मेवालाल चौधरी बिहार सरकार में बने मंत्री, कभी नीतीश कुमार ने इनको पार्टी से कर दिया था बाहर

भ्रष्टाचार के आरोपी मेवालाल चौधरी को नीतीश कुमार ने कैबिनेट मिनिस्टर बनाया है.
भ्रष्टाचार के आरोपी मेवालाल चौधरी को नीतीश कुमार ने कैबिनेट मिनिस्टर बनाया है.

मेवालाल चौधरी को जेडीयू (JDU) कोटे से बिहार सरकार(Government of Bihar) में मंत्री बनाया गया है. कभी भ्रष्टाचार (Corruption) के आरोप लगने पर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने मेवालाल को पार्टी से निकाल दिया था. अब एक बार फिर मेवालाल की किस्मत जागी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 17, 2020, 10:21 PM IST
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पटना. मेवालाल चौधरी को नीतीश सरकार में JDU कोटे से कैबिनेट में मंत्री (Cabinet Minister) बनाया गया है. चौधरी ने सोमवार को सीएम के साथ पद और गोपनीयता की शपथ ली. आपको याद होगा कि ये वही मेवालाल चौधरी हैं, जिनके खिलाफ कभी भ्रष्टाचार (Corruption) के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी, जिसके बाद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने इनको पार्टी से निकाल दिया था.

मेवालाल नीतीश कुमार के साख हैं इस बात का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि भागलपुर सबौर स्थित कृषि कॉलेज को नीतीश सरकार ने विश्वविद्यालय का दर्जा दिया तो चौधरी को यहां का पहला कुलपति बनाया गया था. मेवालाल चौधरी रिटायर हुए तो मुख्यमंत्री ने 2015 में उनको जदयू से टिकट दे दिया और मेवालाल तारापुर विधानसभा से विधायक निर्वाचित हो गये.

मेवालाल जब कुलपति बने तो इनकी पत्नी नीता चौधरी जदयू से विधायक बनीं. यह 2010 की बात है, लेकिन पर बहाली में गड़बड़ी और राजभवन से प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विपक्षी तेवर इनके खिलाफ कड़े होने की वजह से नीतीश कुमार ने चौधरी को जदयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब 2020 के चुनाव में फिर से विधायक निर्वाचित होने पर मेवालाल की किस्मत का दरवाजा खुला है.




मेवालाल पर क्या लगे थे आरोप
सबौर कृषि विश्वविद्यालय में 161 कनीय शिक्षक और वैज्ञानिकों की बहाली में धांधली का आरोप विपक्ष में रहते सुशील कुमार मोदी ने सदन में उठाया था. उनकी मांग पर ही राजभवन ने रिटायर जस्टिस महफूज आलम से गड़बड़ियों की जांच कराई गई थी. इसके बाद जज ने 63 पन्ने की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि की थी. इसी आधार पर राज्यपाल सह कुलाधिपति के आदेश पर थाना सबौर में 35/17 नंबर की एफआईआर दर्ज की थी. बाद में पांच गवाहों के बयान दफा 164 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए थे. ये बहाली जुलाई 2011 में प्रकाशित विज्ञापन के माध्यम से बाकायदा इंटरव्यू प्रक्रिया के तहत की गई थी. इनके खिलाफ इस मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था. इनकी अग्रिम जमानत की अर्जी एडीजे राकेश मालवीय ने रद्द कर दी थी.
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