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राम मंदिर निर्माण के लिए जान गंवाने वाले इस इकलौते बिहारी का बनेगा स्मारक, बनाया गया ट्रस्ट

Praveen Thakur | News18 Bihar
Updated: February 14, 2020, 2:38 PM IST
राम मंदिर निर्माण के लिए जान गंवाने वाले इस इकलौते बिहारी का बनेगा स्मारक, बनाया गया ट्रस्ट
अयोध्या आंदोलन में जान गंवाने वाले संजय कुमार का स्मारक बनेगा.

30 अक्टूबर 1990 के दिन अयोध्या (Ayodhya) के विवादित परिसर में शातिपूर्ण सांकेतिक प्रदर्शन हुआ था, लेकिन जब 2 नवंबर को 5 हजार लोगों का विशेष कार सेवकों का जत्था विवादित परिसर में पहुंचा था तो पुलिस ने गोलियां चलाईं और संजय की मौके पर ही मौत हो गई थी.

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मुजफ्फरपुर. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram temple construction in Yodhya) के लिए शुरू हुए आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले मुजफ्फरपुर के संजय कुमार का स्मारक उनके कांटी स्थित साइन सुतिहार गांव में बनाया जाएगा. स्मारक शिलान्यास के भूमि पूजन का काम भी कर लिया गया है. ग्रामीणों के सहयोग से संजय स्मृति चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया गया है. यह ट्रस्ट संजय कुमार के राम मंदिर आंदोलन में प्रेरणादाई योगदान के लिए उनकी याद में भव्य स्मारक का निर्माण करेगा.

अयोध्या आंदोलन में हुई थी संजय की मौत
वर्ष 1990 में राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने के लिए मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार और बिहार के सैकड़ों लोग अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पहुंचे थे. उस समय बाबरी मस्जिद का ढांचा बरकरार था. 30 अक्टूबर 1990 के दिन अयोध्या (Ayodhya) के विवादित परिसर में शातिपूर्ण सांकेतिक प्रदर्शन हुआ था, लेकिन जब 2 नवंबर को 5 हजार लोगों का विशेष कार सेवकों का जत्था विवादित परिसर में पहुंचा था तो पुलिस ने गोलियां चलाईं और संजय की मौके पर ही मौत हो गई थी.

ग्रामीणों ने जमीन दान कर ट्रस्ट और स्मारक  के लिए दिया योगदान

पिछले 28 सालों से हर एक साल संजय कुमार के अयोध्या आंदोलन के लिए उनकी पुण्यतिथि पर याद किया जाता था, लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है तो मुजफ्फरपुर के लोग भी संजय के योगदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए जिंदा रखना चाहते हैं. ग्रामीणों ने अपनी जमीन इस ट्रस्ट और स्मारक निर्माण के लिए दान दी है. जमीन दान देने वाले हरिशंकर सिंह, मृत्युंजय नारायण सिंह, प्रोफेसर राज नारायण पांडे और कांटी के प्रमुख मुकेश पांडे ने अपनी अपनी जमीन दान में दी है.

RSS-BJP नेताओं ने लिया हिस्सा
गुरुवार को हुए समारोह में संजय के पैतृक गांव कांटी के साइन सूतीहारा में उत्तर बिहार के प्रांत प्रचारक रामकुमार और बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने भूमि पूजन में भाग लिया. समारोह में कुढ़नी के विधायक केदार गुप्ता और बोचहां की विधायक बेबी कुमारी ने भी भाग लिया. सभी अतिथियों ने संजय कुमार के योगदान को हिंदू समाज के लिए बलिदान बताते हुए नई पीढ़ियों के लिए आदर्श बताया.भाजपा नेताओं ने कहा कि संजय कुमार की मौत के बाद से ही भाजपा लगातार परिवार के साथ खड़ी रही. उनकी दो बेटियां हैं जो विवाहित जीवन जी रही हैं. मंत्री सुरेश शर्मा ने ट्रस्ट के लिए ₹51000 का योगदान भी दिया.

घर के इकलौते चिराग थे संज
जब 90 के दशक में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन तेज हुआ था तो उस समय संजय कुमार 30 साल के थे. हिंदुत्व के भावना से ओतप्रोत संजय घर के इकलौते चिराग थे, लेकिन जब रामलला के कैद में होने की जानकारी उन्हें मिली तो वह भी कारसेवकों के तौर पर अयोध्या पहुंच गए. जबकि घरवाले अपने इकलौते संतान को अयोध्या  जाने से मना कर रहे थे. लेकिन संजय अपनी जिद पर रहे और अपनी दो छोटी बेटियों को छोड़ अयोध्या में पुलिस की गोली का शिकार बने.

जान गंवाने वाले बिहार से इकलौते बिहारी
राम मंदिर आंदोलन के दौरान बिहार से इकलौते शख्स संजय कुमार थे जिनकी मौत अयोध्या में हुई थी. लेकिन संजय की मौत के बाद मुजफ्फरपुर खासकर उत्तर बिहार के अलग-अलग जिलों से लगातार राम मंदिर आंदोलन में लोग जुड़ते गए. संजय की मौत में हिंदूवादी लोगों को प्रेरणा देने का काम किया.

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First published: February 14, 2020, 2:27 PM IST
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