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फारुख अब्दुल्ला को कश्मीर समस्या का कसूरवार मानते थे जॉर्ज साहब!

जॉर्ज फर्नांडिस (प्रतीकात्मक चित्र)

जॉर्ज फर्नांडिस (प्रतीकात्मक चित्र)

जेपी आंदोलन से पहले ही एक मजदूर नेता और पत्रकार के रूप में जिन्दगी की शुरुआत करने वाले जॉर्ज फर्नांडिस (George Fernandes) ने 1973-74 में रेलवे में सुधार और श्रमिकों के हक के लिए बड़ा आन्दोलन खड़ा किया.

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पटना/मुजफ्फपुर. तीन जून 1930 को प्रखर समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस (George Fernandes) का जन्म हुआ था और उनका देहांत निधन 29 जनवरी 2019 हुआ. करीब सात दशक के राजनीतिक जीवन सक्रिय रहे जॉर्ज साहब के बारे में ये जानकारी आम है कि उन्होंने हमेशा अपने दिल की सुनी और लीक से हटकर राजनीति की. कभी उन्होंने लोकतंत्र (Democracy) की रक्षा के लिए हिंसा का भी सहारा लिया तो कोकाकोला जैसे इंटरनेशनल ब्रांड को भी बैन करने से भी नहीं पीछे नहीं हटे. उनके विशाल व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान यही है कि 1977 में लोगों ने उन्हें सिर्फ फोटो देखकर ही 4 लाख से अधिक मतों से चुनाव जिता दिया था. जॉर्ज ने रेल मंत्री, उद्योग मंत्री और रक्षा मंत्री रहते हुए देश के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया. आइये एक नजर डालते हैं उनके व्यक्तित्व से जुड़ी कुछ खास पहलुओं पर.

श्रमिकों के लिए किया बड़ा आंदोलन
जेपी आंदोलन से पहले ही एक मजदूर नेता और पत्रकार के रूप में जिन्दगी की शुरुआत करने वाले जॉर्ज ने 1973-74 में रेलवे में सुधार और श्रमिकों के हक के लिए बड़ा आन्दोलन खड़ा किया. इसके बाद उनकी अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बन गई थी.

हिंसा से भी नहीं किया गुरेज
बड़ौदा डायनामाइट केस में वे जेल में भी बंद रहे. कहा जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की शासन व्यवस्था को चुनौती देने के लिए जॉर्ज ने हिंसा का भी सहारा लिया था. जबकि गांधी, जेपी और लोहिया के आदर्शों और सिद्धांतों का वे घोर समर्थक थे.

तस्वीर देखकर ही जिता दिया चुनाव
बड़ौदा डायनामाइट केस में जेल में बंद रहते हुए उन्होंने मजफ्फरपुर से 1977 में चुनाव लड़ाने का फैसला लिया. हालांकि कभी चुनाव अभियान में मुजफ्फरपुर नहीं आ सके. लोगों ने सिर्फ जॉर्ज की फोटो देखकर ही उन्हें 4 लाख से अधिक मतों से जिता दिया.

अमेरिकन कंपनी को नाकों चने चबवा दिया
एक बार सांसद रहते जॉर्ज मुजफ्फरपुर में अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे. बैठक के दौरान उन्हें शीतल पेय पदार्थ कोकोकोला दिया गया. उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि वे कोकोकोला बनाने वाली मल्टीनेशनल कम्पनी को देश से बाहर करेंगे. दिल्ली पहुंचते ही जॉर्ज ने कोकोकोला पर बैन लगा दिया.

फारुख अब्दुल्ला को बताया कश्मीर का कसूरवार
जॉर्ज को कश्मीर समस्या के समाधान का मंत्री भी बनाया गया था. उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि कश्मीर समस्या का समाधान वहां की बेरोजगारी को दूर करके ही किया जा सकता है. साथ ही फारूख अब्दुला को कश्मीर समस्या के जटिलता को बढ़ाने के लिए जिम्मेवार बताया है.

उद्योग लगाने के पक्षधर थे जॉर्ज साहब
मुजफ्फरपुर के औराई इलाके में चीनी मिल लगाने के लिए महाराष्ट्र के कई कम्पनी को भेजा. इलाके का सर्वे भी हुआ, लेकिन स्थानीय लोगों की रुचि नहीं लेने से उद्योग नहीं लगा. जबकि मोतीपुर चीनी मिल को चालू करने के लिए 1989 में जॉर्ज ने मिल के बाहर धरना भी दिया.

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