बिहार: कांस्टेबल स्नेहा मौत मामले को विधानसभा में उठाएगी RJD

बिहार पुलिस की मृतक कांस्टेबल स्नेहा
बिहार पुलिस की मृतक कांस्टेबल स्नेहा

मौत की गुत्थी को सुलझाने और निष्पक्ष जांच की मांग के लिए मृतक स्नेहा के पिता विवेकानंद मंडल अनशन पर बैठे हुए हैं और CBI जांच की मांग कर रहे हैं.

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'मेरी बेटी की जान उसकी सुंदरता ने ले ली' ये बिहार के सीवान जिले में पदस्थापित बिहार पुलिस की कॉन्सटेबल स्नेहा के पिता की विवेकानंद मंडल की थी. कांस्टेबल स्नेहा कुमारी बीते 1 जून को उनके सरकारी क्वार्टर्स में मृत पाई गई थी, लेकिन जिस स्थिति में उसकी लाश पड़ी हुई थी, उससे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि उसकी मौत 48 घंटे पहले यानी 30 मई को हुई होगी. जाहिर है तब से लेकर इस मौत की गुत्थी उलझी हुई है.

सीबीआई जांच की मांग को लेकर अनशन

इसी गुत्थी को सुलझाने और निष्पक्ष जांच की मांग के लिए मृतक स्नेहा के पिता विवेकानंद मंडल अनशन पर बैठे हुए हैं और सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. तीन दिन से अनशन पर बैठे कॉन्सटेबल स्नेहा के पिता की मांग को अब राष्ट्रीय जनता दल ने भी समर्थन किया है.



विधानसभा में आरजेडी उठाएगी मुद्दा
आरजेडी विधायक विजय कुमार विजय ने सीबीआई जांच की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा. बता दें कॉंस्टेबल स्नेहा के मौत मामले में उनके पिता विवेकानंद तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं.

मृतक स्नेहा के पिता विवेकानंद मंडल के साथ अनशन पर बैठे अन्य लोग


स्नेहा के पिता की तबीयत बिगड़ी

दरअसल किला परिसर स्थित शहीद स्मारक के अनशन पर बैठे उसके स्नेहा के पिता तबीयत बिगड़ी तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनकी सेहत की जांच की. जानकरी मिलते ही स्थानीय विधायक भी उनसे मिलने पहुंचे और उन्हें अपना समर्थन दिया.

25 जून से अनशन पर तीन लोग

विधायक ने कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्नेहा की मौत कैसे हुई. किस परिस्थिति में हुई. इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेक विगत 25 जून से तीन लोग बैठे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी जिला प्र के लोग देखने नहीं आए हैं.

उन्होंने कहा की स्नेहा हत्याकांड के मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए.  शुक्रवार  से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र के दौरान भी मैं इस मसले को पूरी मजबूती के साथ उठाऊंगा.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी से उठे सवाल

गौरतलब है कि वारदात के एक महीने होने को आ गए, लेकिन अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है. वहीं इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध लग रही है क्योंकि पुलिस ने इसे पहली नजर में आत्महत्या माना है.

सवालों में पुलिस की भूमिका

हैरान कर देने वाली बात यह है कि स्नेहा जिस बिहार पुलिस का हिस्सा थी, वही पुलिस इस पूरे मामले को संदिग्ध बना रही है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर पुलिस ने किसे बचाने के लिए स्नेहा कुमारी की मौत को आत्महत्या करार दिया है?

रिपोर्ट- अरुण कुमार शर्मा

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