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Lockdown2.0: घोड़ी की बजाय बाइक से पहुंचा दूल्हा, बिन बैंड-बाजा-बाराती ही दुल्हन के साथ लिए फेरे

मुजफ्फरपुर में लॉकडाउन के दौरान शादी करने वाला जोड़ा

मुजफ्फरपुर में लॉकडाउन के दौरान शादी करने वाला जोड़ा

20 अप्रैल को लॉकडाउन (Lockdown) में थोड़ी राहत भी मिल गई. इसी योजना के तहत गोविंद अपने भाई के साथ बाइक पर सवार होकर अपने ससुराल पहुंच गया. पीछे से गोविंद के पिताजी भूषण ठाकुर अपने दामाद के साथ समधियाने पहुंचे.

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मुजफ्फरपुर. कहते हैं कि दो आत्माओं के मधुर मिलन के योग संयोग अगर बन जाते हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें मिलने से कोई नही रोक सकती. चाहे वो कोरोना जैसी महामारी (Corona Epidemic) हीं क्यों न हो. बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिला के एक गांव में कुछ ऐसा हीं हुआ. साथ-साथ धड़कने के लिए बेताब दो जंवा दिलों ने रस्म रिवाज़ की दीवारों को तोड़ते हुए और कोरोना बंदी (Corona Lockdown) के सभी जरूरतों को पूरा करते हुए एक दिल हो गए. इस मधुर मिलन की चर्चा आम हो रही है.

जनवरी में ही ठीक हुई थी शादी

दरअसल औराई के भूषण ठाकुर के पुत्र गोविंद और कटरा के विशुनपुर निवासी शैलेन्द्र मिश्रा की बेटी लक्ष्मी की शादी जनवरी में हीं तय हो चुकी थी. दोनों परिवारों की सुविधा के ख्याल से शादी की तारीख 20 अप्रैल रखी गई तबसे गोविंद और लक्ष्मी रूमानी ख्यालों की हसीन राह के हमराह बन चुके थे. दोनों परिवार तैयारी में लगे थे 25 मार्च को मोदी जी ने कोरोना बंदी का ऐलान कर दिया लेकिन 14 अप्रैल को खत्म हो रहे लॉकडाउन के बीच तैयारी जारी रही.

लॉकडाउन 2 के दौरान लिया फैसला

इसी बीच 13 अप्रैल को लॉकडाउन-2 आ धमका लेकिन तब तक गोविंद ने लक्ष्मी के नाम का सेहरा सजा लिया था और लक्ष्मी भी गोविंद के नाम की मेहंदी अपनी नाज़ुक हथेली पर सजा चुकी थी इसलिए गोविंद ने फैसला लिया कि 20 अप्रैल को हर हाल में शादी तो होगी लेकिन लॉकडाउन के तहत न बैंड बजेगा, न बारात जाएगी और न कोई भोज-भात होगा.

भाई के साथ पहुंचा ससुराल

20 अप्रैल को लॉकडाउन में थोड़ी राहत भी मिल गई. इसी योजना के तहत गोविंद अपने भाई के साथ बाइक पर सवार होकर अपने ससुराल पहुंच गया. पीछे से गोविंद के पिताजी भूषण ठाकुर अपने दामाद के साथ समधियाने पहुंचे. लड़की के पिता शैलेन्द्र मिश्रा ने भी अपने किसी संबंधी को नहीं बुलाया और बिल्कुल सादे समारोह में पंडित जी ने दोनो की शादी करवा दी.

बाइक से ही दुल्हन को लेकर गया घर

शादी का दौरान दूल्हा-दुल्हन दोनों मास्क लगाए रहे और सभी रस्म सोशल डिस्टेनसिंग के साथ निभाए गए. लक्ष्मी के पिता शैलेन्द्र मिश्रा का कहना है कि जब लड़के वाले बगैर तामझाम के शादी के लिए तैयार थे तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी. शादी कराने वाले ब्राह्मण पंडित जयमंगल झा ने बताया कि ऐसी शादी उन्होंने कभी नही कराया अगली सुबह गोविंद बाइक से हीं दुल्हन लक्ष्मी को अपने घर ले गया.

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