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टीईटी शिक्षकों की बहाली में फर्जीवाड़ा, जांच के नाम पर हो रही खानापूर्ति

मुजफ्फरपुर में टीईटी शिक्षकों की बहाली में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भी शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासन तक बड़ी कारवाई करने से बच रहा है. अब तक 335 फर्जी शिक्षकों को प्रारंभिक जांच में चिह्नित तो कर लिया गया है लेकिन कानूनी और विभागीय कारवाई पर ढ़िलाई बरती जा रही है.

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मुजफ्फरपुर में टीईटी शिक्षकों की बहाली में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भी शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासन तक बड़ी कारवाई करने से बच रहा है. अब तक 335 फर्जी शिक्षकों को प्रारंभिक जांच में चिह्नित तो कर लिया गया है लेकिन कानूनी और विभागीय कारवाई पर ढ़िलाई बरती जा रही है.

माना जा रहा है कि फर्जीवाड़े की कड़ी मुजफ्फरपुर जिले में ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलों में फैली हुई है. लेकिन बार-बार जांच के नाम पर खानापूर्ति कर शिक्षा माफियाओं को जान-बूझकर मौका दिया जा रहा है.

मुजफ्फरपुर में अब तक 335 फर्जी शिक्षक पहचाने गए हैं. जांच में इन सभी शिक्षकों को टीईटी के गलत प्रमाण-पत्र के आधार पर बहाली करने का खुलासा हुआ है. जबकि सैकड़ों शिक्षकों पर निगरानी जांच की तलवार लटकी हुई है. साल-2011-12 में टीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों को सरकार ने साल 2014 में बहाली किया लेकिन शिक्षा माफियाओं ने नियोजन इकाई से मिलकर टीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों की सीडी का डुप्लीकेट बनाकर फर्जीवाड़ा कर लिया.



साल 2015 में ही मुजफ्फरपुर के 10 प्रखंडों में 335 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर लिया गया था लेकिन अब तक इनमें से मीनापुर के 46 शिक्षकों को बर्खास्त नहीं किया गया है. जबकि एक पखवारा पहले ही फर्जी पाये गये 98 प्रखंड शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है.
माना जा रहा है कि निगरानी जांच की अगली कड़ी में अकेले मीनापुर प्रखंड में 518 इस तरह के और फर्जी शिक्षकों पर कारवाई हो सकती है. मीनापुर प्रखंड में फर्जीवाड़े की जड़ इतनी मजबूत हो गई है कि पंचायत प्रतनिधियों से लेकर समाजिक कार्यकर्ताओं के बार-बार विरोध के बाद भी कारवाई में तेजी नहीं लाई जा रही है.

करीब दो साल पहले ही फर्जी टीईटी शिक्षकों को चिह्नित करने के बाद शिक्षा विभाग और नियोजन करने वाले पंचायत से लेकर प्रखंड और नगर निगम के अधिकारी कारवाई से बच रहे हैं. शिक्षा विभाग के अधिकारी को फर्जी पाए गए शिक्षकों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस करने से लेकर वेतन मद में ली गई करोड़ों की राशि वसूलने की जिम्मेदारी है. लेकिन अब तक बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई है. कारवाई की जद में नियोजन इकाई के कर्मी और अधिकारी भी हैं.जिनके संरक्षण में गलत बहाली हुई.

लेकिन बार-बार फर्जी पाए गए शिक्षकों द्वारा खुद को निर्दोष बताकर जांच के लिए आवेदन दिया जाता है और फिर जांच में मामला उलझ कर रह जाता है. इस बार भी 11 शिक्षकों ने खुद को सही बताते हुए जांच की मांग कर डाली है. दरअसल आरटीआई से मांगी गई जानकारी के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा जिले में हुआ था.

लेकिन फर्जीवाड़े की पूरी संभावना तिरहुत प्रमंडल के दूसरे जिलों में भी है. इक्के-दुक्के मामले दूसरों जिलों से प्रकाश में भी आ चुका है. लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी टीईटी के असली सीडी से मिलान कर फर्जी शिक्षकों को पकड़ने की कारवाई नहीं कर रहे हैं.

जबकि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने टीईटी के असली सीडी से मिलान कर ही टीईटी शिक्षकों के वेतन भुगतान का आदेश जारी किया है. हद तो यह है कि मुजफ्फरपुर के शहरी क्षेत्र में 2014 में बहाल हुए शिक्षकों की जांच भी नहीं की गई है. यही हालात तिरहुत प्रमंडल के बाकी के 5 जिलों की भी है.

दरअसल 3 लाख से लेकर 5 लाख रुपए लेकर फर्जी बीएड की डिग्री और फर्जी टीईटी प्रमाण-पत्र के सहारे शिक्षकों की बहाली धड़ल्ले से हुई है. लेकिन जांच के नाम पर खानापूर्ति कर शिक्षा माफियाओं को बचाने का खेल चल रहा है.

लेकिन राहत की बात सिर्फ इतनी है कि निगरानी विभाग ने 335 फर्जी पाए गए शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कर कारवाई कर रही है लेकिन इन शिक्षकों को बहाल करने वाले अधिकारी अब तक निगरानी के रडार से बाहर हैं.
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