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चार अबोध बेटियों को मां ने दूसरे पति के कहने पर त्याग दिया - पढ़िए मुंगेर की यह मार्मिक दास्तान

वासुदेवपुर ओपी क्षेत्र के नयागांव में भटकती मासूम बहनें जिला बाल कल्याण समिति के पास हैं. (सांकेतिक फोटो)

वासुदेवपुर ओपी क्षेत्र के नयागांव में भटकती मासूम बहनें जिला बाल कल्याण समिति के पास हैं. (सांकेतिक फोटो)

Helpless Mother: इन चारों बच्चियों को उसकी मां और सौतेले बाप ने पंजाब से बिहार जाने वाली एक ट्रेन में बैठा दिया था यह कहकर कि तुम चारों हमारे लिए बोझ हो. इन चारों बच्चियों की मार्मिक कहानी जिसने भी जानी, सबने उस मां-बाप को लानतें भेजीं, जिन्होंने इन अबोध बच्चियों को इस हाल में पहुंचाया.

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मुंगेर. मुंगेर में 12 साल की बच्ची अपनी 3 छोटी बहनों को लेकर महीने भर से दर-दर भटक रही थी. अपना और अपनी बहनों को पेट भरने के लिए वह सोझी घाट के आसपास भीख मांगती थी. दरअसल, इन चारों बच्चियों को उसकी मां और सौतेले बाप ने पंजाब से बिहार जाने वाली एक ट्रेन में बैठा दिया था यह कहकर कि तुम चारों हमारे लिए बोझ हो. इन चारों बच्चियों की मार्मिक कहानी जिसने भी जानी, सबने उस मां-बाप को लानतें भेजीं, जिन्होंने इन अबोध बच्चियों को इस हाल में पहुंचाया.

वुसुदेवपुर ओपी प्रभारी एलबी सिंह बताते हैं कि 12 साल की संजू को 11 महीने की अपनी मासूम बहन सहित दो अन्य बहनों के साथ मिली. थाना प्रभारी के मुताबिक, संजू ने बताया कि उन्हें पंजाब से बिहार आने वाली ट्रेन पर बैठा कर दर-दर की ठोकरें खाने को छोड़ दिया. संजू बताती है कि वे लोग अपनी मां रानी और पिता राजेश बिंद के साथ कासिम बाजार थाना क्षेत्र के लल्लू पोखर काल स्थान मजार के पास किराए के मकान में रहते थे. तकरीबन साल भर पहले उसके पिता राजेश बिंद की मौत किसी बीमारी की वजह से हो गई. तब मां ने वहीं रहनेवाले कृष्णनंदन यादव से दूसरी शादी कर ली. फिर हमसब हमारे भाई को लेकर पंजाब चले गए थे. पंजाब में अक्सर मेरी मां और सौतेले पिता हम बहनों को अपना बोझ बताने लगे. सौतेले पिता कहते थे कि मैंने तुम्हारी मां का बोझ उठाया है, तुम सबका नहीं.

संजू बताती है कि एक रोज उसके पिता ने चारों बहनों को एक ट्रेन पर बैठा दिया. यह ट्रेन बिहार आने वाली थी और उन्होंने हमें 400 रुपए दिए और छोड़ दिया. हमलोग किऊल स्टेशन पर उतरे और किसी तरह मुंगेर पहुंचे. हम उस घर तक भी गए जहां हम किराए पर रहते थे. मगर मकान मालिक ने कहा कि यहां पर अब तुम्हारा कुछ नहीं है. तुम्हारे पिता की मौत के बाद तुम्हारी मां ने दूसरी शादी कर ली और घर का सारा सामान साथ लेकर चली गई. ये घर अब मैंने दूसरे को किराए पर दे दिया है. जब हमने उनसे शरण मांगी तो मकान मालिक ने भगा दिया. तब हमलोग लल्लू पोखर से सीधे सोझी घाट पहुंचे और वहीं मंदिर में शरण लिया.

संजू बताती है कि सोझी घाट और आसपास ही भीख मांगकर वे लोग अपना पेट भर रहे हैं. कोई खाने के लिए दे देता था, कोई दो-चार, पांच-दस रुपए दे देता था. उसी से हम बहनें पेट पालती थीं. 11 महीने की बहन के लिए आसपास मवेशी रखने वालों से दूध मांगती थी. कभी पैसा देते थे कभी ऐसे ही दूध मिल जाता था.

बता दें कि अब राहत की बात यह है कि वासुदेवपुर ओपी क्षेत्र के नयागांव में भटकती ये मासूम बहनें जिला बाल कल्याण समिति के पास हैं. वासुदेवपुर ओपी प्रभारी एलबी सिंह को इन बच्चियों के बारे में जानकारी मिली तो वे चारों बच्चियों को थाने ले आए. उनसे सारी कहानी जानने के बाद उन्हें शुक्रवार को जिला बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया.

Tags: Begging, Bihar News, Mother

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