कांटी थर्मल पावर प्लांट से किसान परेशान, दूषित पानी से फसल हो रही खराब

80 के दशक में स्थापित हुए कांटी थर्मल प्लांट का क्षमता विस्तार किया गया है. पहले जहां 110 मैगावाॅट यूनिट की दो इकाई स्थापित थीं. वहीं अब 220 मैगावाॅट क्षमता वाला प्लांट भी स्थापित हो गया है. (प्रतीकात्मक फोटो)
80 के दशक में स्थापित हुए कांटी थर्मल प्लांट का क्षमता विस्तार किया गया है. पहले जहां 110 मैगावाॅट यूनिट की दो इकाई स्थापित थीं. वहीं अब 220 मैगावाॅट क्षमता वाला प्लांट भी स्थापित हो गया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

थर्मल प्रबंधन की लापरवाही के चलते किसानों की खेती चौपट हो रही है. बार-बार खेतों में गंदे पानी के जलजमाव से सैकड़ों किसान प्रभावित हैं. जबकि खेतों में लगातार थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख जमा होने के कारण जमीन भी बंजर होती जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 29, 2020, 9:34 PM IST
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मुजफ्फरपुर. जिले मे स्थित कांटी थर्मल पावर प्लांट इलाके के किसानों के लिए अब परेशानी का सबब बन गया है. थर्मल प्रबंधन की लापरवाही के चलते किसानों की खेती चौपट हो रही है. बार-बार खेतों में गंदे पानी के जलजमाव से सैकड़ों किसान प्रभावित हैं. जबकि खेतों में लगातार थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख जमा होने के कारण जमीन भी बंजर होती जा रही है.

बार बार टूट रहा डैम
जुलाई 2019 में कांटी थर्मल पावर के दूषित पानी के लिए बनाए गए डैम के टूटने से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था. मधुबन, कोठिया, नरसंडा, पकड़ी और सरमस्तपुर सहित कई इलाकों के 10 गांवों के किसानों की फसल बर्बाद हो गई. धान के साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जी की फसल भी प्रभावित हुई. बांध टूटने की वजह से यह तबाही हुई. इससे पहले 2018 में भी थर्मल प्लांट का बांध टूटा था. किसानों के उग्र आंदोलन के बाद साल 2018 में 24 सौ रुपये प्रति कट्टे की दर से थर्मल प्रबंधन ने किसानों को भुगतान किया था. लेकिन पिछले साल बांध टूटने से करीब 84 एकड़ से अधिक की फसल का नुकसान हुआ.

किसानों को नहीं मिला मुआवजा
रबी की फसल अब कटने को है लेकिन खेतों में पानी जमा रहने के कारण खेती नहीं हो पा रही है. किसान रामानूप चौरसिया और रघुनाथ प्रसाद ने न्यूज 18 से अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जुलाई का पानी अब भी खेत मे जमा है. न तो मुआवजा मिला न हीं रबी की खेती कर पाए.



नहीं बनाया जा रहा नया बांध
80 के दशक में स्थापित हुए कांटी थर्मल प्लांट का क्षमता विस्तार किया गया है. पहले जहां 110 मैगावाॅट यूनिट की दो इकाई स्थापित थीं. वहीं अब 220 मैगावाॅट क्षमता वाला प्लांट भी स्थापित हो गया है. बिजली उत्पादन की क्षमता भी पहले से काफी अधिक हो गई है. लेकिन दूषित पानी के लिए बना डैम पुराना ही है. जिसके कारण हाल के सालों में बारिश के दिनों में पुराना हो चुका डैम बार बार टूट जाता है और किसानों की फसल बर्बाद होती है. अब किसान आन्दोलन करने से बेहतर अपनी जमीन कांटी थर्मल प्रबंधन को देने के बारे में विचार कर रहे हैं. लेकिन कांटी थर्मल प्रबंधन किसानों के जमीन लेने को लेकर कोई बातचीत की पहल नहीं कर रहा है. किसानों को एकतरफ खेतों में दूषित पानी के भरे रहने का दर्द है तो दूसरी तरफ थर्मल से उड़ने वाली राख खेतों में जमा होने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी घट रही है.

किया था आंदोलन
जुलाई 2019 में डैम के टूटने के बाद फसल क्षति मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने आन्दोलन भी किया था. किसानों को थर्मल प्रबंधन के साथ ही जिला प्रशासन के द्वारा भी फसल क्षति मुआवजे का भरोसा दिया गया. लेकिन अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है.  किसानों ने पुरानी दर से ही मुआवजा मांगा है. वहीं अब किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया तो फिर एक बार आंदाेलन किया जाएगा.

 
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