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कचरे के ढेर के बीच विद्या का मंदिर, पढ़ाई, खेल और मिड-डे मील पर आफत

Arun Kumar Sharma | News18 Bihar
Updated: August 29, 2018, 1:36 PM IST

इस स्कूल में गंदगी के बीच बच्चे नाक पर रूमाल रख कर पढ़ने और मध्याह्न भोजन खाने के लिए मजबूर हैं. शिकायत करने के बावजूद नगर निगम प्रशासन इस बाबत लापरवाह बना हुआ है. स्थिति ऐसी है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए जल जमाव और कचरे से निकल रही बदबू महामारी का सबब बन सकती है.

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मुंगेर में एक ऐसा स्कूल है, जो नाले पर बना हुआ है. प्राथमिक विद्यालय कटघर का परिसर जहां बना हुआ है वहां नगर निगम के नाले का डम्पिंग यार्ड है. इस तरह विद्या का यह मंदिर स्वच्छ भारत अभियान को मुंह चिढ़ा रहा है.

इस स्कूल में गंदगी के बीच बच्चे नाक पर रूमाल रख कर पढ़ने और मध्याह्न भोजन खाने के लिए मजबूर हैं. शिकायत करने के बावजूद नगर निगम प्रशासन इस बाबत लापरवाह बना हुआ है. स्थिति ऐसी है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए जल जमाव और कचरे से निकल रही बदबू महामारी का सबब बन सकती है.

जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राथमिक विद्यालय कटघर की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है. इस विद्यालय में वर्ग एक से पांच तक कुल 57 गरीब बच्चे नामांकित हैं. ये सभी जलजमाव और कचड़े से उठ रही बदबू से परेशान हैं. बता दें कि मुहल्ला का दो दो नाला इसी विद्यालय परिसर में खत्म हो जाता है. इसके कारण मुहल्ले की गंदगी इसी विद्यालय परिसर में नाले के माध्यम से बहकर जमा हो जाता है. सालों भर यहां जलजमाव की स्थिति बनी रहती है.

विद्यालय परिसर के जिस भाग में जलजमाव होता है. वहां की मिट्टी दलदल हो गयी है, जबकि नाला से आने वाला कचड़ा परिसर में जमा रहता है. नाले का अंतिम हिस्सा रहने के कारण विद्यालय परिसर के कोने में बना शौचालय भी बेकार हो गया है. शौचालय का सीट जहां धंस गया है, वहीं दीवार भी क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में है.

ऐसी बात नहीं है कि नालों की सफाई नहीं होती है. नगर निगम प्रशासन द्वारा सफाईकर्मी यहां आते हैं और नाले की सफाई कर उसका कचड़ा परिसर में ही छोड़ देते हैं. विद्यालय परिसर में जमा गंदा पानी और कचड़ा स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा है.

' डीएम अंकल इस गंदगी से निजात दिला दिजिए.'

' डीएम अंकल इस गंदगी से निजात दिला दिजिए.' ये कहना है तीसरी क्लास की छात्रा संजना कुमारी सहित अन्य छात्र-छात्राओं का. इन बच्चों ने कहा कि विद्यालय परिसर की स्थिति देखने से ही पता चल जाएगा कि हमलोग किस तरह यहां पढ़ाई करते हैं. परिसर में हमलोग खेलते हैं, लेकिन नाला का पानी सहित कचरा प्रांगण में जम जाता है. खेलने के लिए अब जगह भी नहीं बची है. बदबू के कारण दम घुटता है. नाक पर रूमाल रखकर पढ़ाई करते हैं. बच्चों ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी खाना खाने के समय होता है. बदबू के बीच हम खाना खाने को विवश हैं.विद्यालय के स्थापना काल से ही ऐसी स्थिति बनी हुई है. गंदगी के कारण इस विद्यालय में लोग अपने बच्चे को पढ़ने नहीं भेजना चाहते हैं. विद्यालय के प्रधानाध्यापक कौशल किशोर और मोहल्ले के लोगों ने भी कई बार निगर निगम प्रशासन को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए लिखा, लेकिन आज तक इसका निदान नहीं निकला.

नगर निगम प्रशासन कहता है कि विद्यालय के दूसरी ओर जिसकी जमीन है, वह उधर नाला खोलने देने को तैयार नहीं है. वहीं मोहल्लेवालों का कहना है कि अगर नाला नहीं खुला तो साल भर में विद्यालय घुसने लायक तक नहीं बचेगा.

विद्यालय के अंदर से बह रहे नाले से उठने वाली बदबू से निजात दिलाने और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को लेकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक कौशल किशोर ने नगर निगम को आवेदन दिया था. इसके आलोक में मेयर रुमा राज मंगलवार को विद्यालय पहुंची और वहां की हालात का जायजा लिया.

इसके बाद मेयर ने कहा कि स्थानीय लोगों के घर से निकलने वाले पानी का निकास विद्यालय परिसर के अंदर से होता है. यह उचित प्रतीत नहीं होता है. मुझे इसकी जानकारी नहीं थी. जानकारी मिलने के बाद मैं खुद इसे देखने आई हूं. अपने स्तर से इसके समाधान का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि निगम बोर्ड से नाला के लिए प्रस्ताव पारित कर दूसरे तरफ से नाला बनाया जाएगा.

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First published: August 29, 2018, 10:22 AM IST
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