AES का कहरः केंद्र की बिहार को सलाह, CM नीतीश ने बुलाई बैठक

एईएस बुखार से बच्चों की मौत को लेकर लगातार बिगड़ रहे हालात की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आंतरिक बैठक बुलाई है. इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.

News18 Bihar
Updated: June 17, 2019, 4:41 PM IST
AES का कहरः केंद्र की बिहार को सलाह, CM नीतीश ने बुलाई बैठक
नीतीश कुमार ने मौजूदा हालात पर बैठक बुलाई है.
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Updated: June 17, 2019, 4:41 PM IST
बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार का कहर जारी है. अकेले मुजफ्फरपुर में इससे 100 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है. लगातार बिगड़ रहे हालात की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आंतरिक बैठक बुलाई है. इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.

दूसरी तरफ केंद्र की तरफ से बिहार सरकार को इस संबंध में सलाह भी दी गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों द्वारा बेड की कमी को लेकर मिली शिकायतों पर कहा है कि राज्य के कम से कम 10 जिलों में बच्चों के लिए आईसीयू बनाया जाए. इसके अलावा केंद्र ने श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH), मुजफ्फरपुर में बच्चों के लिए आईसीयू में 100 बेड बनाने को कहा है. केंद्र ने यह भी कहा कि राज्य में कम से कम 5 वायरोलॉजी लैब्स बनाए जाएं.



पहले दिन से केंद्र की टीम कर रही काम
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न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस पूरे मामले पर कहा है कि हमारी टीम पहले दिन से वहां मौजूद है और लगातार काम कर रही है. मैं भी वहां गया था और मरीजों से मिला. मैंने केस शीट भी देखी और डॉक्टरों से इस मामले में विस्तृत चर्चा भी की.

रविवार को हालात का जायजा लेने पहुंचे थे डॉ. हर्षवर्धन
रविवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राज्य मंत्री अश्विनी चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय मुजफ्फरपुर में हालात का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि एईएस से दोबारा इतने बच्चों की मौत न हो, इसके लिए लगातार प्रयास और रिसर्च किया जाएगा. रविवार को बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे हर्षवर्धन ने बिहार सरकार को आश्वासन दिया था कि AES की रोकथाम के लिए हाई क्वालिटी का रिसर्च सेंटर बनेगा और 1 साल के भीतर ये रिसर्च सेंटर पूरा होगा.

डॉक्टर के नाते देखा
हर्षवर्धन ने कहा था कि उन्‍होंने एक डॉक्टर होने के नाते भी लोगों को देखा है और हर बात की बारीकी से जानकारी ली है. जहां तक मौत की बात है तो पिछले वर्षों में कुछ कमी आई थी. वर्ष 2014 में ज्यादा संख्या में केस सामने आए थे, लेकिन इस साल फिर संख्या में बढ़ोतरी हुई है. सभी मरीजों के लक्षण एक जैसे हैं, लेकिन जो समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनको बचाया जा रहा है.

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First published: June 17, 2019, 4:19 PM IST
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