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घरवालों ने ब्याज पर लेकर भेजे रुपए तो ढाई लाख में किराए पर ट्रक लेकर दिल्ली से सुपौल पहुंचे 75 मजदूर

ट्रक में सवार होकर दिल्ली से सुपौल पहुंचे बिहारी मजदूर

ट्रक में सवार होकर दिल्ली से सुपौल पहुंचे बिहारी मजदूर

लॉकडाउन (Lockdown) में दिल्ली (Delhi) से ट्रक में सवार होकर बिहार (Bihar)पहुंचने वाले सभी मजदूर सुपौल जिले के भभटियाही के रहने वाले हैं. सभी ने घर से ब्याज पर रकम मंगाकर कर ट्रक का किराया दिया.

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मुजफ्फरपुर. बिहार के प्रवासी मजदूर (Migrant Labors) दिल्ली से घर वापस आने के लिए ढाई लाख रुपए में ट्रक को भाड़े पर ले रहे हैं. सुपौल (Supaul) के 75 मजदूरों ने दिल्ली में ढाई लाख रुपए में ट्रक को किराए पर लिया और अपने घर के लिए रवाना हो गया. ये सभी मजदूर पिछले कई दिनों से घर वापस आने की सोच रहे थे लेकिन मजदूरों को ना तो स्पेशल ट्रेन (Special Trains) में जगह मिल रही थी ना ही मकान मालिक घर में रखना चाह रहे थे. परेशान मजदूरों ने ट्रक का महंगा सौदा कर घर वापसी का निर्णय लिया.

ब्याज पर मंगाए रुपए

सभी मजदूर बिहार के सुपौल जिले के भभटियाही के रहने वाले हैं. घर से ब्याज पर रकम मंगाकर कर ट्रक भाड़ा दिया लंबे समय तक लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों ने पहले तो मजदूरी की रकम से दिल्ली में रहने की कोशिश की लेकिन वक्त बीतने के साथ ही सारी मजबूरी की रकम खत्म होती चली गई. कुछ दिनों तक दिल्ली की केजरीवाल सरकार से खाना पीना भी मिला लेकिन बाद में इन मजदूरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. मजदूरों ने घर वापसी का निर्णय लिया लेकिन घर वापसी के लिए इतनी मांगी रकम उनके पास नहीं थी कि ट्रकों को किराये पर लिया जा सके. सभी मजदूरों ने मिलकर अपने घरों से पैसे खाते में मंगाया और 3000 से अधिक रुपए की आपसी भागीदारी से ढाई लाख रुपये में ट्रक को भाड़े पर  लिया.

एक ट्रक में सवार हुए 75 मजदूर

ट्रक में 75 मजदूर एक साथ सवार होकर दिल्ली से घर वापस आ रहे हैं. ऐसे में ट्रकों में किसी प्रकार की सोशल डिस्टेंसिंग मजदूरों के बीच नहीं रह पा रही है. इन मजदूरों का कहीं मेडिकल टेस्ट भी नहीं हुआ है ना तो किसी प्रकार की स्क्रीनिंग हुई है. ऐसे में गांव पहुंचते ही सभी मजदूरों को कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा. दिल्ली जैसे रेड जोन इलाके से आने वाले ये मजदूर अपने-अपने परिवार और समाज के लिए कोरोना संक्रमण के वाहक हो सकते हैं लेकिन फिलहाल पेट की आग के खातिर और परिवार की चिंता को लेकर यह सभी मजदूर घर वापसी के लिए बेताब हैं.

ट्रेन में जगह नहीं मिलने पर गुस्सा

लॉकडाउन के पहले दो फेज में मजदूरों ने किसी प्रकार रोजगार जाने के बाद भी दिल्ली में अपने आशियाने में ही रहना मुनासिब समझा लेकिन बाद में जब दिल्ली से प्रवासी मजदूरों की वापसी को लेकर चर्चा शुरू हुई तो मजदूरों में आशा बनी थी कि उन्हें ट्रेन से वापसी का मौका मिलेगा. लंबे इंतजार के बाद भी प्रवासी मजदूरों को घर वापसी के लिए ट्रेनों में जगह नहीं मिली इसके बाद सभी मजदूरों ने सरकार पर गुस्सा जाहिर करते हुए घर से ब्याज पर रकम मना कर ट्रकों के जरिए घर वापसी का निर्णय लिया मुजफ्फरपुर से बातचीत में नीतीश सरकार के प्रति अपने गुस्से का इजहार भी किया.

एंबुलेंस का किराया 90 हजार

इससे पहले दिल्ली से मुजफ्फरपुर तक आने वाले प्रवासी मजदूरों ने एंबुलेंस से यात्रा की थी जिसके लिए मजदूरों को 90 हजार किराया चुकाना पड़ा था. मुजफ्फरपुर के 3 इलाकों में एंबुलेंस से आने वाले लोगों की चर्चा सार्वजनिक हुई थी. सरैय्या के 6  मजदूरों ने 90 हजार में दिल्ली से मुजफ्फरपुर तक की यात्रा पूरी की थी.

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