धारा 370 पर बयान देकर बुरे फंसे फारूक अब्दुल्ला, बिहार की इस अदालत में देशद्रोह का केस दर्ज

अब्दुल्ला ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि हम जिस तरह से चीन से बात कर रहे हैं उसी तरह पड़ोसी से बात करनी पड़ेगी (फाइल फोटो)
अब्दुल्ला ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि हम जिस तरह से चीन से बात कर रहे हैं उसी तरह पड़ोसी से बात करनी पड़ेगी (फाइल फोटो)

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सोमवार को इस बात से इनकार किया कि पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने कहा था कि चीन के सहयोग से जम्मू-कश्मीर में दोबारा आर्टिकल 370 बहाल किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 2:53 PM IST
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मुजफ्फरपुर. धारा 370 (Jammu-Kashmir Article 370) के मामले में अपने बयान को ले कर जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम डॉ फारुक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) बुरे फंस गए हैं. बिहार की मुजफ़्फ़रपुर कोर्ट में उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है. मुज़फ़्फ़रपुर सीजेएम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वाद को स्वीकार कर लिया है और सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय किया है.

यह मुकदमा मुजफ़्फ़रपुर के अधिवक्ता सुधीर ओझा ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुकेश कुमार की अदालत में दर्ज कराया है. मुकदमा आईपीसी की धारा 124क, 121क और 504 क तहत दर्ज किया गया है. वादी अधिवक्ता ने पूर्व सीएम पर आरोप लगाया है कि फारुख अब्दुल्लाह चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर देश के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.

वादी के अनुसार फारुख अब्दुल्ला धारा 370 को हटाए जाने के मामले में देश की आवाम को भड़का रहे हैं. उनका यह बयान देश की अस्मिता के खिलाफ है जिसमें उन्होंने कहा है कि चीन के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में धारा 370 को लागू कराया जाएगा. इसके लिए डॉ अब्दुल्लाह ने पाकिस्तान से सहयोग लेने की भी बात कही है. आज जबकि चीन और पाकिस्तान से देश के रिश्ते तल्ख हैं वैसे में देश के एक जिम्मेदार नागरिक का यह बयान देशद्रोह के समान है.



मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है. चीन शुरू से इसका विरोध करता रहा है और सीमा पर उसका आक्रामक रुख मोदी सरकार के इस गलत कदम के कारण है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने इस मसले पर कहा कि 'हमारे अध्यक्ष पिछले वर्ष पांच अगस्त को संसद द्वारा अनुच्छेद 370 और 35-ए के अधिकतर प्रावधानों को रद्द करने पर लोगों के गुस्से को उजागर कर रहे थे, जो हाल के महीने में वह लगातार करते रहे हैं. उन्होंने जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में कोई भी इन बदलावों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है.'
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