AES का कहर: बिहार में पंखा खरीद कर मरीज करा रहे हैं इलाज

बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से लड़ने में अस्पताल पूरी तरह से अक्षम साबित हो रहे हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अस्पतालों की कुव्यवस्था है.

News18 Bihar
Updated: June 19, 2019, 3:29 PM IST
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बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से लगातार बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है. सरकार द्वारा किए जा रहे सारे प्रयासों के बावजूद बच्चों की मौत नहीं रुक रही है. वहीं बीमारी से लड़ने में अस्पताल पूरी तरह से अक्षम साबित हो रहे हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अस्पतालों की कुव्यवस्था है. मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच सहित सभी अस्पताल बीमारी से लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं. यहां तक की मरीजों को इलाज करने के लिए  पंखा खुद ही खरीदना पड़ता है.

बता दें कि बिहार के 12 जिलों में चमकी (एईएस) का प्रकोप है, लेकिन बीमारी से लड़ने के लिए अस्पतालों की तैयारी पर्याप्त नहीं है. इंसेफेलाइटिस से प्रभावित बेतिया जिले के एमजेके अस्पताल भी अव्यवस्था का शिकार है. अस्पताल में व्यवस्था का आलम यह है, कि एक दर्जन बीमार बच्चों का भी इलाज नहीं हो सकता है. अस्पताल में केवल दो आईसीयू हैं, जिसमें से एक स्टोर रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. जबकि दूसरे में केवल पांच बेड की ही व्यवस्था है.

ऊपर से डॉक्टरों का गैर पेशावर व्यवहार लोगों के लिए भारी परेशानी का सबब बन गया है. गैरतलब है कि इंसेफेलाइटिस (AES) को लेकर राज्य में अलर्ट जारी है, लेकिन अधीक्षक सहित कई अन्य डॉक्टर 11 बजे से पहले अस्पताल में नहीं आते हैं. अस्पताल में दवाओं की भारी कमी है, इलाज करने वालों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है. अस्पताल में इस विकराल गर्मी में पंखे की भी व्यवस्था नहीं है. गंदगी का अंबार मरीजों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशान करता है.

हालांकि अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि मेडिकल कालेज में भवन निर्माण का काम चल रहा है. इसलिए व्यवस्था में कमी है. एक बार भवन का निर्माण पूरा हो जाने पर सबकुछ व्यवस्थित हो जायेगा. वहीं यदि आप को अस्पताल में गर्मी के दिनो में इलाज कराने जाना है, तो आपको साथ में पंखा भी लेकर जाना होगा या खरीदना पड़ेगा. दरअसल 2007 में एमजेके अस्पताल को मेडिकल कालेज बनाने का शिलान्यास किया गया था, लेकिन 12 सालो में न मेडिकल कालेज बन सका और न ही यहां की व्यवस्था में कोई सुधार हो पाया. (रिपोर्ट-प्रफुल्ल)

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First published: June 19, 2019, 3:29 PM IST
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