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Bihar : मुजफ्फरपुर के इस क्वारंटाइन सेंटर को देखकर चौंक जाएंगे आप...

मुजफ्परपुर के मुसहरी में पेड़ के नीचे बना क्वारंटाइन सेंटर

मुजफ्परपुर के मुसहरी में पेड़ के नीचे बना क्वारंटाइन सेंटर

जुगाड़ का आलम ये है कि मजदूरों को पेड़ में ही बांधकर ट्यूबलाइट दे दिया गया है. साथ ही गैस चूल्हा और राशन का सामान मुखिया ने उपलब्ध करा दिया है. इतना ही नहीं बिना किसी प्रशासनिक नियंत्रण के सभी 6 दिनों से इस केंद्र पर रह रहे हैं.

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मुजफ्फरपुर. बिहार सरकार की जारी गाइडलाइन के अनुसार चहारदीवारी के भीतर ही क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine Center) बनाया जाना है. पर मुजफ्फरपुर के इस यूनिक क्वारंटाइन सेंटर की सच्चाई कुछ और है. कोरोनाबंदी में अपने गांव लौट रहे प्रवासी मजदूरों (migrant workers) को यहां पेड़ के नीचे क्वारंटाइन होकर रहना पड़ रहा है. मजदूरी के बचाए रकम खर्च कर किसी तरह घर पहुंचे मजदूरों को पंचायत में खाने का तो सामान मिल रहा है, लेकिन रहने की दिक्कत हो रही है. बड़ी संख्या में आ रहे मजदूरों के लिए बड़ा क्वारंटाइन सेंटर नहीं रहने के कारण अब मजदूरों को पेड़ के नीचे ही दिन-रात बिताना पड़ रहा है.

जुगाड़ का आलम ये है कि  मजदूरों को पेड़ में ही बांधकर ट्यूबलाइट दे दिया गया है. साथ ही गैस चूल्हा और राशन का सामान मुखिया ने उपलब्ध करा दिया है. इतना ही नहीं बिना किसी प्रशासनिक नियंत्रण के सभी 6 दिनों से इस केंद्र पर रह रहे हैं.

तेलंगाना से लौटे हैं सभी मजदूर

तेलंगाना से 15 मजदूरों का जत्था मुजफ्फरपुर के मुसहरी स्थित राजवाड़ा पंचायत पहुंचा है. 5 दिन पहले पीरमुहम्मदपुर गांव पहुंचे इन मजदूरों ने इस पाकर के पेड़ के नीचे ही अपना आशियाना बनाया है. गांव के स्कूल में पहले से 13 मजदूर रह रहे हैं. ऐसे में पेड़ के नीचे ही सभी मजदूरों के लिए पंचायत के मुखिया ने रहने की व्यवस्था कर दी है.

पेड़ पर ही रोशनी के लिए ट्यूबलाइट और खाना बनाने के लिए कुछ राशन के साथ गैस सिलेंडर और चूल्हा इन मजदूरों को मुखिया की ओर से दिया गया है. आस-पास के गांव के ही रहने वाले कुछ मजदूरों ने घर से सोने और खाने के लिए कुछ सामान भी मंगवा लिया है. लेकिन इनमें से अधिकांश मजदूर जमीन पर ही बिछावन लगाकर अपना 21 दिनों के क्वारंटाइन अवधि को पूरा करने में लगे हैं.

मुसहरी के इस क्वारंटाइन सेंटर में तेलंगाना से लौटे प्रवासी मजदूरों का बसेरा है.


पेड़ के नीचे रहने वाले मजदूर तेलंगाना में एक साथ ही काम करते थे और गांव तक वापस साथ-साथ आए हैं.  एैसे में किसी क्वारंटाइन सेन्टर में दूसरे प्रवासियों के साथ मिलकर रहना भी नहीं चाह रहे. मजदूरों को कोरोना संक्रमण फैलने का भी डर लगा हुआ है.

मजदूर नहीं जाना चाहते दूसरे केंद्र

अमृतेश कुमार और रमेश कुमार प्रवासी मजदूर हैं.  खुद 6 हजार हरेक मजदूर खर्च कर गांव पहुंचे हैं. इन्हें दूसरे मजदूरों के साथ रहने में कोरोना संक्रमण फैलने का डर सता रहा है. ये मजदूर किसी भी हालत में पंचायत में  विकसित किए गए दूसरे क्वारंटाइन केंद्र पर नहीं जाना चाहते हैं. जबकि सभी 15 प्रवासी मजदूर खुले में शौच जा रहे हैं और खुद ही खाना भी बनाकर खा रहे हैं.

नहीं लिया गया है किसी का सैम्पल

इन सभी मजदूरों की अभी तक जांच भी नहीं हुई है. पीएचसी मुशहरी में सभी का थर्मल स्क्रीनिंग हुआ है लेकिन सैम्पल किसी का नहीं लिया गया है.

बना हुआ है खतरा

गांव से थोड़ा अलग बीच खेत में पेड़ के नीचे और बगल की झोपड़ी का सहारा लेकर क्वारंटाइन अवधि पूरा करने में लगे मजदूरों की अभी तक थर्मल स्क्रीनिंग छोड़कर कोरोना की जांच भी नहीं हुई है. किसी प्रकार का प्रशासनिक नियंत्रण जो दूसरे क्वारंटाइन सेन्टरों पर होता है, उस बंदिशों से ये सभी आजाद हैं.

पेड़ के नीचे झाड़ियों को साफकर रहने वाली जगह तो बना ली गई है, लेकिन रात में सांप-बिच्छू का खतरा इन मजदूरों पर मंडरा रहा है .साथ ही प्री मानसून की बारिश और आंधी-तूफान और बिजली गिरने का भी खतरा इस क्वारंटाइन सेन्टर पर रहने वाले मजदूरों पर बना हुआ है.

ग्रामीण हैं दहशत में
मजदूरों के गांव से बाहर खेत में रहने से ग्रामीण भी परेशान हैं. ग्रामीणों द्वारा मजदूरों की आवश्यक जांच कराकर 21 दिनों तक सही तरीके से सभी को क्वारंटाइ कराने की मांग की जा रही है. दूसरी तरफ प्रशासन ने मुखिया को क्वारंटाइ सेन्टर स्कूल या फिर दूसरे सामुदायिक केन्द्रों पर संचालित करने का निर्देश दिया है. जिले में 97 क्वारंटाइन सेन्टर पर 6817 प्रवासियों को रखा जा रहा है. लेकिन पेड़ के नीचे खुले आकाश में चलने वाले इस प्रकार के क्वारंटाइ सेन्टर व्यवस्था का मजाक उड़ा रहा है.

कारंटाइन सेंटर की यह है व्यवस्था

चहारदीवारी में बने क्वारंटाइन सेंटर में प्रवासी मजदूरों को कपड़ा साबून और खाने का सामान और मच्छरदानी भी उपलब्ध कराया जाना है. रजवाड़ा पंचायत की मुखिया जयंती देवी ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि स्कूलों के अलावा दूसरी जगह पर भी क्वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन इन सेंटरों पर मुश्किल हो रहा है. हालांकि मुजफ्फरपुर के डीएम तत्काल इस तरह के केंद्र को सुरक्षित चहारदीवारी वाले जगह पर शिफ्ट करने का आदेश दिया है.

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