शराबबंदी के बाद तम्बाकू मुक्त बिहार की पहल, किसान परेशान

बिहार में शराबबंदी के बाद अब सरकार तम्बाकू मुक्त प्रदेश बनाने की तरफ अग्रसर है. ऐसे में मुंगेर जिला के एक पंचायत में तम्बाकू की खेती कर रहे किसानों को अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है.

Arun Kumar Sharma | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: January 14, 2018, 11:04 AM IST
शराबबंदी के बाद तम्बाकू मुक्त बिहार की पहल, किसान परेशान
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Arun Kumar Sharma | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: January 14, 2018, 11:04 AM IST
बिहार में शराबबंदी के बाद अब सरकार तम्बाकू मुक्त प्रदेश बनाने की तरफ अग्रसर है. ऐसे में मुंगेर जिला के एक पंचायत में तम्बाकू की खेती कर रहे किसानों को अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. आमदनी बढ़ाने के लिए वह इसकी खेती कर रहे हैं. अन्य फसलों के मुकाबले उन्हें इसकी खेती में ज्यादा मुनाफा हो रहा है. इसके लिए वह जमकर मेहनत भी करते हैं. नशा मुक्त बिहार बनाने के लिए इन किसानों को दूसरी खेती के लिए प्रेरित करने का कोई समाधान सरकार की तरफ से नहीं किया जा रहा है.

असरगंज प्रखंड के मकवा पंचायत में करीब सौ से अधिक किसान तम्बाकू की खेती से जुड़े हुए हैं. यहां तकरीबन सौ बीघे में तम्बाकू की खेती होती है. ठंड का मौसम शरू होते ही किसान तम्बाकू की बुआई में लग जाते हैं और समय पर पौधों को पोषक तत्व देना शरू करते हैं. फरवरी और मार्च महीने में पत्तों को तोड़कर बिक्री शरू करते हैं.

तम्बाकू की खेती में किसानों को कोई भी सरकारी लाभ नहीं मिलता है. पिछले कुछ वर्षों में धान की खेती में हुई कम आमदनी के कारण किसानों का रुझान तम्बाकू की खेती की तरफ बढ़ा है. किसानों का कहना है कि रोजगार के साधन नहीं होने के कारण इस खेती से जुड़े हैं. साथ ही उनका कहना है कि प्रसाशन अगर उन्हें दूसरे रोजगार के लिए साधन मुहैया कराए तो तम्बाकू की खेती छोड़ देंगे.

किसानो का कहना है कि इस क्षेत्र में पानी की काफी दिक्क्त है इसलिए धान की फसल नहीं हो उपजती है, इस वजह से घाटा होता है. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि धान की खेती नहीं कर पाते हैं. कृषि पदाधिकारी का कहना है कि किसान तम्बाकू की खेती छोड़कर मेंथा व अन्य उपयोगी फसलों की खेती करें इससे किसानों को सरकारी लाभ भी मिलेगा और स्वरोजगार के साधन उपलब्ध होंगे. उन्होंने कहा कि जो भी किसान तम्बाकू की खेती से जुड़े हैं वे इस खेती को छोड़ दें.
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