Lockdown: 50 दिनों में इतनी स्वच्छ और निर्मल हो गई गंगा कि दिखने लगीं डॉल्फिन मछलियां
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Lockdown: 50 दिनों में इतनी स्वच्छ और निर्मल हो गई गंगा कि दिखने लगीं डॉल्फिन मछलियां
लॉकडाउन के दौरान गंगा में दिखी डॉल्फिन.

लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से जहां गंगा में प्रदूषण कम हुआ और नाव चलने पर रोक लगी तो नदी का पानी साफ हो गया है, जिससे गंगा में रहने वाली डॉल्फिन (Dolphin) जैसे जलीय जीव विचरण करते दिखाई दे रहे हैं.

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मुंगेर. कभी-कभी आपदा भी ऐसा काम कर जाती है जो सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर भी नहीं कर पाती है. कुछ ऐसा ही हुआ है भारत की लाइफलाइन और आस्था का प्रतीक कही जाने वाली गंगा नदी (Ganga River) के साथ. 50 से अधिक दिनों के लॉकडाउन (Lockdown) के कारण गंगा निर्मल और स्वच्छ हो गई है. नदी का पानी इतना साफ हो गया है कि गंगा में अठखेलियां और स्वच्छंद रूप से विचरण करने वाली डॉल्फिन (Dolphin) भी दिखने लगी हैं. दरअसल 25 मार्च से देश में लागू लॉकडाउन के कारण गंगा किनारे स्थित कल-कारखानों के बंद हो जाने से गंगा में इन फैक्ट्रियों का वाहित अपशिष्ट पदार्थ गिरना बंद हो गया है. गंगा में नौकाओं के आवागमन में भी कमी आई है, जिससे गंगा का पानी निर्मल दिखाई देने लगा है.

DFO बोले- डॉल्फिन का दिखना सुखद
गंगा की स्वच्छता के बीच सबसे सुखद एहसास यह है कि गांगेय डॉल्फिन जो दिखना बंद हो चुकी थीं वो भी अब गंगा में दिखने लगी हैं. मछलियों का झुंड उन्मुक्त होकर गंगा में अठखेलियां करता दिखाई दे जाता है. लल्लू पोखर, कंकड़ घाट से लेकर मुंगेर-खगड़िया रेल सह सड़क पुल के आसपास के क्षेत्र में गांगेय डाल्फिन दिख रही हैं. मुंगेर रेंज के डीएफओ नीरज नारायण ने बताया कि लॉकडाउन के कारण जहां गंगा में प्रदूषण कम हुआ है, तो वहीं नावों के परिचालन पर रोक से गंगा साफ हो गई है. यही वजह है कि डॉल्फिन हो या अन्य जलीय जीव, गंगा में विचरण करते दिखाई दे रहे हैं.

80 फीसदी तक शुद्ध हो गया गंगाजल!
लॉकडाउन के कारण मुंगेर जिले में गंगा का जल 80 प्रतिशत शुद्ध हो गया है. इसका एक कारण ये भी है कि गंगा किनारे मंदिर और पूजा स्थलों में लोगों का आना बंद हो गया है इस कारण लोगों ने गंगा में पूजा सामग्री फेंकना भी बंद कर दिया है. साथ ही लोगों के गंगा में स्नान करने में भी कमी आई है. शहरवासी संजीव मंडल और कौशल किशोर पाठक कहते हैं कि पहली बार हमने देखा जब जिंदगी ठहर जाती है, लोगों का आवागमन रुक जाता है, कल-कारखाने बंद हो जाते हैं तब हमारी मां गंगा कितनी पवित्र हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि कई सालों बाद गंगा की तलहटी दिखी और जलीय जीवों को विचरते देखा.



लॉकडाउन में स्वच्छ और निर्मल हुई गंगा
गंगा नदी में विचरण करती डॉल्फिन.


इलाके में हैं 750 से अधिक डॉल्फिन
गंगा किनारे स्थित सोझी घाट को वन, पर्यवरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा डॉल्फिन अभ्यारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके तहत इस क्षेत्र को भागलपुर के बरारी के बाद डॉल्फिन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में डॉल्फिन के होने की संभावना व्यक्त की जाती है लेकिन यह निश्चित कहा नहीं जा सकता है कि अभी यहां कितनी संख्या में डॉल्फिन हैं. लेकिन गैर आधिकारिक रूप से कहा जाता है कि यहां से लेकर भागलपुर के क्षेत्र में लगभग 750 से अधिक संख्या में डॉल्फिन हैं.

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