मोतिहारी की बिसात पर अपनी अंतिम चुनावी बाजी खेल रहे हैं राधामोहन सिंह

केंद्रीय कृषि मंत्री और मोतिहारी से बीजेपी प्रत्याशी राधामोहन सिंह के अनुसार, इस बार का चुनाव वे नहीं बल्कि उनके विधायक, नेता और कार्यकर्ता लड़ रहे हैं.

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: May 6, 2019, 8:49 PM IST
मोतिहारी की बिसात पर अपनी अंतिम चुनावी बाजी खेल रहे हैं राधामोहन सिंह
राधा मोहन सिंह (फोटो साभार- फेसबुक)
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: May 6, 2019, 8:49 PM IST
2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों में कुछ जो हॉट और हाई प्रोफाइल सीट हैं उसमें एक पूर्वी चंपारण यानी मोतिहारी की है. उसकी वजह यह है कि इस सीट से देश के कृषि मंत्री राधामोहन सिंह सांसद हैं और इस बार के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के रूप में अपनी अंतिम चुनावी बाजी खेल रहे हैं. यानी यह उनका अंतिम चुनाव है. क्योंकि इस चुनाव के बाद बीजेपी की नई नियमावली के अनुसार वे 75 वर्ष के होकर मार्गदर्शक मंडली में शामिल हो जाएंगे.

अभी हाल ही में मोतिहारी जाना हुआ. इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्वी चंपारण से बीजेपी उम्मीदवार राधामोहन सिंह से मुलाकात हुई. 50 वर्षों का राजनीतिक जीवन, पांच बार के सांसद और इस बार केंद्रीय मंत्री के रूप में राधामोहन सिंह की पूरी दिनचर्या को चुनावी माहौल के बीच करीब से देखने का मौका मिला.

राधामोहन सिंह ने अपना अस्थायी निवास बीजेपी के मोतिहारी जिला कार्यालय में बनाया हुआ है, जो महात्मा गांघी मार्ग में है. हालांकि इस अस्थायी निवास में पिछले कई वर्षों से लगातार रहते आ रहे हैं. बीजेपी कार्यालय के पहले तल्ले की बांयी तरफ से अंतिम कमरे में वे लंबे अरसे से रह रहे हैं. कमरे में एक दीवान, एक सोफा तीन कुर्सियां और दो टेबल हैं.

दूसरे दल के लोगों से भी मिलते हैं राधामोहन सिंह

उनकी दिनचर्या कुछ यूं है कि सुबह साढे छह बजे उठने के बाद से लगातार जिलों से, अलग-अलग इलाकों से आए लोगों और कार्यकर्ताओं से मिलने का सिलसिला शुरू हो जाता है. राधामोहन सिंह का कहना है कि यह चुनावी समय का नहीं बल्कि सामान्य दिनचर्या में है कि जितने भी लोग आएं, वे सभी से मिलते हैं. अगर कोई दूसरे दल के भी लोग उनसे किसी काम को लेकर मिलने आते हैं तो वे उनसे भी मिलते हैं और उनकी भी सुनते हैं.

यह सिलसिला कई घंटों का होता है. जिस दिन हम उनसे मिलने पहुंचे थे तो यह सिलसिला दिन से दो बजे तक चला था. हालांकि वे इस दौरान नौ बजे नाश्ता करना नहीं भूलते. नाश्ते में दो रोटी, दाल और थोड़ी हरी सब्जी. लोगों से मुलाकात के बाद वे स्नान कर दिन का भोजन करते हैं. वहीं दो रोटी दाल और हरी सब्जी.

राधा मोहन सिंह (फोटो साभार- फेसबुक)

इस दौरान भी वे पार्टी नेताओं कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करते रहते हैं. अगर कभी दिन में किसी कार्यक्रम को लेकर पहले बाहर जाना होता है तो टिफिन में दो रोटी पैक हो जाती है, जिसे वे गाड़ी में चलते हुए खा लेते हैं. राधामोहन सिंह के अनुसार, दिल्ली में भी उनका यही रूटीन है. अगर सुबह में कैबिनेट हो गया तो रूटीन में थोड़ा बदलाव हो जाता है.

मेरा चुनाव नेता, विधायक और कार्यकर्ता लड़ रहे हैं
राधामोहन सिंह चुनावी माहौल में प्रचार के लिए चार बजे के बाद ही निकलते हैं. इस अजीबोगरीब समय पर उनका कहना है कि वे तो चुनाव लड़ ही नहीं रहे. बल्कि उनका चुनाव तो क्षेत्र के सभी विधायक, नेता और कार्यकर्ता लड़ रहे हैं. वे तो सिर्फ उन्हें समय-समय पर गाइड करते हैं.

वे जब भी जनसंपर्क अभियान के लिए निकलते हैं तो वे जिसके भी घर पहुंचे तो वहां दालान में बैठकर प्याज की पकौड़ी और चूड़ा, चना का भुंजा खाना पसंद करते हैं. इसी तरह वे जगह-जगह लोगों से मिलते जाते हैं. राधामोहन के क्षेत्र में इन दिनों जितने भी बड़े नेताओं की सभाएं हो रही है, उन सभाओं की तैयारियों को एक आम कार्यकर्ता की तरह खुद देखते हैं. मंच कहां बनेगा, हेलीपैड कहां बनेगा, लोग किधर से आएंगे और सुरक्षा कैसी रहेगी? यानी सबकुछ. ये सिलसिला रात तक चलता है.

राधा मोहन सिंह (फोटो साभार- फेसबुक)


राधामोहन सिंह के सामने महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में RLSP के टिकट पर आकाश सिंह मैदान में हैं. आकाश सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री, मोतिहारी के पूर्व सांसद और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन अखिलेश सिंह के सुपुत्र हैं. राधामोहन सिंह के अनुसार, इस बार लड़ाई आसान है क्योंकि उनके मुताबिक उनका विरोधी आकाशीय है. और जिस गठबंधन से है, वहां तो पहले से ही घमासान मचा है.

राधामोहन सिंह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि यह उनका अंतिम चुनाव है. इसपर उनका कहना है कि क्षेत्र में काम करने के लिए शारीरिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है. जो 70 वर्ष के आसपास पहुंचने के बाद उनका लिए मुश्किल है. साथ ही 75 वर्ष की बाध्यता बीजेपी की नई नियमावली भी है, जिसका पालन भी करना है. यानी कुछ वर्ष के बाद वो समय आ जाएगा कि राधामोहन सिंह पार्टी के लिए मार्गदर्शक बन जाएंगे.

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