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डिजिटल युग में मुंगेर में प्राथमिक शिक्षा का हाल बेहाल, 2 कमरे के स्कूल में पढ़ते हैं 94 बच्चे

बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड अंतर्गत काजीचक मिल्की गांव जहां 70 से 80 घर दलित परिवार का है और लगभग 120 घर अन् ...अधिक पढ़ें

    सिद्धांत राज/मुंगेर. बिहार में शिक्षा की बदहाल स्थिति किसी से छिपी नहीं है. खासकर ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की स्थिति बेहद खराब है. संसाधनों की कमी के चलते नोनिहालों का भविष्य कुंठित हो रहा है. दरअसल, मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड अंतर्गत काजीचक मिल्की गांव जहां 70 से 80 घर दलित परिवार का है. लगभग 120 घर अन्य जाती का हैं. इस गांव में प्राथमिक विद्यालय की स्वीकृति कई वर्ष पहले दी जा चुकी है. लेकिन विद्यालय का भवन आज तक नहीं बना सका है. जिसके चलते यहां के बच्चों को प्राथमिक विद्यालय धर्मराय स्कूल जाना पड़ता है.

    काजीचक मिल्की गांव में स्कूल नहीं रहने से बच्चों को दो किलोमीटर दूर धर्मराय प्राथमिक विद्यालय पढ़ने के लिए जाना पड़ता है. रास्ते में नदी भी पड़ती है. बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पूर्व काजीचक मिल्की गांव का एक बच्चा प्राथमिक विद्यालय धर्मराय पढने लिए जा रहा जा रहा था और रास्ते मे पड़ने वाली नदी में वह गिर गया. जिससे पानी में डूबने से बच्चे की मौत मौत हो गई. इस घटना से आज भी ग्रामीणों में भय है और शिक्षा विभाग की लापरवाही के प्रति आक्रोश व्याप्त है.

    ग्रामीण लगातार कर रहे स्कूल भवन की मांग
    काजीचक मिल्की गांव के ग्रामीण और बच्चों के माता-पिता लगातार स्कूल भवन की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि हमारे गांव में कई वर्ष पूर्व स्कूल दे दिया गया है, लेकिन सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गया है. जबकि हमारे यहां सरकारी जमीन उपलब्ध है, लेकिन सरकार के पास इतना पैसा नहीं कि विद्यालय बनवाएं. जिसके कारण हमारे बच्चे दिक्कत झेल रहे हैं और हम लोगों को हमेशा डर बना रहता है. काजीचक मिल्की गांव में विद्यालय नहीं बना है, लेकिन विद्यालय के नाम से प्राचार्य और शिक्षक की पोस्टिंग हो चुकी है, जो पास के धर्मराय स्कूल में जाकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं.

    दो कमरे में चल रहा है दो विद्यालय
    शिक्षा विभाग की उदासीन रवैये के चलते प्राथमिक विद्यालय धर्मराय के दो कमरे में दो स्कूल के 94 बच्चे पढ़ाई करने को विवश हैं. एक कमरे में धर्मराय गांव के 48 और दूसरे कमरे में काजीचक मिल्की गांव के 46 बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. शिक्षकों को स्कूल संचालन में काफी परेशानी हो रही है. कमरे के हिस्से में एमडीएम का चावल सहित सारा सामान भी रखना पड़ता है.

    स्कूली बच्चों ने सुनाई अपनी व्यथा
    काजीचक मिल्की गांव के बच्चे जो धर्मराय जाकर पढ़ाई करते हैं. बच्चों का कहना है कि स्कूल जाने के लिए दो किलोमीटर का सफर तय करके जाना पड़ता है. जहां लौटने में भी काफी समय लग जाता है और जिसके चलते कोचिंग और ट्यूशन तक छूट जाता है. बच्चों ने कहा कि सरकार गांव में स्कूल दे दिया है, लेकिन अब तक बना नहीं है. सरकार और शिक्षा विभाग जल्द पहल कर स्कूल निर्माण कराने का काम करे ताकि लंबा सफर तय न करना पड़े.

    भवन निर्माण की दिशा में नहीं की जा रही है पहल
    काजीचक मिल्की प्राथमिक विद्यालय के पोस्टेड प्रधानाचार्य हरकित कुमार सिंह बताते हैं कि 2013 में ही प्राथमिक विद्यालय काजीचक में पोस्टिंग हुई है. लेकिन भवन नहीं रहने के कारण मुझे धर्मराय में आकर बच्चों को पढ़ाना पड़ता है. पूर्व में कई बार भवन बनाने वाले संबंधित विभाग को जानकारी और जेई को जमीन की पैमाइश, नजरी नक्शा और कई जरूरी कागजात उपलब्ध करा चुका हूं, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई है. जिसके चलते काजीचक मिल्की गांव के बच्चों को दो किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए जाना पड़ता है. जिस कारण बच्चों को ही दिक्कत झेलना पड़ता है. बरसात हो या धूप हर परिस्थिति में बच्चों को ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

    बीईओ ने उचित कार्रवाई का दिया भरोसा
    स्कूल भवन के निर्माण में हो हो रही देरी को लेकर तारापुर के बीईओ का कहना है कि उनकी कुछ दिन पूर्व ही पोस्टिंग हुई है. इसके बार में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है. काजीचक मिल्की गांव में स्कूल की समस्या को लेकर जानकारी हासिल करते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी. ताकि जल्द से जल्द भवन का निर्माण शुरू हो सके.

    Tags: Bihar News, Munger news

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