इंसेफेलाइटिस से 48 मौत पर एक्शन में मोदी सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री आज जाएंगे मुजफ्फरपुर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार AES कई बीमारियों का समूह होता है और इसमें जापानी इन्सेफेलाइटिस या चमकी बुखार और हाईपोग्‍लेसीमिया दोनों ही आते हैं. बिहार में AES से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं. मुजफ्फरपुर शहर के दो अस्पतालों में अब तक 48 बच्चों की मौत हो चुकी है.

News18 Bihar
Updated: June 13, 2019, 7:35 AM IST
इंसेफेलाइटिस से 48 मौत पर एक्शन में मोदी सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री आज जाएंगे मुजफ्फरपुर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन
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Updated: June 13, 2019, 7:35 AM IST
बिहार के कई जिलों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES का कहर जारी है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार अब तक 35 बच्चों की जान जा चुकी है जबकि न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार अब तक इससे 48 बच्चों की मौत हो चुकी है. जाहिर है संकट गहराता जा रहा है और राज्य प्रशासन इसे संभाल पाने में अब तक नाकाम साबित हुआ है. ऐसे में आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सुदान मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे.

अश्विनी चौबे का मुजफ्फरपुर दौरा


जबकि आज ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्वनी कुमार चौबे भी AES के प्रकोप से उत्पन्न हालात का जायजा लेने मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे.

बता दें कि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टरों की केंद्रीय जांच टीम मुजफ्फरपुर के SKMCH पहुंची. इनमें डॉक्टर अरुण कुमार सिन्हा के नेतृत्व में डॉ. गोयल, डॉ. पूनम, पटना AIIMS के डॉ. लोकेश और NCDC पटना के डॉ. राम सिंह शामिल हैं.

35 की मौत की बात बिहार सरकार ने मानी
बता दें कि न्यूज़18 की पुख्ता रिपोर्ट सामने आने के बाद बिहार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने AES की चपेट में आने से 35 बच्‍चों की मौत होने की बात स्‍वीकार की है. हालांकि यह स्वीकारोक्ति वास्तविक आंकड़े (न्यूज़18 की पड़ताल के अनुसार) से 13 कम है. यही नहीं मुजफ्फरपुर के डीएम के अनुसार मौत के आंकड़े 43 हैं.

84 बच्चों का चल रहा इलाज
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बिगड़ते हालात के बीच प्रधान सचिव ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. बता दें कि मंगलवार तक स्वास्थ्य विभाग 11 ही बच्चों की मौत ही मान रहा था. बहरहाल, प्रधान सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि 84 बच्‍चों का अब भी इलाज चल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार के 12 जिलों में AES का प्रभाव है. बीमारी के कहर को देखते हुए चार ICU चालू किए गए हैं, फिर भी बेड कम पड़ रहे हैं.

AES से 12 जिले प्रभावित
प्रधान सचिव के अनुसार 28 बच्चों की मुजफ्फरपुर के SKMCH और 7 की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. 12 प्रभावित जिलों के 222 पीएचसी में इसके इलाज की व्यवस्था की गई है. गौरतलब है कि सोमवार को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा था कि अभी तक 11 बच्चों के मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन इसमें AES यानी इन्सेफेलाइटिस से नहीं बल्कि 10 बच्चों की मौत हाईपोगलेसिमिया से हुई है, जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इन्सेफेलाइटिस से हुई है.

AES ग्रुप में आती हैं कई बीमारियां
दरअसल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार AES कई बीमारियों का समूह होता है और इसमें ही जापानी इन्सेफेलाइटिस या चमकी बुखार और हाईपोग्‍लेसीमिया दोनों आते हैं. इस तरह मंत्री ने अपने बयानों के जरिये उस बड़े विषय को किनारे करने की कोशिश की जिसकी जवाबदेही सीधे तौर पर स्वास्थ्य महकमे और बिहार सरकार की है.

बता दें कि बिहार में AES से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं. मुजफ्फरपुर शहर के दो अस्पतालों में अब तक इससे 48 बच्चों की मौत हो चुकी है.

इनपुट- अमितेश

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