मुंगेर: बर्ड फ्लू पर 7 गांवों में एक्शन शुरू, मारे गए 1000 पक्षी

बर्ड फ्लू को लेकर मुंगेर पहुंची चिकित्सकों की टीम
बर्ड फ्लू को लेकर मुंगेर पहुंची चिकित्सकों की टीम

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बिहार के कई जिलों में बर्ड फ्लू का प्रकोप है. मुंगेर के सदर प्रखंड, मुबारकचक, बांक, मिन्नत नगर में कौवों और मुर्गों में H5N1 बर्ड एन्फ्लूएंजा के विषाणु पाए जाने की खबर थी. राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान की पुष्टि के बाद अब जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है. इसी सिलसिले में शुक्रवार की सुबह पशुपालन निदेशालय की छह सदस्यीय टीम मुंगेर पहुंची.

डीडीसी रामेश्वर पांडेय के साथ मुबारक पहुंची टीम ने मुबारकचक से एक किलोमीटर के दायरे में बसे गांवों में पक्षियों को मारने का काम आरंभ कर दिया है. अब तक लगभग 1000 पक्षियों को मारा जा चुका है. इसके बाद उसके अवशेष को सुरक्षित तरीके से मिट्‌टी में दफन कर दिया जा रहा है. यह कार्यक्रम आगले दिन भी तब तक जारी रहेगा जब तक कि एक किलोमीटर की परिधि में रहने वाले सभी पक्षियों को मार नहीं दिया जाता है.

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डीडीसी  ने कहा पटना से आई एक्सपर्ट की टीम पांच हिस्सों में बंट कर H5N1 वायरस से ग्रसित मुबारकचक गांव के एक किलोमीटर परिधि में आनेवाले मुबारकचक, नंदलालपुर, बेनीगीर, मिन्नतनगर गुलालपुर हाजिसुजान और सुतुर खाना स्थित पक्षियों को मारने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
डीडीसी  ने बताया कि जिन पालतू पक्षियों को मारा जा रहा है उसके मालिकों को उसी दिन ऑन स्पॉट मुआवजे का भी भुगतान किया जा रहा है. जब तक मुबारकचक  एवं उससे एक किलोमीटर की परिधि के क्षेत्र में आने वाले गांवों के सभी पक्षियों को मारकर उसका सुरक्षित रुप से निपटारा नहीं कर दिया जाता है, तब तक उस क्षेत्र में लोगों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है ताकि बर्ड फ्लू के विषाणु बाहर नहीं फैल सकें.

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सदर एसडीओ खगेंद्र झा ने जानकारी दी कि बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षियों में निमोनिया के लक्षण देखे जाते हैं. यह विदेशी पक्षियों तथा इससे संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने से अन्य पक्षियों में फैलता है.  खासकर जलीय पक्षी इसके लिए संरक्षक का काम करते हैं.  यह रोग मनुष्य में नहीं होता है लेकिन मनुष्य के शरीर के साथ दो-से पांच किलोमीटर की दूरी तक फैल सकता है.

बर्ड फ्लू केवल पक्षियों में फैलने वाला रोग है. हालांकि  मनुष्य के माध्यम से यह दूर तक जा सकता है. इसके कारण लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.  पक्षियों को मारने के अलावा पॉल्ट्री के फुडर को भी नष्ट किया जाएगा. ताकि संक्रमित पक्षी जिस भोजन को खाते हैं उससे भी विषाणु के फैलने की आशंका है.  इसके केंद्र से 1 किमी से 9 किमी तक की दूरी को सर्विलांस जोन माना गया है. इस क्षेत्र में पक्षियों के सौंपल को रैंडमली प्रति तीन माह तक संग्रह कर इसकी जांच की जाएगी. ताकि यह अन्य क्षेत्रों में नहीं फैल सके.

रिपोर्ट- अरुण कुमार शर्मा

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