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क्या कोरोना से ऐसे जीतेगा बिहार? मुजफ्फरपुर में सोशल डिस्टेंसिंग बना मजाक, प्रशासन बना मूकदर्शक

लॉकडाउन के दौरान बिहार में 30 लाख से भी अधिक मजदूर लौटे हैं (सांकेतिक चित्र)

लॉकडाउन के दौरान बिहार में 30 लाख से भी अधिक मजदूर लौटे हैं (सांकेतिक चित्र)

प्रवासी मजदूरों (Migrant Laborer ) को छतों पर बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है. बाहर से आने वाले ये लोग बिना सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) को सफर मजबूर हैं और प्रशासन को कोस रहे हैं.

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मुजफ्फरपुर. दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में आने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant Laborer ) के कारण कोरोना संक्रमण (Corona infection) का खतरा अब और बढ़ गया है. मुजफ्फरपुर जंक्शन (Muzaffarpur Junction) पर पहुंच रहे इन प्रवासी यात्रियों को बसों की छतों से लेकर बसों के भीतर काफी संख्या में भर-भर कर एक जिले से दूसरे जिले तक ले जाया जा रहा है. ऐसे में इन प्रवासी मजदूरों में सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है. इन प्रवासी मजदूरों का स्टेशन पर थर्मल स्कैनिंग भी बंद कर दिया गया है. जिससे यह भी पता नहीं चल रहा है कि कौन सा प्रवासी मजदूर कोरोना संक्रमित है. यह सभी मजदूर एक दूसरे में सटकर बसों में सफर करने को मजबूर हैं.

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ जान से खिलवाड़
ट्रेनों से मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंच रहे मजदूरों को उत्तर बिहार के अलग-अलग जिलों में बसों के जरिए प्रशासन भेज रहा है. लेकिन, जिन बसों से मजदूरों को अलग-अलग जिलों में भेजा जा रहा है उन बसों की छतों पर सैकड़ों की संख्या में मजदूर बिना सोशल डिस्टेंसिंग के सफर करने को मजबूर हैं. बसों के बीच और बसों की छत पर यह मजदूर जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं. मजदूरों को छतों पर बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है. बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूर बिना सोशल डिस्टेंसिंग के सफर कराये जाने को लेकर सरकार और प्रशासन को कोस रहे हैं. प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों की सरकारों द्वारा किए गए इंतजाम की प्रशंसा भी कर रहे हैं.

40 लोगों को  बैठाना है बस में
कोरोना संक्रमण फैलाव को रोकने के लिए सरकार ने बसों में 40 लोगों के सफर को मंजूरी दी है. प्रवासी मजदूरों को स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद प्रत्येक बस में 40 मजदूरों को सोशल डिस्टेंसिंग को का पालन करते हुए बैठाया जाना है. लेकिन मुजफ्फरपुर में इसका कहीं से भी पालन नहीं किया जा रहा है.  एक बस पर 200 से ढाई सौ प्रवासी मजदूर सवार होते हैं और फिर जान जोखिम में डालकर बस का परिचालन कराया जा रहा है.

मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर प्रशासन की नाकामी के कारण लोगों को अपनी जान खतरे में डालनी पड़ रही है.


किराए के ऑटो पर प्रवासी कर रहे सफर--बसों में सही तरीके से सीट नहीं मिलेगी से नाराज प्रवासी श्रमिक ऑटो से अपने गंतव्य जिले तक का सफर तय कर रहे हैं. इसके लिए ऑटो चालकों द्वारा मनमाने तरीके से किराए की वसूली प्रवासी मजदूरों से की जा रही है.  सीतामढ़ी और दरभंगा जाने के लिए 13 सौ से 15 सौ का किराया ऑटो चालकों द्वारा वसूला जा रहा है.  जबकि इस ऑटो में 8 से 10 लोगों को नाजायज तरीके से बैठाया जाता है जिससे सड़क दुर्घटना की भी आशंका बनी हुई है.

यह सब प्रशासन के नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन  ऑड -इवन फार्मूला को लागू करने वाली व्यवस्था गैरकानूनी तरीके से ऑटो के परिचालन करने वाले लोगों पर लगाम लगाने में विफल रहा है. ऐसे में कभी भी सड़क दुर्घटना सामने आ सकती है.

गांव जा रहे ऑटो में भी 10 से 15 लोगों को बैठाया जा रहा है जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है.


प्रवासियों में बढ़ता जा रहा संक्रमण
बिहार में प्रवासी मजदूरों में कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा देखने को मिला है. प्रवासी मजदूरों में ही सबसे अधिक कोरोना संक्रमित हुए हुए हैं. मुजफ्फरपुर में अब तक 46 लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है.  जिसमें से 40 से अधिक लोग प्रवासी मजदूर हैं.  मुजफ्फरपुर जिले में 643 कॉरेन्टीन सेंटर में 17 हजार 81 लोग रह रहे हैं. अभी तक 31हजार  902 लोगों को कॉरेन्टीन अवधि पूरा होने पर घर भेजा गया है.

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