सिन्दूर बीच मांग में लगाने के लिए महिलाओं को प्रेरित करती थीं सुषमा, पढ़ें मुजफ्फरपुर से जुड़े संस्मरण

News18 Bihar
Updated: August 8, 2019, 7:06 AM IST
सिन्दूर बीच मांग में लगाने के लिए महिलाओं को प्रेरित करती थीं सुषमा, पढ़ें मुजफ्फरपुर से जुड़े संस्मरण
सुषमा स्वराज की हर बात भारतीय संस्कृति और संस्कार का संदेश देती थी.

1977 के मुजफ्फरपुर संसदीय चुनाव में जॉर्ज फर्नांडिस के लिए चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभालने वाली सुषमा स्वराज बीच मांग में चौड़ी लकीर वाली सिन्दूर करती थीं. यही नहीं वह सभी महिलाओं को एैसा ही करने के लिए प्रेरित भी करती थीं.

  • Share this:
माथे पर बड़ी सी गोल बिंदी, मांग में चौड़ी मांग में लाल टेस सिन्दूर, हर मौके के हिसाब से साड़ियां पहनना और अपनी तरह की जैकेट और वाणी में गजब की धार. ओजस्वी भाषण कला के साथ ही ड्रेसिंग सेंस. ये चीजें जैसे सुषमा स्वराज की पहचान बन गईं थीं. सुषमा का लोगों से सरोकार सिर्फ राजनीतिक के लिए ही नहीं था बल्कि अपने समय की और साथ की महिलाओं और युवतियों को परंपराओं और रहन-सहन के बारे में बतलाना नहीं भूलती थीं.

1977 के मुजफ्फरपुर संसदीय चुनाव में जॉर्ज फर्नांडिस के लिए चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभालने वाली सुषमा स्वराज बीच मांग में चौड़ी लकीर वाली सिन्दूर करती थीं. यही नहीं वह सभी महिलाओं को एैसा ही करने के लिए प्रेरित भी करती थीं. खासकर उन युवतियों को जो आड़े-तिरछे मांग में सिन्दूर करतीं या फिर बाल से सिन्दूर को छिपाने के लिए अलग लुक देने की कोशिश करतीं.

सुषमा स्वराज से संबंधित संस्मरण को सुनाते हुए जेडीयू नेता और अधिवक्ता अरूण कुमार बताते हैं कि बेहिचक महिलाओं को बीच मांग में सिन्दूर लगाने के लिए नुक्कड़ सभाओं से लेकर राजनीतिक भेंट-मुलाकात में भी वे ऐसा ही करने कहतीं.

बाबा गरीबनाथ धाम में डमरू बजाकर करती थीं शिव वंदना

1997 में जॉर्ज के जेल में रहते हुए जब मुजफ्फरपुर से उनका नामांकन हुआ तो सुषमा स्वराज ही उनके चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाल रही थी. लेकिन जब कार्यकर्ताओं के साथ बाबा गरीबनाथ धाम में संध्या कालीन आरती के लिए सुषमा पहुंची तो पूरी तरह भक्ति में लीन हो गईं.  हाथ में डमरू लेकर शिव की स्तुतिगान में सुषमा तल्लीन हो गईं और सभी कार्यकर्ताओं को बाबा की भक्ति में लीन कर दिया.

सुषमा के ओजस्वी भाषण के कायल थे युवा
अधिवक्ता अरूण कुमार बताते हैं कि सभी गुणों से पूर्ण एक भारतीय नारी जो स्पष्टवादी, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और जनता को परिवर्तन के लिए तैयार करने वाली एक सशक्त नेत्री के तौर पर सुषमा की पहचान थी. वह बेहतरीन संगठनकर्ता भी थीं. महज 10 दिनों के सघन चुनाव प्रचार अभियान में ही लोगों के दिलो-दिमाग पर अमिट छाप छोड़ी थी. खासकर युवा उनके ओजस्वी भाषण के कायल थे.
Loading...

मुजफ्फरपुर में जॉर्ज फर्नांडीस के लिए चुनाव प्रचार करती हुईं सुषमा स्वराज


कार्यकर्ताओं के घर विश्राम और भोजन
मुजफ्फरपुर के धर्मशाला चौक पर चाय की दुकान चलाने वाले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता भोला चौधरी बताते हैं कि 77 के चुनाव में शहरी क्षेत्रों के अलावे मुजफ्फरपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुषमा जी ने कई जगह चुनाव प्रचार किया और रात्रि विश्राम किया. घर-घर से जुटाए गए भोजन से ही रात्रि विश्राम करने वाले कार्यकर्ताओं का भोजन होता था.

जेपी आन्दोलन में मुजफ्फरपुर में सक्रिय थीं सुषमा
65 वर्षीय भोला जी बताते हैं कि 1974 के जेपी आन्दोलन के समय से ही मुजफ्फरपुर में सुषमा सक्रिय थीं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी सुषमा ने मुजफ्फरपुर के कई गांवों में जाकर जेपी आन्दोलन के लिए लोगों को तैयार किया था. यही वजह रही कि 1977 के चुनाव में जार्ज के जेल में रहने के बाद भी सुषमा को ही चुनाव प्रचार अभियान की बागडोर दी गई.

जेल का फाटक टूटेगा, जार्ज हमारा छूटेगा
1977 के चुनाव में  जनता पार्टी ने जेल में बंद जॉर्ज फर्नांडिस को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन चुनाव की कमान सुषमा के हाथों में थी. सुषमा ने ही जार्ज के लिए नारा दिया--जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा. वह हथकड़ी वाली जॉर्ज के कट आउट और इस नारे के साथ लोगों के बीच जातीं जिससे ये नारा लोगों के जुबां पर चढ़ गया था.

रिपोर्ट- प्रवीण कुमार

ये भी पढ़ें-

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मुजफ्फरपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 7, 2019, 5:24 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...