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Navratri Special: चमत्कार‍िक माना जाता है मुंगेर का सिद्धपीठ चंडिका देवी मंदिर, नेत्रहीन को मिलती है रौशनी

Munger News: बंगाल के सिलीगुड़ी से पूजा करने आई महिला श्रद्धालु सिमरन ने बताया कि इस मंदिर के बारे में बहुत सुने थे कि य ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट: सिद्धांत राज

मुंगेर: 52 शक्तिपीठ में से एक मां चंडिका स्थान मुंगेर मुख्यालय के गंगा नदी किनारे अवस्थित है. यह मंदिर काफी शक्तिशाली और चमत्कारी है. यहां माता सती के 52 टुकड़ों में से बायां नेत्र गिरा है, जो आज भी मौजूद है. वह सोने की कवज से जड़ा हुआ सुरक्षित है. पिछले 2 वर्ष जब कोरोना वायरस ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया था. सारे काम ठप पर गए थे, हर मंदिर के पट बंद हो चुके थे, भक्त अपने आराध्य के लिए तड़प रहे थे. वही पूरे दो वर्ष बाद इस बार के दुर्गा पूजा में पीछे की भांति भक्तगण अपने आराध्य मां दुर्गा और सभी देवी देवताओं की पूजा खुले मन से कर सकेंगे.

मां चंडिका में पूरे 2 वर्ष बाद इस बार जमकर श्रद्धालुओं के आने और मेला लगने का अनुमान लगाया जा रहा है. चूंकि भक्तगण माता के दर्शन को कई महीनों से लालायित हैं. जिसको लेकर प्रशासनिक तैयारी भी जोड़ों पर चल रही है और मंदिर के रंग रोगन और मधुमति का काम भी चल रहा है. इस बार की नवरात्र में माता के मंदिर खुले रहेंगे. भक्त खुले दिल खुले और खुले मन से मां चंडिका की पूजा कर सकेंगे. जबकि पौराणिक कथाओं में यह माना जाता है कि माता चंडिका के सबसे बड़े भक्त थे महाभारत काल के योद्धा दानवीर कर्ण.

दानवीर कर्ण के प्राण की आहुति
मां चंडिका स्थान के पुजारी गजेंद्र बाबा बताते हैं कि उस जमाने मे राजा दानवीर कर्ण रोजाना आते थे और इसी जगह पर एक कढ़ाई नुमा आकर है उसमें घी खौलता था और राजा कर्ण अपने पूजा से माता को प्रसन्न करने के लिए उस खौलते घी की कढ़ाई में अपनी आहुति देते थे. जिसके बाद माता उनसे प्रसन्न होकर उन्हें जीवित करती थी और उन्हें रोजाना वरदान के रूप में सावा मन सोना (50 किलो) मिलता था और वह गरीबों में उसे दान करते थे.

चंडिका मंदिर का इतिहास
मंदिर के बुजुर्ग पुजारी अशोक पांडा बताते हैं कि माता चंडिका की लीला अपरंपार है. यहां जो भी नेत्र रोगी आते हैं जिनको डॉक्टर ने जवाब दे दिया जिनका लेंस सुख गया, अब कहीं कोई उपाय नहीं है. वह पीड़ित मैया के दरबार आते हैं उन्हें मां को प्रणाम कराकर पुष्प दिया जाता है. साथ ही उस नेत्र रोगी को काजल देते हैं. गाय का घी और कपूर से आरती लगाकर उसी का काजल बनता है. जिसे सुबह शाम लगाने से मैया के चमत्कार से उसका नेत्र सवा महीना में ठीक हो जाता है. आंख की रोशनी आने के बाद भक्तगण प्रसन्न होकर माता को सोना, चांदी, पाठा की बलि या जो इच्छा होती है वो चढ़ाते हैं.

माता के दरबार जरूर आऊंगी
बंगाल के सिलीगुड़ी से पूजा करने आई महिला श्रद्धालु सिमरन ने बताया कि इस मंदिर के बारे में बहुत सुने थे कि यहां जो भी मांगे पूरी होती है. इसको लेकर मैं भी अपनी मन्नत मांगने मां के दरबार आई हूं. अच्छे से पूजा की हूं. आगे उन्होंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि मैंने जो मां से मांगा है वह पूरा होगा और मैं फिर से माता के दरबार जरूर आऊंगी.

दुकानदार को बेहतर व्यवसाय का भरोसा
मंदिर परिसर में पूजा-पाठ की सामग्री बेचने वाले एक दुकानदार ने कहा कि 2 साल के बाद इस बार दुर्गा पूजा पीछे की समय की तरह हो रहा है. खास बात यह है कि मुंगेर के गंगा नदी पर कई जिले को जोड़ने वाला श्री कृष्ण सेतू भी इस बार चालू हो चुका हआ. इसलिए इस बार हमे भरोसा है कि हर साल से ज्यादा श्रद्धालु इस बार माता के दरबार पहुंचेंगे और हम लोगों की अच्छा व्यवसाय होगा.

Tags: Bihar News, Hindu Temples, Munger news, Navratri Celebration, Navratri festival

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