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सरकारी फरमान का नहीं हो रहा कोई असर, बैन के बावजूद मुजफ्फरपुर में रात के अंधेरे में जलाई जा रही पराली

News18 Bihar
Updated: November 16, 2019, 11:13 AM IST
सरकारी फरमान का नहीं हो रहा कोई असर, बैन के बावजूद मुजफ्फरपुर में रात के अंधेरे में जलाई जा रही पराली
बिहार सरकार के प्रतिबंध के बावजूद रात के अंधेरे में भी मुजफ्फरपुर में फसलों के अवशेष जलाए जा रहे हैं.

मुजफ्फरपुर में धान की कटनी शुरू होते ही खेतों में धान के पुआलों को जलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है. किसान रबी फसल लगाने के लिए खेतों में ही पुआल को बड़े पैमाने पर जला रहे हैं वायु प्रदूषित कर रहे हैं.

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  • Last Updated: November 16, 2019, 11:13 AM IST
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मजफ्फरपुर. बिहार सरकार ने वायु प्रदूषण (air pollution) से बचाव के लिए खेत में फसलों के अवशेष को जलाने पर प्रतिबंध (Ban) लगाया है. सरकार ने ऐसे किसानों को सभी प्रकार का सरकारी अनुदान रोकने का आदेश दिया है, लेकिन मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में सरकार के इस आदेश की जमकर अनदेखी की जा रही है. लेकिन किसानों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक में फसलों के अवशेष (straw) जलाए जा रहे हैं.

सरकार ने लगाई है रोक
बिहार सरकार ने देश भर में सूबे को मॉडल के तौर पर फसल अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में बनाने के लिए नए नियम बनाए हैं,  लेकिन सरकार के फरमान को किसान पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं. मुजफ्फरपुर में धान की कटनी शुरू होते ही खेतों में धान के पुआलों को जलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है. किसान रबी फसल लगाने के लिए खेतों में ही पुआल को बड़े पैमाने पर जला रहे हैं वायु प्रदूषित कर रहे हैं.

रात के अंधेरे में जलाए जा रहे पुआल

सरकार के नए दिशा-निर्देश की जिन किसानों तक सूचना पहुंच चुकी है, वैसे किसान दिन के बदले रात में फसलों के अवशेष को जलाने में लगे हैं. खास कर इस सीजन में धान के पुआल को बड़े पैमाने पर जलाया जा रहा है, जबकि सरकार ने जैविक तौर पर पुआल से खाद बनाने पर 80 फीसदी अनुदान किसानों को देने की बात कही है.

किसानों के बीच फैला है भ्रम
पुआल और खेतों में लगे धान के फसल की खूंटी जलाने के बाद किसान खेतों की जुताई कर इस बात के लिए खुश हो जाते हैं कि जलने के बाद बने राख से उनकी मिट्टी उर्वर हो जाएगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के कई लाभदायक केंचुए और कीटों की मौत आग लगने से हो जाती है जिससे जमीन की उर्वरा क्षमता कम हो जाती है.
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सरकार ने लग रखी है रोक
बिहार सरकार के रोड मैप के मुताबिक किसानों को खेतों में पुआल, गेहूं के भूसे या फिर मकई के डंठल नहीं जलाने के लिए किसानों को हतोत्साहित करना है. इसके लिए किसान सलाहकार के जरिये पंचायत से लेकर गांव के खेत-खलिहानों तक पर नजर रखनी है. फसल के अवशेष जलाने वाले किसानों को
सरकार द्वारा मिलने वाली सभी प्रकार के फसल अनुदान और सहायता तक रोके जाने का प्रावधान किया गया है.

चार प्रदूषित शहरों में शामिल है मुजफ्फरपुर
हाल ही में वायु प्रदूषण के मामले में मुजफ्फरपुर देश भर में चार प्रदूषित शहरों में शामिल था. बावजूद इसके किसानों ने फसल अवशेषों को जलाना जारी रखा तो लोगों का जीने में और परेशानी बढ़ेगी. गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर में कृषि विभाग ने 9 नवंबर के इस मामले में बड़ी बैठक भी कृषि विभाग से जुड़े लोगों के साथ की थी, लेकिन किसानों के द्वारा सालों से फसल अवशेष जलाने का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है.

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First published: November 16, 2019, 11:06 AM IST
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