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बिहार के इस गांव में कौवों की मौत से दहशत, लोगों को सता रही बर्ड फ्लू की आशंका

बिहार के मुजफ्फरपुर में हो रही है कौवों की मौत
(सांकेतिक चित्र)

बिहार के मुजफ्फरपुर में हो रही है कौवों की मौत (सांकेतिक चित्र)

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले के मुशहरी के तरौड़ा के पैक्स अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह बनवारी ने बताया कि मंगलवार तक कौवे ठीक-ठाक देखे गए. बुधवार की सुबह भी आसपास के पेड़ों पर वो दिखे थे लेकिन दोपहर बाद कौवे मूर्छित होकर गिरने लगे और धीरे-धीरे 27 कौवे नीचे गिरे हुए देखे गए

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मुजफ्फरपुर. बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में लोगों को बर्ड फ्लू (Bird Flu) का खतरा सता रहा है. दरअसल जिले के मुशहरी में अचानक कई कौवों (Crows Death) की मौत हो गई है. लोगों का दावा है कि मुशहरी के तरौड़ा में सैकड़ों कौवों की मौत हो चुकी है लेकिन पशुपालन विभाग की जांच में 27 कौवे के ही शव मिले हैं. विभाग के अधिकारियों ने म़ृत कौवों के शवों को जमीन के छह फीट नीचे आवश्यक केमिकल डालकर दफना दिया है. लेकिन कौवे की मौत से गांव के लोग डरे हुए हैं.

एक-एक कर 27 कौवों की मौत

तरौड़ा के पैक्स अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह बनवारी ने बताया कि मंगलवार तक कौवे ठीक-ठाक देखे गए. बुधवार की सुबह भी आसपास के पेड़ों पर वो दिखे थे लेकिन दोपहर बाद कौवे मूर्छित होकर गिरने लगे और धीरे-धीरे 27 कौवे नीचे गिरे हुए देखे गए. इसकी सूचना उन्होंने मुशहरी के बीडीओ राजीव रंजन को दी. बीडीओ की पहल पर प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिंह दलबल के साथ गांव पहुंचे और नीचे गिरे कौवों की चोंच से जांच का नमूना एकत्रित किया.

कौवों की मौत से सहमे हैं गांव के लोग

कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके इलाकों में भी कौवे अचानक पेड़ों से नीचे गिरने लगे. अचानक कौवों की हो रही मौत से लोगों को बर्ड फ्लू का डर सता रहा है. कुछ ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि कौवों की मौत प्राकृतिक आपदा का संकेत होता है. क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं को जानवर ही सबसे पहले समझते और महसूस करते हैं और इसका असर भी उन पर होता है. स्थानीय निवासी दिनेश सिंह ने जानकारी दी कि दो पालतू कुत्ते भी अचानक मर गए हैं.

टेस्टिंग के लिए कोलकाता भेजा गया स्वॉब

घटना की जानकारी मिलने पर जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने आनन-फानन में पूरे मामले की जांच कराई और कर्मियों से इलाके के किसानों से पूछताछ कराई गई. पूछताछ में पता चला कि कई किसानों ने जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए उस पर केमिकल का छिड़काव कर रखा था खासकर थायमेट का इस्तेमाल इलाके में धड़ल्ले से हो रहा है. डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि संभवत कौवों की मौत के पीछे यह केमिकल ही जिम्मेदार है. उन्होंने बताया कि कौवे के शरीर से दो प्रकार के सैंपल इकट्ठा किए गए हैं जो क्लॉकल और ट्रेकियल स्वॉब कहलाते हैं. इन सैंपल को कोलकाता भेजा जाएगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही कारणों की जानकारी सामने आ पाएगी. पशुपालन पदाधिकारी ने इलाके के लोगों को फिलहाल नहीं डरने की सलाह दी है.

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