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बिहार: पांच जिलों में हजारों लोगों से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा, जानें क्या है मामला
Muzaffarpur News in Hindi

Praveen Thakur | News18 Bihar
Updated: January 26, 2020, 5:07 PM IST
बिहार: पांच जिलों में हजारों लोगों से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा, जानें क्या है मामला
बिहार के चार जिलों में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है.

साल 2013 में पटना के निबंधन रजिस्ट्रार कार्यालय से को-ओपरेटिव सोसायटी के अलग-अलग चार नामों से मुजफ्फरपुर, भोजपुर, पटना, वैशाली और सीतामढ़ी जिले में फर्जीवाड़े का काम शुरू किया गया था.

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मुजफ्फरपुर. बिहार के पांच जिलों में को-ओपरेटिव सोसायटी के नाम पर लाखों लोग से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है. महज तीन वर्षों में पैसा दोगुना करने और अधिक ब्याज देने का लालच देकर आम लोगों से यह ठगी की गई है. बताया जा रहा है कि आम लोगों के बीच महुआ बैंक के नाम से प्रचलित चार अलग-अलग को-ओपरेटिव सोसायटी पर लोगों को चूना लगाने का आरोप लगा है.

छोटे दुकानदारों और गरीबों से ठगी
मुजफ्फरपुर के अघोड़िय बाजार इलाके में सड़क किनारे छोटी सी दुकान चला रहे रवि को नहीं पता था कि उसकी रोजाना की गाढ़ी कमाई एक दिन लुट जाएगी. महुआ बैंक के नाम पर मुन्ना चौधरी नामक एक परिचित एजेंट ने रवि को रोजाना 20 से 30 रुपया जमा करवाया. कुछ दिन में ही रवि को बैंक से अधिक ब्याज एजेंट ने लौटा भी दिया. अधिक पैसा मिलने की लालच में रवि जब हर महीने एक हजार रुपया जमा करने लगा तो फिर उसे एजेंट ने समय पूरा होने पर पैसा नहीं लौटाया. फर्जीवाड़े का शिकार हुए रवि के पास कम्पनी का सिर्फ एक बॉण्ड पेपर है और हरेक माह जमा की जाने वाली रसीद, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी उसे पैसे नहीं मिल रहे हैंं.

रवि की तरह राजीव सिंह ने भी पहले महुआ प्रोजेक्ट में और फिर जलाशय बचत सहकारी समिति में अपनी गाढ़ी कमाई लगाई, लेकिन जमा पैसा लेने की बारी आई तो मुजफ्फरपुर शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों से महुआ और जलाशय नाम से चलने वाली संस्थाओं के कार्यालय बंद पाए गए.

तीन साल में पैसा दोगुना करने का दिया लालच
दरअसल, साल 2013 में पटना के निबंधन रजिस्ट्रार कार्यालय से को-ओपरेटिव सोसायटी के अलग अलग चार नामों से मुजफ्फरपुर, भोजपुर, पटना, वैशाली और सीतामढ़ी जिले में फर्जीवाड़े का काम शुरू किया गया. एजेंट और अपने कर्मचारियों को बहाल कर आम लोगों से कम समय में अधिक पैसे देने का लालच देकर डेली, वीकली और मासिक तौर पर रुपये का निवेश कराया जाने लगा.

इतना ही नहीं तीन वर्षों से फिक्स डिपोजिट को दोगुना करने का लालच भी निवेशकों को दिया गया. शुरुआती कुछ दिनों के बाद जब निवेश करोड़ों में हो गया तो फिर धीरे-धीरे सभी जगहों से कार्यालय को बंद कर सभी फरार हो गए. इन चार नामों से चल रही रही थी संस्था
बिहार सरकार की सहयोग समिति के उपनिदेशक द्वारा कराई गई जांच में अब तक चार ऐसी सहयोग समिति का नाम पता चला है, जिसने करोड़ों का फर्जीवाड़ा किया है. इनके नाम हैं-

1. महुआ प्रोजेक्ट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड, पुणे, मुंबई

2. महुआ संयुक्त दायित्व समूह विकास सहकारी समिति लिमिटेड, फुलवारी शरीफ, पटना

3. महुआ गव्य विकास एवं प्रसंस्करण स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड, महुआ डेयरी, भटौलिया वैशाली

4. जलाशय बचत एवं साख स्वालंबी सहकारी समिति लिमिटेड, वैशाली

इन चार नाम से पिछले सात वर्षों में शहरी क्षेत्र से लेकर प्रखंड स्तर पर कार्यालय खोलकर लोगों से निवेश के नाम पर पैसा लिया गया. दरअसल, सात सालों से क्षेत्र में पैसा वूसली का खेल चलता रहा और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी.

निवेशकों की शिकायत पर सितंबर 2019 में मुजफ्फरपुर में गड़बड़ी को जांच में सही पाया गया.  इसके बाद जनवरी माह में कांटी और सदर थाना में फर्जीवाड़ा के मुख्य सरगना जवाहर साह, मालती साह और आशुतोष साह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी सहकारिता विभाग ने दर्ज कराई, लेकिन निबंधन में दिया गया पता फर्जी था, इसलिए मामले में पुलिस भी फिलहाल कुछ नहीं कर सकी है.

जवाहर साह है सरगना
इस मामले में मुसहरी के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी माजिद अंसारी ने सदर थाना में कांटी थाना में वहां के सहकारिता पदाधिकारी ने केस दर्ज कराया है. दर्ज मामले में जवाहर साह, मालती साह और आशुतोष साह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है. जवाहर साह को इस फर्जीवाड़े का मास्‍टरमाइंड बताया गया है.

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First published: January 26, 2020, 2:52 PM IST
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