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पूर्वी चंपारण: कभी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट में अब कमल का दबदबा

पूर्वी चंपारण: कभी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट में अब कमल का दबदबा

अपने चुनावी क्षेत्र में प्रचार करते कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह

अपने चुनावी क्षेत्र में प्रचार करते कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह

परिसीमन से पहले पूर्वी चंपारण लोकसभा मोतिहारी सीट के नाम से जानी जाती थी. 1952 से लेकर 1972 तक हुए पांच चुनावों में कांग्रेस का ही दबदबा यहां रहा.

    नील की खेती के खिलाफ किसानों के आंदोलन के लिए उर्वर भूमि देने वाला चंपारण इतिहास की अमूल्य धरोहर है. भूमिहीन मजदूरों और किसानों की दयनीय दशा ने महात्मा गांधी को आंदोलित कर दिया. इस गुस्से ने सत्याग्रह की शक्ल ली. जिसने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी के आंदोलन की मजबूत नींव रखी. हालांकि चंपारण के परिसीमन के बाद 2008 में पूर्वी चंपारण वजूद में आया. 2009 और 2014 में लगातार इस लोकसभा सीट से जीत दर्ज की मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने. परिसीमन से पहले यह सीट मोतिहारी के नाम से जानी जाती थी. केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह इस सीट से (परिसीमन के पहले और बाद) में अब तक पांच बार सांसद रह चुके हैं. 9वीं लोकसभा, 11वीं लोकसभा, 13वीं लोकसभा, 15वीं लोकसभा, 16वीं लोकसभा चुनाव में राधामोहन सिंह ने इस सीट पर जीत हासिल की.

    कौन हैं प्रत्याशी

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर इस सीट से राधामोहन सिंह को उम्मीदवार बनाया है तो सामने विपक्षी गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के आकाश कुमार सिंह हैं तो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) से प्रभाकर जायसवाल हैं. राधामोहन सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद के बिनोद कुमार श्रीवास्तव से से लगभग दोगुने मतों के अंतर से जीते थे. राधामोहन सिंह को 4,00,452 (48.68 फीसदी) वोट मिले थे जबकि राजद के उम्मीदवार को 2,08,089 (25.32 फीसदी) वोट मिले थे. जद (यू) के उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे. लेकिन इस बार उनका सामना सभी नए उम्मीदवारों से है.

    इस लोकसभा क्षेत्र की धरती को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि भी कहा जाता है.


    सीट का इतिहास

    परिसीमन से पहले पूर्वी चंपारण लोकसभा मोतिहारी सीट के नाम से जानी जाती थी. 1952 से लेकर 1972 तक हुए पांच चुनावों में कांग्रेस का ही दबदबा यहां रहा. 1977 में आपातकाल में यहां की सियासी फिजा बदली और पहली बार जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की. जनता पार्टी के ठाकुर रामापति सिंह ने यहां से चुनाव जीतक कांग्रेस का दबदबा खत्म किया.1980 में यहां से सीपीआई के कमला मिश्र मधुकर जीते. 1984 में एक बार फिर कांग्रेस की प्रभावति गुप्ता ने पार्टी की खोई जमीन को दोबारा पाने की उम्मीद जगाई.

    1989 में यहां से भाजपा ने स्वयंसेवक संघ के कर्मठ कार्यकर्ता राधामोहन सिंह को टिकट दिया. और इस तरह से राधामोहन सिंह ने पहली बार इस सीट पर कमल खिलाया. लेकिन 1991 में फिर सीपीआई के टिकट पर कमला मिश्र मधुकर जीतकर आए तो लगा कमल का काल खत्म पर, 1996 में राधामोहन सिंह ने जीतकर फिर बाजी पलट दी.



    1998 के चुनाव में राधामोहन सिंह चुनाव हारे और राजद की रमा देवी चुनाव जीतीं. लेकिन 1999 में अटल लहर में भाजपा के टिकट पर राधामोहन जीत हासिल करने में कामयाब रहे. 2004 में फिर इस सीट पर राजनैतिक हवा बदली और राजद के ज्ञानेंद्र कुमार जीतने में कामयाब रहे.

    2008 में लोकसभा सीटों के परिसीमन के लिए कमेटी बनी और 2008 में मोतिहारी सीट का पूर्वी चंपारण के नाम से अस्तित्व में आया. उसके बाद से हुए दोनों चुनाव 2009 और 2014 में राधामोहन सिंह ने फिर भाजपा का कमल खिलाया.

    विधानसभा सीटों पर सियासी दबदबा

    इस लोकसभा सीट में छह विधानसभा सीटें हरसिद्धि, गोविंदगंज,केसरिया, कल्याणपुर, पिपरा, मोतिहारी शामिल हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 3 भाजपा ने, 2 राजद ने और 1 सीट एलजेपी ने जीती थी.

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    Tags: Bihar Lok Sabha Constituencies Profile, East Champaran district, Lok Sabha Election 2019, Mahatma gandhi, Purvi Champaran S04p03, Radha Mohan Singh

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