बिहार में लगातार मासूम बच्चों की जान लील रहा है चमकी बुखार, 146 हुई संख्या

बिहार में चमकी बुखार ( AES)का कहर जारी है. राज्य और केंद्र के आनन-फानन में शुरू किए गए प्रयासों के बावजूद इस बीमारी ने अब तक 146 बच्चों को अपना ग्रास बना लिया है.

News18 Bihar
Updated: June 19, 2019, 4:17 PM IST
बिहार में लगातार मासूम बच्चों की जान लील रहा है चमकी बुखार, 146 हुई संख्या
बीमारी क्या है यह किसी को पता नहीं है. कभी यह एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) तो कभी ये चमकी बीमारी के नाम से जाना जाता है, लेकिन अभी तक इस पर कोई एक राय नहीं बन पाई है.
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Updated: June 19, 2019, 4:17 PM IST
बिहार में चमकी बुखार (एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम, AES)का कहर जारी है. राज्य और केंद्र के आनन-फानन में शुरू किए गए प्रयासों के बावजूद इस बीमारी ने अब तक 146 बच्चों को अपना ग्रास बना लिया है. इसमें अकेले मुजफ्फरपुर में 114 मासूम जान गंवा चुके हैं.

बीमारी को लेकर उहापोह
बीमारी क्या है यह किसी को पता नहीं है. कभी यह एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) तो कभी ये चमकी बीमारी के नाम से जाना जाता है, लेकिन अभी तक इस पर कोई एक राय नहीं बन पाई है.

लीची को बताया बीमारी की वजह

हालांकि इस बीच एक बात जरूर हुई है कि मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची को सबने टारगेट किया है. खास तौर पर शासन-सत्ता के लोग लीची को इस बीमारी की वजह बता रहे हैं. बीते दिनों जब केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री मुजफ्फरपुर के दौरे पर थे तो उन्होंने इसकी वजह लीची को बताया था.

लीची की आड़ में छिपने की कोशिश
हालांकि विशेषज्ञों और जानकारों की मानें तो यह शासन-सत्ता की नाकामी छिपाने का महज बहाना है. क्योंकि न तो लीची खाने से बीमारी होती है इसका कोई उदाहरण सामने नहीं आया है. खास तौर पर जिन बच्चों की मौत हुई है उनमें कोई वायरस नहीं पाया गया है बल्कि शुगर और सोडियम की कमी पाई गई है.
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हीट और ह्यूमिडिटी है बड़ा कारण
डॉ. गोपाल शंकर सहनी मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ( SKMCH) के शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और हेड ऑफ डिपार्टमेंट भी हैं. वह बताते हैं कि इस बीमारी का कारण लीची नहीं, बल्कि हीट और ह्यूमिडिटी है. इलाके में गर्मी जब 40 डिग्री के पार होती है और ह्यूमिडिटी 60 पार होती है, यह स्थिति कई दिनों तक लगातार बनी रहती है तो बच्चे बीमार होने लगते हैं.

जनवरी में आया पहला मामला
वहीं किसान श्री से सम्मानित किसान भोलानथ झा कहते हैं कि लीची 12 मई से ही बाजार में आ पाती है. जबकि छह महीने पहले एक साल का बच्चा इस बीमारी से प्रभावित होता है. वह लीची नहीं खाता है. वहीं इसका पहला मामला जनवरी के अंतिम सप्ताह में आया था तब लीची का अस्तित्व तक नहीं था.

डायरिया का कहर
बिहार एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार के प्रकोप से जूझ ही रहा है कि अब डायरिया के रूप में एक नई मुसीबत लोगों के सामने खड़ी हो गई है. नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड के जत्ती भगवानपुर गांव में डायरिया के चलते 85 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं. डायरिया की चपेट में बच्चे, महिलाएं और पुरुष सभी शामिल हैं. डायरिया पीड़ित लोगों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

चमकी बुखार में मासूमों की मौत की जिलेवार संख्या
मुजफ्फरपुर -114
हाजीपुर -11
समस्तीपुर -5
मोतिहारी -7
पटना PMCH-1
शिवहर-2
बेगूसराय-1
भोजपुर-1
सीवान-1
बेतिया-1

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First published: June 19, 2019, 2:38 PM IST
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