बिहार चुनाव: बाहरी बताकर पूर्व मंत्री का हुआ विरोध तो जदयू प्रत्याशी ने सिंबल लौटाने का किया फैसला, जानें पूरा मामला

पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा ने मीनापुर विधानसभा सीट का सिंबल लौटाने का फैसला किया है.
पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा ने मीनापुर विधानसभा सीट का सिंबल लौटाने का फैसला किया है.

मीनापुर विधानसभा सीट (Meenapur Assembly Seat) पर जदयू (JDU) द्वारा बाहरी प्रत्याशी को दिए जाने का विरोध पिछले दिनों काफी सुर्खियों में रहा. अब खुद यहां के उम्मीदवार मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) ने सिंबल लौटाने का फैसला किया.

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मुजफ्फरपुर. मीनापुर विधानसभा सीट से एनडीए (NDA) ने जदयू (JDU) को सीट मिली तो पार्टी ने यहां से पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) को टिकट दिया है, लेकिन पार्टी द्वारा सिंबल मिलते ही उनका विरोध तेज हो गया है. बाहरी और स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा बनाकर एनडीए ने पिछले 4 दिनों में 3 सभाएं कर मनोज कुशवाहा के विरोध में लोगों को एकजुट किया. जिसका परिणाम हुआ कि पूर्व मंत्री रहे ने पार्टी के सिंबल को लौटाने का फैसला ले लिया. बता दें कि मनोज कुशवाहा मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते रहे हैं. पिछले चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी केदार गुप्ता (BJP candidate Kedar Gupta) ने हराया था. इस बार कुढ़नी सीट भाजपा (BJP) के खाते में है. जिसके कारण जदयू नेता मनोज कुशवाहा को मीनापुर विधानसभा सीट से जदयू ने प्रत्याशी बनाया था. मीनापुर में भाजपा नेताओं के साथ ही जदयू नेताओं ने भी बाहरी प्रत्याशी बताकर मनोज कुशवाहा का विरोध करने का फैसला लिया था.

विरोध में जदयू-भाजपा ने की थी तीन सभा

मीनापुर में जदयू (JDU) द्वारा बाहरी प्रत्याशी को दिए जाने का विरोध पिछले दिनों काफी सुर्खियों में रहा. सबसे पहले भाजपा नेता अजय कुमार (BJP leader Ajay Kumar) ने लोगों के साथ बैठक कर बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा गरम किया. अ जय कुमार पूर्व मंत्री दिनेश प्रसाद के बेटे हैं. इससे पहले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मीनापुर से चुनाव लड़ा था. लेकिन, उन्हें आरजेडी उम्मीदवार मुन्ना यादव ने भारी मतों से हराया था. भाजपा के पिछले चुनाव में हार के कारण ही जदयू के स्थानीय नेता इस बार मीनापुर में काफी सक्रिय थे.



दरअसल स्थानीय नेताओं को उम्मीद थी कि पार्टी उनमें से ही किसी को टिकट देगी, लेकिन पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा पर पार्टी ने भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया. जदयू के पंकज  किशोर और जदयू महिला सेल की जिला अध्यक्ष वीणा यादव ने भी साहब बाहरी प्रत्याशी का विरोध करने का फैसला किया था. तीनों ही सभाओं में इतनी भीड़ थी कि अंततः मनोज कुशवाहा ने मीनापुर सीट से चुनाव लड़ने से मना कर दिया.


टिकट पर अब भी बना हुआ है संशय

माना जा रहा है कि जदयू मीनापुर में पार्टी से जुड़े उन लोगों को अब टिकट देगी जो मीनापुर के ही रहने वाले हैं और जिनकी सक्रियता पार्टी में रही है. लेकिन, सिंबल प्राप्त करने वाले मनोज कुशवाहा का विरोध करने वाले जदयू नेताओं को टिकट नहीं मिलने की संभावना है. पार्टी इसे गंभीरता से लेते हुए उन चेहरों पर भरोसा जताने वाली है जिन्होंने पार्टी के फैसले का विरोध नहीं किया है. ऐसे में मनोज कुमार जो खेती-बाड़ी के क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए अपनी पहचान बनाए हैं, उन्हें टिकट मिलने की संभावना प्रबल बताई जा रही है. देखना दिलचस्प होगा कि क्या विरोध करने वाले जदयू और भाजपा नेता मीनापुर से निर्दलीय प्रत्याशी बनते हैं या नहीं.

कुढ़नी से चुनाव लड़ सकते हैं मनोज कुशवाहा 

न्यूज़ 18 से बात करते हुए मनोज कुशवाहा ने इस बात की पुष्टि की कि वह मीनापुर से अब चुनाव नहीं लड़ेंगे और अपना सिंबल पार्टी को सौंपने जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने पुराने कार्यक्षेत्र आने में जनता की राय लेकर चुनाव लड़ने का फैसला ले सकते हैं. गठबंधन के तहत भाजपा को सीट जाने से मनोज कुशवाहा की परेशानी बढ़ी हुई है. माना जा रहा है कि पार्टी से कुढ़नी क्षेत्र से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मनोज कुशवाहा कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन कर सकते हैं.
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