मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस से 4 साल के बच्चे की मौत, अब तक 5 मासूमों की जा चुकी है जान

बिहार में कोरोना के बाद अब इंसेफेलाइटिस का प्रकोप (फाइल फोटो)

बिहार में कोरोना के बाद अब इंसेफेलाइटिस का प्रकोप (फाइल फोटो)

AES Death In Bihar: एसके मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के रिकॉर्ड के मुताबिक इस साल AES से यह पांचवीं मौत है. एसकेएमसीएच में अब तक 26 बीमार बच्चों में एईएस की पुष्टि हुई है.

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मुजफ्फरपुर. बारिश के बाद तापमान बढ़ने से मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में AES यानी इंसेफेलाइटिस फिर से बच्चों को अपना शिकार भी बना रहा है. मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच (SKMCH) में एक और बच्चे की मौत AES की बीमारी से हो गई है, हालांकि यह बच्चा मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले का नहीं है. शिवहर के बेलसर निवासी रंजीत कुमार ने अपने 4 वर्षीय बेटे अजीत को रविवार की दोपहर एसकेएमसीएच में भर्ती कराया था. अजीत में चमकी बुखार के लक्षण थे इसलिए एसकेएमसीएच के पीआईसीयू में संदिग्ध एईएस केस मानकर अजीत का इलाज चल रहा था.

इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. अजीत की बीमारी की जांच के लिए जो सैंपल कलेक्ट किए गए थे उसकी जांच रिपोर्ट में एईएस की पुष्टि हुई है. एसकेएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ और उपाधीक्षक डॉ गोपाल शंकर सहनी ने बताया कि बच्चे को जब भर्ती कराया गया उसी समय उसकी हालत बहुत खराब थी. बच्चे का ग्लूकोज लेवल बहुत ही डाउन था. डॉक्टर जेपी मंडल के वार्ड में अजीत को भर्ती कराया गया था. उसे ठीक हो जाने के लिए डॉक्टर ने काफी मेहनत की लेकिन बच्चे को नहीं बचाया जा सका.

एसके मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के रिकॉर्ड के मुताबिक इस साल AES से यह पांचवीं मौत है.

एसकेएमसीएच में अब तक 26 बीमार बच्चों में एईएस की पुष्टि हुई है, जिसमें 5 की मौत हो गई है. बीते दिनों मुजफ्फरपुर और आसपास के कई जिले यास चक्रवात की चपेट में आए थे और बारिश हुई थी लेकिन उसके बाद दो-तीन दिनों से तेज धूप हो रही है, इस वजह से तापमान और ह्यूमिडिटी दोनों ही ज्यादा है. इन्हीं हालात में एईएस का अटैक ज्यादा होता है. डॉक्टर सहनी ने लोगों को सलाह दी है कि ऐसे मौसम में बच्चों को घर में रखें. उन्हें भरपूर भोजन कराएं और पानी पिलाएं.
रात में किसी भी सूरत में बच्चों को भूखा नहीं सोने दे और सुबह बच्चों को निश्चित रूप से खुद से जगा कर उसकी स्वास्थ्य की जानकारी लें. AES से बचाव को लेकर जिला प्रशासन का सप्ताहिक जागरूकता चौपाल कार्यक्रम यारी है. सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी कमल सिंह ने बताया कि हर शनिवार को पदाधिकारी किसी ना किसी पंचायत में जाकर चौपाल लगाते हैं और लोगों को AES से बचाव और बीमार होने पर बच्चों के इलाज की जानकारी देते हैं.

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