झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र: रामप्रीत की राह में गुलाब का 'कांटा', देवेन्द्र की दावेदारी में भी दम

1972 में परिसीमन के बाद झंझारपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आया. इस सीट पर अब तक हुए 11 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस दो तो बीजेपी सिर्फ एक बार ही जीत दर्ज कर सकी है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: April 19, 2019, 3:39 PM IST
झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र:  रामप्रीत की राह में गुलाब का 'कांटा', देवेन्द्र की दावेदारी में भी दम
गुलाब यादव और रामप्रीत मंडल (फाइल फोटो)
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: April 19, 2019, 3:39 PM IST
बिहार के झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र में तीसरे चरण में 23 अप्रैल को मतदान है. समाजवाद की प्रयोगभूमि के तौर पर प्रसिद्ध इस सीट पर जेडीयू-आरजेडी के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. हालांकि कभी आरजेडी और जेडीयू के नेता और पांच बार के सांसद देवेंद्र प्रसाद यादव समाजवादी जनता दल (डेमोक्रेट‍िक) से चुनाव मैदान में खड़े होकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.

इसके साथ ही यहां बहुजन समाज पार्टी, पीपल्स पार्टी ऑफ इंड‍िया (डेमोक्रेट‍िक), भारतीय म‍ित्र पार्टी,  सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, आदर्श म‍िथ‍िला पार्टी, श‍िवसेना, आम अधिकार मोर्चा, ऑल इंड‍िया फॉरवर्ड ब्लॉक, र‍िपब्ल‍िकन पार्टी ऑफ इंड‍िया (ए) जैसे दलों के साथ 5 न‍िर्दलीय भी चुनाव मैदान में हैं.



बावजूद इसके अब भी मुख्य मुकाबला दोनों ही मुख्य गठबंधन के बीच ही माना जा रहा है. एनडीए की ओर से जेडीयू ने यहां से रामप्रीत मंडल को टिकट दिया है, वहीं, महागठबंधन की तरफ से गुलाब यादव मैदान में हैं.

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बिहार में मूल मिथिलांचल की तीन लोकसभा सीटों मधुबनी, झंझारपुर और दरभंगा में झंझारपुर का सियासी इतिहास काफी रोचक रहा है. 1972 में परिसीमन के बाद झंझारपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आया. इस सीट पर अब तक हुए 11  लोकसभा चुनावों में कांग्रेस दो तो  बीजेपी सिर्फ एक बार ही जीत दर्ज कर सकी है.

झंझारपुर रेलवे जंक्शन


1984 में पूर्व  प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर में कांग्रेस का खाता खुला और गौरी शंकर राजहंस लोक दल के धनिक लाल मंडल को हराकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे. वहीं  2014 में मोदी लहर के दौरान यहां बीजेपी के वीरेंद्र कुमार चौधरी ने आरजेडी के मंगनी लाल मंडल को हराया.
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इसके बाद 1989 में जनता दल से देवेंद्र प्रसाद यादव ने जीत हासिल की. फिर 1991, 1996, 1999 और 2004 के चुनावों में भी उन्हें जीत मिली. 1998 के चुनाव में आरजेडी के सुरेंद्र प्रसाद यादव यहां से जीते. 2009 के चुनाव में झंझारपुर की जनता ने जेडीयू उम्मीदवार मंगनीलाल मंडल के सिर जीत का सेहरा बांधा.

झंझारपुर सीट एक नजर-

साल                                                        जीते                                                         हारे

1972                                   जगन्नाथ मिश्र (कांग्रेस)                                 -----------------
1977                                   धनिक लाल मंडल(भारतीय लोक दल)         जगन्नाथ मिश्रा(कांग्रेस)
1980                                   धनिक लाल मंडल(जनता पार्टी)                   जगन्नाथ मिश्रा(कांग्रेस)
1984                                   गौरी शंकर राजहंस(कांग्रेस)                        धनिक लाल मंडल(लोक दल)
1989                                   देवेंद्र प्रसाद यादव(जनता दल)                    गौरी शंकर राजहंस(कांग्रेस)
1991                                   देवेंद्र प्रसाद यादव(जनता दल)                    जगदीना चौधरी(कांग्रेस)
1996                                   देवेंद्र प्रसाद यादव(जनता दल)                    धनिक लाल मंडल(कांग्रेस)
1998                                   सुरेंद्र प्रसाद यादव(राजद)                           जगदीश चौधरी(एसएपी)
1999                                   देवेंद्र प्रसाद यादव(जदयू)                           सुरेंद्र प्रसाद यादव(राजद)
2004                                   देवेंद्र प्रसाद यादव(राजद)                          जगन्नाथ मिश्रा(जदयू)
2009                                   मंगनी लाल मंडल(जदयू)                            देवेंद्र प्रसाद यादव(राजद)
2014                                   वीरेंद्र कुमार चौधरी(भाजपा)                       मंगनी लाल मंडल(राजद)

झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- खजौली, बाबूबरही, राजनगर, झंझारपुर, फूलपरास और लौकहा.  2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 3 पर जेडीयू, 2 पर आरजेडी और एक सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी.

सामाजिक समीकरण के लिहाज से देखें तो झंझारपुर संसदीय क्षेत्र यादव, ब्राह्मण और अतिपिछड़ा बहुल है. यादव लगभग 20 प्रतिशत, ब्राह्मण 19 से 20 प्रतिशत, अतिपिछड़ा 35 प्रतिशत, मुस्लिम 15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत में अन्य भूमिहार, राजपूत, कायस्थ, वैश्य आते हैं. यहां वोटरों की कुल संख्या 1,418,977 है.  इसमें 757,310 पुरुष और 661,667 महिला वोटर हैं.

झंझारपुर का अनोखा रेल सह सड़क पुल, रेलवे लाइन पर ही बनी है सड़क


बहरहाल राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों के बीच बाढ़,  सूखा, जर्जर सड़कें, बंद पड़ी चीनी मिल, गन्ना किसान और दशकों से लंबित जिले की मांग यहां के मुख्य मुद्दे हैं.  रोजगार के लिए खेती के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं.  हर साल यहां से सैकड़ों लोग रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं.

उच्च शिक्षा के लिए भी छात्रों को दूसरे शहर जाना पड़ता है. जितने सरकारी स्कूल और कॉलेज हैं, वहां शिक्षकों की भारी कमी है. ऐसे में देखाना दिलचस्प होगा कि इस बार झंझारपुर क्या नतीजा देता है.

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