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लोकसभा चुनाव 2019: नीतीश के 'खास' के बीच मुंगेर में सियासी महाभारत

फाइल फोटो

फाइल फोटो

इस बार का लोकसभा चुनाव बाहुबली और दिग्गज की टक्कर के कारण बड़ा दिलचस्प बन पड़ा है. एनडीए की ओर से बिहार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह तो महागठबंधन की ओर से कांग्रेस की नीलम देवी चुनावी मैदान में हैं.

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बिहार के मुंगेर संसदीय क्षेत्र में कई वर्षों तक कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन बदलते दौर में अब अन्य पार्टियां भी जीत रही हैं.1952 के बाद आठ बार कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत का परचम लहराया, लेकिन 1984 के बाद कांग्रेस यहां कभी नहीं लौटी. इससे पहले वर्ष 1964 और 1967 में डॉ. राम मनोहर लोहिया के अनुयायी और प्रखर समाजवादी मधु लिमये ने दो बार यहां से जीत दर्ज की थी. वहीं 1984 के बाद जेडीयू (एक बार जनता दल के टिकट) तीन बार और आरजेडी ने दो बार जीत दर्ज की है जबकि एकबार एलजेपी ने 2014 में जीत दर्ज की.

इस बार का लोकसभा चुनाव बाहुबली और दिग्गज की टक्कर के कारण बड़ा दिलचस्प बन पड़ा है. एनडीए ने बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को मुंगेर से अपना प्रत्याशी घोषित किया है. वहीं महागठबंधन की ओर से कांग्रेस की उम्मीदवार नीलम देवी मैदान में हैं. बता दें कि नीलम देवी कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी हैं.

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ललन सिंह और अनंत सिंह दोनों भूमिहार जाति से आते हैं. अनंत सिंह जेडीयू के विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में मोकामा से निर्दलीय विधायक हैं. उन्हें कभी नीतीश कुमार का करीबी बताया जाता था, लेकिन बिहार में 2015 में जेडीयू-आरजेडी की सरकार बनने के बाद एक मामले में उनके जेल जाने से इन रिश्तों में तल्खी आयी गयी.

वर्ष 2009 के परिसीमन के पूर्व मुंगेर जिले में हवेली खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र होता था. वर्ष 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह हवेली खड़गपुर से जीतकर बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने थे.

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मुंगेर संसदीय क्षेत्र में भूमिहार और अतिपिछड़े वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है. इसके बाद यादव, मुस्लिम, कुर्मी, और धानुक जाति के मतदाता हैं. यहां राजपूत और महादलित समुदाय के मतदाता भी प्रभावी भूमिका में रहते हैं.

हालांकि यहां का सियासी गणित भूमिहार वोटों के आधार पर परिणाम देता रहा है. ऐसा देखा गया है कि भूमिहारों के वोटों का ध्रुवीकरण किसी एक उम्मीदवार की तरफ होता आया है. अब देखना है कि इस बार के चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है.

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