नेपाल के तराई इलाके में भारी बारिश के अनुमान से मधुबनी में बढ़ा बाढ़ का खतरा, SDRF की टीम तैनात
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नेपाल के तराई इलाके में भारी बारिश के अनुमान से मधुबनी में बढ़ा बाढ़ का खतरा, SDRF की टीम तैनात
धुबनी में कमला नदी के तटबंधों को मजबूत करने के लिए आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ब्रीच क्लोजर का कार्य कराया गया है.

मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. आपदा प्रबंधन (Disaster Management) के साथ ही बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तटबंधों की निगरानी में पूरी चौकसी बरत रहे हैं.

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मधुबनी. मधुबनी (Madhubani) में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने जयनगर (Jayanagar) से लेकर झंझारपुर तक कमला नदी (Kamala River) के दोनों तटबंधों पर चौकसी बढ़ा दी है. इसके अलावा तटबंध के किनारे बसे गांवों में एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं.साथ ही किसी भी तरह की अनहोनी का सामना करने के लिए नाव, मोटरवोट और लाइफ जैकेट के साथ एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट मोड में रखा गया है. मधुबनी के डीएम निलेश रामचंद्र देउरे का कहना है कि एसडीआरएफ की 40 सदस्यीय टीम पहले से मधेपुर प्रखंड (Madhepur Block) स्थित कोसी प्रभावित इलाके में तैनात थी. लेकिन कमला नदी में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने राज्य आपदा प्रबंधन विभाग से एसडीआरएफ की 2 और कंपनियों के साथ 4 मोटरवोट की मांग की थी जिसे विभाग ने स्वीकृति दे दी है.

मिली जानकारी के मुताबिक मधुबनी में अब एसडीआरएफ की कुल 67 सदस्यीय टीम बाढ़ (Flood) की तबाही से निपटने का काम करेगी. इसके अलावा आपदा की घड़ी में पीड़ितों की मदद के लिए जिला प्रशासन की ओर से राहत शिविर के लिए राशन-पानी और दवाई के साथ ही पॉलीथिन औक शीट्स के भी इंतजाम किए गए हैं. साथ ही मवेशियों के लिए भी चारे और दवाई की व्यवस्था की गई है.

अचानक बढ़ा था कमला नदी का जलस्तर
साल 2019 की बात करें तो पिछले साल भी 09 जुलाई से 13 जुलाई के बीच नेपाल के तराई इलाके में हुई भारी बारिश के बाद ही कमला नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोत्तरी हुई थी. साल 2019 में 13 और 14 जुलाई को कमला नदी की उफनती धारा ने झंझारपुर अनुमंडल में 3 जगहों पर पश्चिमी और पूर्वी तटबंध को तोड़ डाला, जिससे बांध किनारे बसे नरूआर, गोपलखा, रखवारी और गंधराईन समेत दर्जनों गांवों में भारी तबाही मची थी. एक साल बाद भी नरूआर गांव निवासी शिवानी देवी तबाही का वो मंजर याद कर रुआंसी हो जाती हैं.
मधुबनी जिले में ज्यादातर कमला नदी ही कहर बरपाती रही है
मधुबनी जिले में ज्यादातर कमला नदी ही कहर बरपाती रही है




नरूआर गांव पर कमला नदी का कहर टूटा था
शिवानी देवी का कहना है कि पिछले साल 13 जुलाई की रात नरूआर गांव पर कमला नदी का कहर टूटा था. रात करीब 10 बजे का वक्त था. लोग सोने की तैयारी कर रहे थे. उसी समय गांव के ठीक सामने तटबंध टूट गया और देखते ही देखते सैलाब आ गया. बहरहाल पिछले साल की तबाही के बाद कमला नदी के तटबंधों की मजबूतीकरण को लेकर सरकार गंभीर दिख रही है. तटबंधों की मरम्मतीकरण में इस बार नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके लिए आईआईटी रूड़की से तकनीकी सेवाएं भी ली गई हैं.

ब्रीच क्लोजर का कार्य कराया गया है
जानकारों के मुताबिक मधुबनी में कमला नदी के तटबंधों को मजबूत करने के लिए आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ब्रीच क्लोजर का कार्य कराया गया है. बताया जा रहा है कि बांध के मरम्मत कार्य में आयरन शीट पायलिंग और जियो बैग पिचिंग तकनीक का इस्तेमाल बिहार में पहली बार हुआ है. जानकारों के मुताबिक इस नई तकनीक से बने बांध में पानी के तेज दबाव को सहने की अधिक क्षमता होती है.

मधुबनी के कुछ इलाकों में कोसी नदी का भी खतरा
मधुबनी जिले में ज्यादातर कमला नदी ही कहर बरपाती रही है, लेकिन झंझारपुर अनुमंडल के मधेपुर प्रखंड में कोसी और उसकी सहायक नदियों जैसे भूतही बलान, सुगरवे और गेहूंआ नदी भी करीब 2 दर्जन गांवों में तबाही मचाती रही है. इस साल भी इन गांवों में खेतों तक बाढ़ का पानी घुस जाने से सैकड़ों एकड़ में लगी धान और मूंग की फसल बर्बाद हो चुकी है. ऊपर से मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में नेपाल में भारी बारिश का अनुमान जताने के बाद कोसी नदी में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.

 खतरे के निशान से नीचे बह रही कमला नदी
मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. आपदा प्रबंधन के साथ ही बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तटबंधों की निगरानी में पूरी चौकसी बरत रहे हैं. वहीं राहत और बचाव कार्यों की तैयारियां भी अंतिम चरण में होने का दावा किया गया है. इस सबके बावजूद नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ की दहशत है. हालांकि नदियों का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है. जयनगर में कमला नदी फिलहाल अपनी मांद में मंद-मंद बह रही है. वहीं किनारों पर खामोशी पसरी है. लेकिन ये खामोशी तूफान से पहले की शांति भी हो सकती है.
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