को मौत के घाट उतार दिया गया. उसके बाद बेनीपट्टी में शुरू हुआ राजनीतिक साजिश. हर तरफ से बेनीपट्टी को सुलगाने की कोशिश की गई. राजनीतिक दलों के नेता बारी-बारी से पहुंचते रहे और बेनीपट्टी में हुए नरसंहार को दो समाज के बीच की रंजिश में बदलने की कोशिश करते रहे. सत्ताधारी दल के नेता हों या फिर विपक्ष के सभी ने अपनी सहूलियत के अनुसार बयानबाजी की और अपने वोटबैंक के गणित के अनुसार मामले को भुनाया बेनीपट्टी हत्याकांड के बाद महमदपुर गांव में बने हालात को सियासी लोगो ने पूरे मधुबनी में फैलाने की कोशिश की पर लोगो ने कामयाब ना होने दिया.

बेनीपट्टी के लोगो ने नही बदलने दी फिजा
महमदपुर में हुए एक ही परिवार के 5 लोगो की हुई जघन्य हत्या पर मधुबनी के साथ पूरा बिहार मर्माहत है. इस घटना के बाद लगातार हो रहे बयानबाजी और सियासत ने बेनीपट्टी के मिठास में जहर घोलने की भरपूर कोशिश की पर बेनीपट्टी के लोगो की सूझबूझ और आपसी एकता ने सारे राजनीतिक साजिशो की हवा निकालते हुए बेनीपट्टी को शांत बनाये रखा. इस हत्याकांड पर माहौल इतना गर्म हो गया था जहां लोगों को खुद नहीं पता था कि कब क्या हो जाये, ऐसे समय मे हर वर्ग के लोगों ने एक साथ खड़े होकर साजिश को नाकामयाब किया.

लोगों ने भी किया विरोध

बेनीपट्टी के ही रहने वाले आशुतोष झा ने बताया कि मिथिला की धरती पर ऐसी घटनाओं की कोई जगह नहीं. घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि इसके जो भी दोषी है उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए साथ ही पीड़ित परिवारों की मदद की मांग की. बेनीपट्टी के ही रहने वाले राम किशोर सिंह ने कहा कि यह घटना पूरी तरह से आपसी रंजिश का मामला है पर कुछ सियासी लोगों ने इसे समाज के भीतर जहर घोलने का काम किया जिसे गांव के लोग समझ चुके है. अपराधियो को स्पीडी ट्रायल कर सख्त सजा की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की जितनी निंदा की जाए कम है. बेनीपट्टी के सभी वर्गों के लोगों ने मृत परिवार के बच्चों की देखभाल और अच्छे पढ़ाई के लिए सरकार से मदद की मांग करते हुए परिवार में नौकरी देने की बात कही है. बेनीपट्टी के लोगों ने अपनी सूझबूझ से यहां की फिजां, समरसता और मिठास को बचाये रखने में सफलता हासिल की है.



2012 की घटना से बेनीपट्टी के लोगो ने लिया है सबक

बेनीपट्टी के लोगों ने सियासी साजिश का खौफनाक नतीजा 2012 में देखा है. लव स्टोरी में फैलाई गई एक अफवाह ने पूरे मधुबनी को दो दिनों तक आग में झुलसाए रखा था. बासोपट्टी के रहने वाले प्रशांत नाम के लड़के की शिक्षा पदाधिकारी की बेटी के साथ प्रेम प्रसंग था. दोनों एक दूसरे के साथ अचानक गायब हो जाते है. अगले दिन रेलवे लाइन के किनारे एक सिरकटी लाश मिलती है जिसे प्रशांत का बता दिया जाता है. इस बात के सामने आने के बाद ही 12 और 13 अक्टूबर 2012 को पूरा मधुबनी आग में झोंक दिया जाता हैं. पुलिस थाने से लेकर जिला प्रशासन के दफ्तरों में आगजनी की जाती है, बाद में पुलिस जब प्रशांत और प्रेमिका को दिल्ली से जिंदा पकड़ कर लाती है तो लोग अवाक रह जाते हैं.

पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है गांव

एक ऐसी घटना जो हुई ही न हो और उसके प्रतिक्रिया में पूरा शहर जल गया. महमदपुर गांव की घटना के बाद सियासी चालों को संमझते हुए पीड़ित परिवारों के साथ पूरा गांव खड़ा है और अपराधियों को कडी सजा देने की मांग की है. तमाम रजनीतिक साजिशो के बावजूद बेनीपट्टी के लोगो ने यहां की फिजां को बदलने नही दिया.
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