मोतिहारी में जारी है बूढी गंडक का कहर, पलक झपकते ही तेज धार में बह गए कई घर

बिहार के मोतिहारी में बाढ़ से तबाह हुआ इलाका

Motihari News: बिहार के मोतिहारी समेत आसपास के इलाकों में बूढी गंडक के कहर का शिकार हो रहे लोगों का आरोप है कि पिछले साल आई बाढ़ के बाद भी इलाके के रिंग बांध की मरम्मती नहीं की गई.

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मोतिहारी. नेपाल से आने वाली नदियों ने बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में तबाही मचानी शुरु कर दी है. बूढी गंडक नदी (Budhi Gandak River) जो चम्पारण में सिकरहना नदी के नाम से प्रसिद्ध है ने सुगौली प्रखंड के गांवों में तबाही मचाई है. पिछले वर्ष की तबाही को खत्म नहीं करने के कारण इस साल तबाही कुछ ज्यादा ही तेज नजर आ रही है. सुगौली प्रखण्ड के एक दर्जन से अधिक गांवों में इस साल सिकरहना नदी ने तबाही मचानी शुरु की है. नदी ने बिगुइया, मुसवा, भेड़िहारी, सपहां, लक्ष्मीपुर, मधुमालती, लालपरसा के घुमनी टोला, दक्षिण टोला, भवानीपुर, माली, गोड़ीगांवा, डुमरी, मेहवा गांवों मे तेज गति से कटाव शुरु किया है.

नदी की तेज धार पलक झपकते ही सड़क और गांव के घरों को अपने में समाहित कर ले रही है. कटाव तेज होने के साथ बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश कर भारी तबाही मचा रहा है. भेड़िहारी मुख्य पथ पर कमर भर पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है, जिससे एक गांव का दूसरे गांव से संपर्क तक भंग हो चुका है. सबसे बड़ी समस्या यह कि इन सभी गांवों में पिछले वर्ष आयी बाढ़ ने सिकरहना नदी के किनारे बने रिंग बांध को ध्वस्त कर दिया था जिसके बाद उन रिंग बांधों की मरम्मती नहीं करायी जा सकी है. इसबार
आयी बाढ़ सीधे गांवों में प्रवेश कर भारी क्षति करने पर आतूर है.

लोग अपने घरों से निकल कर ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हैं. लाल परसा गांव के निवासी रामबाबू सिंह बताते है कि जब कटाव तेज होता है तो विभाग और प्रशासन जागता है. पिछले साल के  बाढ के कटाव से ध्वस्त हुए रिंग बांध की मरम्मति तक नहीं हो सकी है और विभाग इस साल के कटाव को रोकने के लिए एन्टी रोजेन वर्क शुरु करने की प्रक्रिया कर रहा है. ग्रामीण उपेन्द्र कुमार बताते है कि रिंग बांध पिछले साल करीब पचास स्थानों पर टूटा था जिसकी मरम्मती के लिए मनरेगा के अधिकारियों से गुहार लगाया गया लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए.

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