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सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं मुंगेर के किसान, मुखिया के हाथ में जाने से चरमराई व्यवस्था

मुंगेर ज़िले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत मकवा में किसानों के 100 एकड़ खेत के पटवन को लेकर सरकार के द्वारा स्टेट ट्यूबवेल की ...अधिक पढ़ें

    सिद्धांत राज

    मुंगेर. बिहार के मुंगेर जिले में किसानों का हाल बेहाल है. उनके दर्द को कोई समझने वाला नहीं है. किसान दोतरफा मार झेलने को विवश हैं. उनके सामने जहां रबी फसल की बुआई के बाद सिंचाई की समस्या है. तो वहीं, दूसरी तरफ खाद की किल्लत ने किसानों को झकझोर कर रख दिया है. पटवन के लिए सरकार ने स्टेट ट्यूबवेल की व्यवस्था वर्षों पूर्व कर दी थी, लेकिन बोरिंग काम नहीं करने से सैकड़ों एकड़ भूमि प्यासी रह जा रही है. सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रहने से किसान खेती-बाड़ी से वंचित रह जा रहे हैं.

    ज़िले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत मकवा में किसानों के 100 एकड़ खेत के पटवन को लेकर सरकार के द्वारा स्टेट ट्यूबवेल की व्यवस्था कई साल पहले की गई थी, लेकिन चार वर्ष से बोरिंग बंद है. कुछ दिन पूर्व इसे मरम्मत किया गया था, लेकिन यह फिर से खराब होकर बंद पड़ा है.

    मुखिया के हाथ में जाने से सिस्टम हुआ खराब

    मकवा के बहियार में लगभग 100 एकड़ कृषि योग्य भूमि की पटवन के लिए सरकार के द्वारा स्टेट ट्यूबवेल बोरिंग स्थापित की गई थी. किसानों ने बताया कि स्टेट ट्यूबवेल विगत चार वर्षों से बंद पड़ा हुआ है. अभी रबी फसल की बुआई से पहले इसे फिर से बनाया गया था. पहले जहां 20 हॉर्स पावर की मोटर इसमें लगी थी, उसे हटाकर 7.5 हॉर्स पावर का मोटर लगा दिया गया. वो भी खराब हो चुका है. उन्होंने बताया कि जब तक सरकार के हाथ में यह व्यवस्था थी, तब तक ठीक चल रहा था. लेकिन जब से इसे मुखिया के जिम्मे दे दिया गया है, इसकी स्थिति काफी खराब हो चुकी है. मुखिया के हाथ में जाने के बाद कभी भी खेतों को बोरिंग का पानी सही से नहीं मिला है.

    स्टेट ट्यूबवेल से महज 4 बीघा खेत का हुआ पटवन

    मकवा के किसान सौरभ कुमार ने बताया कि स्टेट ट्यूबवेल कई साल पहले खराब हो गया था. इधर, रबी की बुआई से पहल इसे चालू किया गया. चालू होने के बाद मात्र चार बीघा खेत का पटवन हो सका और यह फिर से खराब हो गया. सिंचाई की व्यवस्था नहीं रहने के कारण नौ में से मात्र दो बीघा जमीन में खेती कर पाया. शेष खेत परती (बिना बुवाई) रह गया.

    उन्होंने खाद की किल्लत पर कहा कि जब खाद खरीदने दुकान पर जाते हैं तो वहां पहले से 100-200 लोगों की लाइन लगी रहती है. जब हमारी बारी आती है तब तक शाम हो जाता है और दुकानदार के द्वारा बोला जाता है कि खाद खत्म हो गया. खाद खत्म होने के बाद दुकानदार बोलता है कि रात में आइएगा तो खाद देंगे. रात को खाद खरीदने जाते हैं तो ब्लैक में ज्यादा रेट में मिलता है. जबकि यूरिया खाद का सरकारी मूल्य 263 रुपये प्रति पैकेट है.

    Tags: Agriculture, Bihar News in hindi, Farmer, Munger news

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