बिहार: एक्यूट इन्सेफेलाइटिस ने फिर दी दस्तक, आठ वर्षों में 344 बच्चों की हो चुकी है मौत

इस साल मुजफ्फरपुर समेत आस-पास के जिलों से एसकेएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती होने वाले 4 बच्चों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस की पुष्टि हो चुकी है.

News18 Bihar
Updated: May 17, 2019, 6:03 PM IST
बिहार: एक्यूट इन्सेफेलाइटिस ने फिर दी दस्तक, आठ वर्षों में 344 बच्चों की हो चुकी है मौत
मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस से ग्रसित बच्चा
News18 Bihar
Updated: May 17, 2019, 6:03 PM IST
बिहार में तापमान बढ़ने के साथ ही मुजफ्फरपुर सहित आस-पास के जिलों में बच्चों की बीमारी एईएस यानि एक्यूट इन्सेफेलाइटिस ने दस्तक देनी शुरू कर दी है. अब तक 4 बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें एक बच्चे की मौत भी हो गई है.  उमस भरी गर्मी बढ़ते ही चमकी और बुखार से पीड़ित बच्चे बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग बीमारी से बचाव के लिए अलर्ट पर है और बच्चों को धूप से बचाने और खान-पान ठीक तरीके से देने की अपील की जा रही है.

सरकारी आकंड़ों के अनुसार, मौजूदा साल में एक बच्चे की मौत इस बीमारी से हो चुकी है. शिवहर के तरियानी के बच्चे की मौत एईएस से एसकेएमसीएच (श्रीकृष्‍ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) में इलाज के दौरान हुई है. जबकि एसकेएमसीएच में एईएस से मिलते-जुलते लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हुई है. हलांकि, इसकी पुष्टि पटना के एमआरआई से रिपोर्ट आने के बाद होगी.

ये भी पढ़ें- CM नीतीश का तंज- लोग संविधान का 'क ख ग घ' नहीं जानते, लेकिन...

इस साल मुजफ्फरपुर समेत आस-पास के जिलों से एसकेएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती होने वाले 4 बच्चों में एईएस की पुष्टि हो चुकी है. तापमान में बढ़ोतरी और शरीर से पसीना निकलने वाली ऊमस भरी गर्मी शुरू होने पर एईएस के मामले बढ़ने की आशंका है.

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने जारी किया अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी समेत एसकेएमसीच के चिकित्सकों को बीमारी से निपटने के लिए अलर्ट कर दिया है. 24 बेड वाले आईसीयू और पीआईसीयू को एईएस के लिए एसकेएमसीएच में विशेष रूप से तैयार कर लिया गया है. इंटर्न कर रहे डॉक्‍टरों और नर्स को प्रशिक्षण देकर तैयार रखा गया है.

एसकेएमसीएच अधीक्षक का बयान
Loading...

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ सुनील शाही ने न्यूज 18 से बातचीत में बताया कि इस साल जनवरी माह में पहला केस आ गया था. 15 मई तक कुल 5 बच्चे एईएस से मिलते-जुलते लक्षण वाले मिले, जिसमें से एक में जेई की पुष्टि हुई.

ये भी पढ़ें- 'शत्रु' का दावा- राहुल गांधी ने देश में निर्णायक माहौल बनाया, वे हमारे पीएम उम्मीदवार

बता दें कि मुजफ्फरपुर में एईएस ने साल 1995 में महामारी के रूम में दस्तक दिया था. पिछले 8 सालों में ही 1134 बच्चे बीमारी के शिकार हुए, जिनमें से 344 बच्चों की मौत हो गई. कई बच्चे विकलांगता के शिकार हो गए.

वर्ष 2010, 2012 और 2015 में बच्चों की मौत का सिलसिला बढ़ता चला गया. साल 2010 से पहले सरकारी आकंड़े तैयार नहीं किए जाते थे, लेकिन उसके बाद से हरेक साल बच्चों की मौत का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग में दर्ज होता रहा है. मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और वैशाली जिले से सबसे अधिक मामले एईएस के आते रहे हैं.

रिपोर्ट- प्रवीण कुमार ठाकुर

ये भी पढ़ें- लालू बोले- ‪इसका कौनो ठिकाना है, कब कहां कैसे और क्यों लुढ़क जाए?‬
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

जिम्मेदारी दिखाएं क्योंकि
आपका एक वोट बदलाव ला सकता है

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

डिस्क्लेमरः

HDFC की ओर से जनहित में जारी HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पूर्व में HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI R­­­­eg. No. 101. कंपनी के नाम/दस्तावेज/लोगो में 'HDFC' नाम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HDFC Ltd) को दर्शाता है और HDFC लाइफ द्वारा HDFC लिमिटेड के साथ एक समझौते के तहत उपयोग किया जाता है.
ARN EU/04/19/13626

News18 चुनाव टूलबार

  • 30
  • 24
  • 60
  • 60
चुनाव टूलबार