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मोतिहारी को बंद पड़ी चीनी मिल को लेकर पीएम मोदी से है ये उम्मीदें

मोदी सरकार की इस योजना से हुआ 11 करोड़ लोगों को फायदा, क्या आपने लिया लाभ?

मोदी सरकार की इस योजना से हुआ 11 करोड़ लोगों को फायदा, क्या आपने लिया लाभ?

प्रधानमंत्री के मोतिहारी आगमन पर यहां की जनता को कई सौगात मिलेगी. साथ ही, लोग अंधूरे वादों के पूरे होने की उम्मीद भी लगाकर बैठी है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होने मोतिहारी के गांधी मैदान पहुंचे हैं. पीएम मोदी की मोतिहारी यात्रा कई मायनों में खास है. प्रधानमंत्री के मोतिहारी आगमन पर यहां की जनता को कई सौगात मिलेगी. साथ ही, लोग अंधूरे वादों के पूरे होने की उम्मीद भी लगाकर बैठी है.


दरअसल, पीएम मोदी पिछली बार 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान मोतिहारी पहुंचे थे, तब उन्होंने यहां की जनता से बंद पड़े चीनी मिल को शुरू कराने का वादा किया था. पीएम मोदी ने तब वादा किया था कि अगली बार जब मोतिहारी आएंगे तो बंद पड़ी मिल में बनी चीनी से बनी चाय पीएंगे,लेकिन आलम यह है कि मोतिहारी में दोनों शुगर मिलें आज भी बंद पड़ी हैं.


बताया जाता है पिछले साल 10 अप्रैल को नरेश श्रीवास्तव और सूरज बैठा नाम के दो कर्मियों ने बंद पड़ी चीनी मिलों के शुरू नहीं होने से खुदकुशी कर ली थी. यही नहीं, चीनी मिलों के बंद होने के बाद सैकड़ों मिल कर्मी और उनके परिवार दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहे हैं. मिल मालिकों और राज्य सरकार ने अब तक उन्हें उनका मुआवजा भी नहीं दिया है.






रिपोर्ट कहती है कि दोनों मजदूरों की मौत के ठीक एक साल बाद पीएम मोदी एक बार फिर मोतिहारी पहुंचे हैं और क्षतिपूर्ति के लिए मृतकों की पत्नियां क्रमशः पूर्णिमा श्रीवास्तव और माया देवी शनिवार से मिल के गेट पर अनशन कर रही हैं. न्यूज18 से बातचीत में पीड़ित माया देवी ने बताया कि उनके लिए कुछ भी बदला नहीं है. कोई मुआवजा नहीं मिला, पिछला वेतन भी नहीं मिला है. बकौल माया देवी, हमें इंसाफ चाहिए और हमें प्रधानमंत्री से उम्मीद है कि वह हमें इंसाफ देंगे.


मोतिहारी के लोगों को उम्मीद है कि इस बार पीएम मोदी पिछले वादों को लेकर जरूर कोई घोषणा करेंगे. मोतिहारी के बबलू बताते हैं, किसी जमाने में मोतिहारी चीनी मीलों के लिए जाना जाता था, जो स्थानीय लोगों का एक बड़ा साधन था और किसानों की आमदनी का बड़ा जरिया था, लेकिन, धीरे-धीरे चीनी मिलों के बंद होने स्थिति खराब होती गई.


बकौल बबलू, भले ही पिछले कुछ सालों में मोतिहारी में बड़े शॉपिंग काम्प्लेक्स, बाजार, सड़क आदि का विकास हो गया है, लेकिन मोतिहारी की पहचान चीनी मिल है, जिसके लिए अब तक कुछ नहीं किया गया.


वहीं, स्थानीय आरजेडी नेताओं ने नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का बायकॉट करने का फैसला किया है. स्थानीय नेता विनोद श्रीवास्तव ने कहा कि मोदी के दौरे में 200 करोड़ का खर्चा होगा. केवल टेंट का खर्चा 20 करोड़ है. इतने पैसे इन मिल कर्मियों के लिए बहुत हैं, लेकिन बीजेपी और उसके नेता सिर्फ बोलने का काम करते हैं. पीएम को बताना चाहिए कि वह अपने वादा क्यों भूल गए?


गौरतलब है पीएम मोदी के साल 2014 के लोकसभा चुनाव में किए गए वादों को याद दिलाने के लिए निषाद विकास संघ ने मोतिहारी में 'चीनी बिना चाय' मोटरसाइकिल महारैली भी निकली थी.
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