बिहार में चमकी बुखार से 125 बच्चों की मौत, हर्षवर्धन और मंगल पांडेय के खिलाफ कोर्ट में शिकायत

मुजफ्फरपुर सीजीएम कोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है. सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी की ओर से दाखिल इस शिकायत पर 24 जून को सुनवाई होगी.

News18 Bihar
Updated: June 17, 2019, 4:08 PM IST
बिहार में चमकी बुखार से 125 बच्चों की मौत, हर्षवर्धन और मंगल पांडेय के खिलाफ कोर्ट में शिकायत
मुजफ्फरपुर सीजीएम कोर्ट में केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन और बिहार के मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ शिकायत की गई है. (फोटो- डॉ हर्षवर्धन के ट्विटर से)
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Updated: June 17, 2019, 4:08 PM IST
बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार से होने वाली बच्चों की मौत का आंकड़ा 125 तक जा पहुंचा है. मुजफ्फरपुर और आस-पास के जिले के लोग इससे परेशान हैं. इसी बीच जिले के सीजीएम कोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है. सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी की ओर से दाखिल इस शिकायत पर 24 जून को सुनवाई होगी.

सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने अपनी शिकायत में लिखा है कि जागरूकता अभियान नहीं चलाने की वजह से बच्चों की मौत हुई है. इस बीमारी से पिछले कई वर्षों में सैकड़ों बच्चों की मौत हुई है और इस पर अब तक कोई शोध (रिसर्च) कार्य नहीं किया गया. हाशमी का कहना है कि सरकार की लापरवाही के कारण बच्चों की जान जा रही है.

रविवार को हालात का जायजा लेने पहुंचे थे डॉ. हर्षवर्धन
रविवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राज्य मंत्री अश्विनी चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय मुजफ्फरपुर में हालात का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि एईएस से दोबारा इतने बच्चों की मौत न हो, इसके लिए लगातार प्रयास और रिसर्च किया जाएगा. रविवार को बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे हर्षवर्धन ने बिहार सरकार को आश्वासन दिया था कि AES की रोकथाम के लिए हाई क्वालिटी का रिसर्च सेंटर बनेगा और 1 साल के भीतर ये रिसर्च सेंटर पूरा होगा.

डॉक्टर के नाते देखा
हर्षवर्धन ने कहा था कि उन्‍होंने एक डॉक्टर होने के नाते भी लोगों को देखा है और हर बात की बारीकी से जानकारी ली है. जहां तक मौत की बात है तो पिछले वर्षों में कुछ कमी आई थी. वर्ष 2014 में ज्यादा संख्या में केस सामने आए थे, लेकिन इस साल फिर संख्या में बढ़ोतरी हुई है. सभी मरीजों के लक्षण एक जैसे हैं, लेकिन जो समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनको बचाया जा रहा है.

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First published: June 17, 2019, 3:20 PM IST
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