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Bihar: होमगार्ड बहाली में धांधली! कम अंक वाले को नियुक्ति देने का आरोप, RTI में चौंकाने वाला खुलासा

अभ्यर्थी अब न्याय की मांग कर रहे है.

अभ्यर्थी अब न्याय की मांग कर रहे है.

बिहार गृह रक्षा वाहिनी यानी होमगार्ड की बहाली में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा आरटीआई (RTI) में हुआ है. आरोप है कि मेघा सूची में छेड़छाड़ कर नियमों के विपरीत बहाली की गई.

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मुजफ्फरपुर. बिहार गृह रक्षा वाहिनी यानी होमगार्ड (Home Guard) की बहाली में मुजफ्फरपुर में जमकर धांधली करने का बड़ा आरोप लगा है. सूचना के अधिकार से मिली जानकारी से बहाली में धांधली किये जाने का खुलासा हुआ है. आरोप है कि मेघा सूची में छेड़छाड़ कर नियमों के विपरीत बहाली की गई. मेघा के बावजूद चयन से वंचित अभ्यर्थी अब आन्दोलन के सहारे दोषियों के खिलाफ कारवाई की मांग कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं. चयन से वंचित अभ्यर्थी गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर कारवाई करने के साथ ही योग्य अभ्यर्थियों की बहाली की मांग कर रहे हैं.

कम अंक वालों की नियुक्ति करने का आरोप

मुजफ्फरपुर समाहरणालय के समक्ष 5 दिनों से आन्दोलनरत हैं रवि कुमार पटेल. रवि पटेल ने फरवरी 2011 में होमगार्ड के लिए निकाली गई विज्ञापन संख्या के आधार पर आवेदन दिया था. आवेदन देने के करीब 5 साल बाद 2016 में परीक्षा ली गई. शारीरिक फिटनेस के साथ आयोजित होने वाली परीक्षा में दोड़, हाई जंप और गोला फेंकने के आधार पर 15 में से 10 अंक रवि को मिला. ग्राउंड में दिये गये अंक को मास्टर चार्ट में भी चढ़ाया गया, लेकिन जब साल 2018 में कई बार आन्दोलन किए जाने के बाद बहाली की बारी आई तो रवि पटेल के बदले कन्हैय्या कुमार का चयन महज 9 अंक लाने पर ही कर लिया गया. जबकि रवि पटेल ओबीसी कटेगरी से आता है और कन्हैय्या सामान्य श्रेणी से है. आरोप है कि ढ़ाई लाख रूपये रिश्वत लेकर यह खेल खेल गया. रवि की तरह कई अभ्यर्थी हैं जो बहाली में धांधली के शिकार हुए और आज आन्दोलरत हैं.

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आरटीआई से हुआ खुलासा 

दरअसल, सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में बहाली में हुए धांधली की परत-दर-परत खोलकर रख दी है. आरटीआई के मुताबिक,  मुजफ्फरपुर के 16 प्रखंडों में से 14 प्रखंडों में बहाली में गड़बड़ी की गई. 200 पदों के लिए निकाली गई बहाली में प्रखंड को इकाई मानकर रोस्टर बनाया गया था,  लेकिन मिली कागजात से पता चला है कि रोस्टर में छेड़छाड़ कर उन अभ्यर्थियों को बहाल किया गया जो मेघा सूची में दूर-दूर तक नहीं था. सभी प्रखंडों में सामान्य कोटि के लिए 50 फीसदी पद आरक्षित नहीं किया गया . महिला संवर्ग के लिए बंदरा प्रखंड में रिक्तियां नहीं थी लेकिन प्रिया रानी समेत दो महिलाओं को नियुक्तियां दी गई.

मोतीपुर प्रखंड में दो सगे भाई विश्वनाथ कुमार और जियालाल कुमार के उम्र में महज एक माह का अंतर दिखाकर नोकरी दे दी गई . मीनापुर प्रखंड में जयनंदन कुमार को कम उम्र के कारण मास्टर चार्ट में जगह नहीं दी गई थी लेकिन बाद में स्कूल के प्राचार्य से फिर से जन्मप्रमाण बनाकर नोकरी ले ली गई. इस तरह अनुमोदित रोस्टर में छेड़छाड़ कर मनमाने तरीके से पैसे के बल पर बहाली की गई.

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 कहते हैं अधिकारी

इतना ही नहीं दो सौ पदों के लिए निकाली गई बहाली में कुल रिक्तियों को भरा भी नहीं जा सका. साथ ही बैकलॉग की 33 रिक्तियों को भी सामान्य श्रेणी में जोड़कर बहाली किये जाने का आदेश अधिकारियों से प्राप्त था लेकिन दूसरी मेघा सूची नहीं निकाली गई . प्रखंडों को बहाली के लिए इकाई बनाये जाने के बावजूद दूसरे प्रखंडों को रोस्टर के विपरीत नियुक्त किया गया. बिहार गृह रक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष तत्काल इस मामले में सरकार से जांच कर कारवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि मुजफ्फरपुर जिले के गृह रक्षा वाहिनी के वर्तमान समादेष्टा गौतम कुमार  पूर्व के अधिकारी के समय का मामला बताकर जांच का आदेश दिये जाने के बाद ही किसी प्रकार की कारवाई की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि आन्दोलनरत अभ्यर्थियों से मिले हैं लेकिन डीएम जो चयन समिति के अध्यक्ष होते हैं उनके स्तर पर जांच कराने पर ही कुछ कहा जा सकता है. साथ ही दूसरी मेघा सूची निकाले जाने का नियम नहीं होने की बात कह रहे हैं .
8 साल में पूरी हुई थी नियुक्ति प्रक्रिया

साल 2011 में दो सौ पदों के लिये वेकेंसी निकली. 2016 में दौड़ हुई और 2018 में नियुक्ति पत्र दिया गया. होमगार्ड में बहाल होने वाले अभ्यर्थियों को बिहार पुलिस में बहाल होने के लिए आरक्षण दिया जाता है . लेकिन बहाली से वंचित मेघा वाले अभ्यर्थियों को इसका भी मलाल है कि उन्हें यह मौका नहीं मिल रहा  8 सालों में होमगार्ड बहाली की प्रक्रिया अब भी आधी अधूरी है, लेकिन भ्रष्टाचार का गंदा खेल खेले जाने के कारण अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों में सिस्टम के प्रति गहरी नाराजगी है.

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