अब पटना और मुजफ्फरपुर में होगा बच्चों की जान लेने वाले इंसेफेलाइटिस पर रिसर्च

बिहार में चमकी बुखार की वजह से इस साल 7 बच्चों की मौत हो चुकी है.
बिहार में चमकी बुखार की वजह से इस साल 7 बच्चों की मौत हो चुकी है.

अब तक इस बीमारी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा अमेरिका के अटलांटा तक सैंपल भेजा जा चुका है लेकिन जांच में बीमारी के कारणों को लेकर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है.

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मुजफ्फरपुर. एईएस यानि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के कारणों का पता अब बिहार के हैं लेबोरेटरी में किया जाएगा. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने मुजफ्फरपुर में बातचीत में कहा है कि हरेक साल गर्मी के मौसम में बच्चों में होने वाले चमकी बुखार यानि एईएस को लेकर अब बिहार में ही शोध का काम किया जाएगा, इसके लिए पटना के आईजीआईएमएस में उच्च स्तरीय शोध लैब की स्थापना की गई है जिसमें बीमार बच्चों के सैंपल लेकर बीमारी के कारणों का पता किया जाएगा. पांडेय ने कहा कि मुजफ्फरपुर में भी नवनिर्मित सौ बेड के पीकू भवन के ऊपर शोध के लिए लैब की स्थापना की जा रही है जो जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा. अब तक इस बीमारी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा अमेरिका के अटलांटा तक सैंपल भेजा जा चुका है लेकिन जांच में बीमारी के कारणों को लेकर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है.

6 सालों तक हुआ शोध

मुजफ्फरपुर सहित आसपास के जिलों में होने वाली इस बीमारी को लेकर 2012 से ही देश-विदेश की स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय एजेंसी बीमारी के कारणों का पता करती रही है लेकिन लंबी पड़ताल के बाद भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. एनसीडीसी नई दिल्ली, सीडीसी,अटलांटा , एनआईवी पुणे और नई दिल्ली की वेक्टर बोर्न डिजीज सहित और दूसरी कई स्वास्थ विभाग के संगठनों द्वारा बच्चों में होने वाली चमकी बुखार यानि एईएस को लेकर पड़ताल की जाती रही है लेकिन बीमारी के कारणों का अब तक पता नहीं चला है. बिहार सरकार एक साथ बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चला रही है साथ ही साथ बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए भी प्रयासरत है लेकिन अब बिहार सरकार ने बिहार के अंदर ही उच्च स्तरीय लैब की स्थापना कर विशेषज्ञों की टोली से बीमारी के पता लगाने में जुटने के लिये कहेगी.



25 साल से है बीमारी का कहर
मुजफ्फरपुर सहित आसपास के 6 जिलों में हरेक साल गर्मी में बच्चों को इस बीमारी का कहर झेलना पड़ता है. सबसे अधिक छोटे बच्चों को इस बीमारी का शिकार होना पड़ता है. 1995 में मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार नामक इस बीमारी से सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी इसके बाद से हर एक साल गर्मी के मौसम में इस बीमारी को लोगों ने नोटिस करना शुरू किया लेकिन साल 2010 आते-आते इस बीमारी ने अपना प्रभाव क्षेत्र काफी बढ़ा लिया. मुजफ्फरपुर के अलावा पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली बेतिया और समस्तीपुर जिले से भी  बच्चे प्रभावित होते रहे हैं. मुजफ्फरपुर के बाद सबसे अधिक पूर्वी चंपारण के बच्चे बीमारी की चपेट में आते हैं. इस साल 54 बच्चे बीमार हो चुके हैं जिसमें 7 बच्चों की मौत हुई है।
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