लाइव टीवी

मुजफ्फरपुर: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट के लिए फंड में पड़ा है 980 करोड़, फिर भी 30 महीने में नहीं हुआ कोई काम

Pravin thakur | News18 Bihar
Updated: January 15, 2020, 8:44 PM IST
मुजफ्फरपुर: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट के लिए फंड में पड़ा है 980 करोड़, फिर भी 30 महीने में नहीं हुआ कोई काम
25 जून 2017 को मुजफ्फरपुर शहर का स्मार्ट सिटी के लिए चयन किया गया था. (सांकेतिक फोटो)

मुजफ्फरपुर शहर (Muzaffarpur City) का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट (Smart City Project) में चयन हुए करीब ढाई साल से अधिक का समय बीत गया है. जबकि 980 करोड़ की भारी भरकम राशि आवंटित होने के बाद भी अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ है, जो कि हैरान करने वाला है.

  • Share this:
मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर शहर (Muzaffarpur City) का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट (Smart City Project) में चयन हुए करीब ढाई साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक कोई भी काम धरातल पर शुरू नहीं हो सका है. योजनाओं के चयन और डीपीआर बनाने से लेकर उसकी स्‍वीकृति में ही अधिकारी व नेता उलझ कर रह गये हैं. हैरानी की बात ये है कि 980 करोड़ (980 Crores) की भारी भरकम राशि स्मार्ट सिटी के लिए आवंटित होने के बाद भी बेहतर समन्वय और इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण विकास का काम रुका हुआ है. जबकि चुनावी साल में स्मार्ट सिटी को लेकर अब आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है.

2017 में हुआ था चयन

कई दौर में पिछड़ने के बाद जब 25 जून 2017 को मुजफ्फरपुर शहर का स्मार्ट सिटी के लिए चयन किया गया था, लेकिन अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है. हैरानी की बात है कि स्मार्ट सिटी के चयन के एक साल बाद तक कन्सलटेंट कम्पनी का ही सही तरीके से चुनाव नहीं हो सका. जून 2018 में जब श्रेया नामक एजेंसी का चयन योजना के चयन और सर्वे सहित दूसरे प्रोजक्ट को तैयार करने के लिए किया गया, लेकिन काम में तेजी फिर भी नहीं आ सका. कई दौर की स्मार्ट सिटी कमेटी की बैठक के बाद फिलहाल 3 योजनाओं का डीपीआर स्वीकृत किया गया है. इनमें इन्ट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेन्टर और दो स्मार्ट सड़क बनने का रास्ता साफ हुआ है, जिसमें 197 करोड़ 52 लाख की लागत से बनने वाली 3 योजनाओं को टेंडर के लिए भेजा गया है. यह योजना भी कब तक पूरा होगी इसके बारे में टेंडर फाइनल होने के बाद ही पता चल सकेगा. 137 करोड़ की लागत से बनने वाले इन्ट्रीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेन्टर में शहर की परिवहन व्यवस्था, पुलिस के सौ नंबर के डायल की सुविधा और एम्बुलेंस सहित दूसरी सभी आवश्यक सेवाएं एक छत के नीचे से लोगों को देने की योजना है. एमआईटी से स्टेशन रोड और अखाड़ाघाट रोड तक दो स्मार्ट सड़कों को बनाई जानी हैं.

मंत्री ने कही ये बात

बिहार के नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा है कि शीघ्र ही स्मार्ट सिटी की योजनाएं सड़कों पर दिखाई पड़ने लगेंगी. स्मार्ट सिटी के लिए दो तरीके से विकास करने की योजना है. पहले स्मार्ट सिटी के लिए एबीडी एरिया को चिह्नित कर विकास की योजनाएं शुरू करनी हैं, तो दूसरी तरफ मुजफ्फरपुर शहर के पुराने शहरी क्षेत्र का विकास करना है. स्मार्ट सिटी के लिए कई योजनाओं के पाइपलाइन में रहने की बात की जा रही है, जिसमें या तो डीपीआर बनाकर वुडको की सहमति के लिए तकनीकी तौर पर भेजा गया है. आपको बता दें कि सुरेश शर्मा मुजफ्फरपुर से ही विधायक हैं.

128 करोड़ की योजना को...
स्मार्ट सिटी के बोर्ड ऑफ गर्वनिंग बॉडी में शामिल नगर आयुक्त के मुताबिक 128 करोड़ 98 लाख की राशि से बनने वाली विभिन्न विकास योजनाओं के लिए वुडको के पास डीपीआर अनुमोदन के लिए भेजा गया है, जिसमें कल्याणी रोड का निर्माण, इमलीचट्टी सरकारी बस स्टेंड का आधुनिकीरण और पार्किंग स्थल का निर्माण, शहर में जाम से निजात के लिए 16 जंक्शन प्वाइंट को विकसित करने, इन जंक्शन प्वाइंट पर आरओ का पानी उपलब्ध कराने सहित सूतापट्टी और लहटी मार्केट के कायाकल्‍प का काम 23 करोड़ की लागत से करना है. सिटी पार्क और सिकन्दकरपुर झील के सौन्दर्यीकरण के साथ ही विभिन्न बिजली के तार को अंडर ग्राउंड कर आधुनिक नाले का निर्माण करना है. साथ ही 356 करोड़ 78 लाख की लागत से कई योजनाओं के डीपीआर बनाने की प्रक्रिया जारी रहने का दावा किया जा रहा है.नगर आयुक्त ये बोले
नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा ने कहा है कि वुडको से तकनीकी अनुमोदन के लिए कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं. विभिन्न विभागों से अनुमोदन भी योजना को अंतिम रूप से स्वीकृति दिलाने के लिए किया जाना है. चुनावी साल में लंबे समय से स्मार्ट सिटी का कोई भी काम धरातल पर दिखाई नहीं पड़ने से शहर में लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.

आरोपों का दौर शुरू
बहरहाल, न्यूज़ 18 से बातचीत में मेयर सुरेश कुमार ने कहा कि वे अब स्मार्ट सिटी की बैठक में भी नहीं जाने वाले हैं. वह पहले से स्मार्ट सिटी के लिए चयनित योजनाओं को निगम में वार्ड पार्षदों से चर्चा कराकर पास होने पर ही लागू करने की मांग करते आ रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ मुजफ्फरपुर से कई बार विधायक रहे विजेन्द्र चौधरी ने वार्ड-वार्ड घूमकर नाराज लोगों को गोलबंद करना शुरू कर दिया है. हालांकि अब इस योजना को लेकर मुजफ्फरपुर के विधायक और नगर विकास एवं आवास मंत्री ने मेयर पर इसका काम शुरू ना होने देने का ठीकरा फोड़ दिया है. जबकि मुजफ्फरपुर के स्मार्ट सिटी में चयन के लिए शहरवासियों ने नगर निगम द्वारा चलाये गये अभियानों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था, लेकिन चयन के बाद हुक्करानों ने अपनी जिम्मेवारी को ठीक से नहीं समझा. आज भी 980 करोड़ रुपये खाते में पड़े हैं और अब तक काम सही तरीके से शुरू नहीं हो पाया है. जबकि लोगों को कई तरीके की समस्‍याओं से जूझना पड़ रहा है.

 ये भी पढ़ें

डिप्‍टी CM सुशील मोदी ने तेजस्‍वी की सीमांचल यात्रा पर कसा तंज, लगाया ये आरोप

कांग्रेस के दही-चूड़ा भोज में जुटे गठबंधन के सभी दिग्गज, लेकिन नहीं मिटी खटास

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मुजफ्फरपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 15, 2020, 8:25 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर