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मुजफ्फरपुर के शाही लीची के स्वाद पर ग्रहण, 50 फीसदी पेड़ों पर अब तक नहीं लगे फल

बिहार में इस बार लीची की फसल पर मौसम की मार पड़ रही है (फाइल फोटो)

बिहार में इस बार लीची की फसल पर मौसम की मार पड़ रही है (फाइल फोटो)

Muzaffarpur Shahi Lichi: पिछले साल कोरोना की वजह से लीची में कम मुनाफा कमाने वाले किसानों के समक्ष इस बार कम मंजर और फलों के असमय गिरने के कारण बड़ी समस्या खड़ी हो गई है.

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मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर के शाही लीची (Shahi Lichi) का स्वाद दुनिया भर में मशहूर है लेकिन इस साल लीची किसान (Lichi Farming) अपनी फसल को लेकर मायूस हैं. बीते मौसम में भारी बारिश और लंबे समय तक जलजमाव की वजह से इस साल लीची में काफी खराब मंजर आए हैं. लगभग 50 फीसदी पेड़ों में मंजर नहीं निकले हैं और जिन पेड़ों पर मंजर के बाद दाने निकल आए हैं उन पर तेज धूप और उच्च तापमान का खतरा मंडराने लगा है.

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक की सलाह है कि फलने वाले पेड़ों पर दवा का छिड़काव करके किसान अपनी आमदनी स्थिर कर सकते हैं. जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर भूमि पर लीची की खेती
की गयी है. कुछ पेड़ों पर काफी बेहतरीन मंजर और दाने निकल आए हैं तो बड़ी संख्या में लीची के पौधों में बिल्कुल मंजर नहीं निकले है. लगभग पचास प्रतिशत पेड़ों में या तो फलन नहीं आए या फिर काफी कम फलन हैं.

किसानों का कहना है कि लगातार दूसरी बार लीची से उन्हें मायूस होना पड़ रहा है. पिछले साल कोरोना की वजह से लॉकडाउन लग गया और लीची के तैयार फलों को मार्केट नहीं मिला तो इस बार जलजमाव नें दूसरा झटका दिया है. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक वैज्ञानिक एसडी पांडे बताते हैं कि जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर में लीची के बाग हैं लेकिन नीचले इलाकों में जलजाव की वजह से दिसम्बर माह तक जलजमाव रहा. अधिक नमी की वजह से पेड़ों में मंजर ही नहीं निकले. पांडेय ने कहा कि अब समय से पहले तेज धूप और उच्च तापमान की वजह से फल के गिर जाने का खतरा बढ गया है, ऐसे में किसानों को राय है कि छिड़काव करके फलों को बचाया जाए.
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