बेटी के गले में फंसा था लीची का बीज, कोरोना के बहाने नहीं मिला इलाज, पिता की गोद में बच्ची ने तोड़ा दम

मुजफ्फरपुर: बेटी के गले में फंस गया था लीची का बीज, पिता इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया। बेटी की मौत।

मुजफ्फरपुर: बेटी के गले में फंस गया था लीची का बीज, पिता इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया। बेटी की मौत।

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में पिता अपनी 8 साल की बेटी को, जिसके गले में लीची का बीच फंसा था, उसे गोद में लेकर सदर अस्पताल में इलाज के लिए दो घंटे तक भटकता रहा, लेकिन कोरोना जांच रिपोर्ट नही होने पर उसे इलाज नहीं मिल सका और उसकी कंधे में ही मौत हो गई.

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मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बार फिर से मानवता शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है. एक पिता अपनी 8 साल की बेटी को गोद में लेकर सदर अस्पताल में दो घंटे तक भटकता रहा लेकिन सिर्फ कोरोना जांच रिपोर्ट नही होने पर किसी डॉक्टर या नर्स ने हाथ तक नही लगाया. पिता की गोद में ही बेहोश बच्ची ने दम तोड़ दिया, उसके बाद भी सिस्टम की नींद नही टूटी. सदर अस्पताल से मृत बच्ची का शव ले जाने के लिए जब शव वाहन भी नही मिला तो पिता बच्ची को कंधे पर लेकर हीं लौट गया. कांधे पर बच्ची का शव लिए रोते पिता का वीडियो वायरल होने पर सिविल सर्जन कहते हैं कि जांच कमेटी बना दी गई है. मृतका मुशहरी थाना के रघुनाथपुर निवासी संजय राम की बेटी थी.

जानकारी के मुताबिक मंगलवार को संजय राम की 8 साल की  बेटी राधा गांव के एक बगीचे में लीची खाने गई थी. लीची का बीज बच्ची के गले मे फंस गया. रोटी हुई बच्ची ने घर पहुंचकर पिता को बात बताई. पिता संजय राम उसे लेकर इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचा. सदर अस्पताल में एमरजेंसी में जब वह पहुंचा तो पहले उसे पुर्जा कटाने के लिए कहा गया. पुर्जा लेकर आया तो उसे कोरोना जांच कराने के लिए कहा गया. गांव का सीधा सादा संजय राम कोरोना जांच कराने के लिए दौड़ता रह गया, लेकिन किसी ने बच्ची का इलाज नही किया. पिता की गोद में ही ही बच्ची के पिता ने दम तोड़ दिया.

पिता संजय राम रोता चिल्लाता रह गया लेकिन इलाज के बगैर बच्ची दुनिया को अलविदा कह गई. इस मामले में जब हमने सिविल सर्जन से सवाल किया तो उन्होंने पहले अपने डॉक्टर का बचाव किया. लेकिन फिर पूछने पर उन्होंने जांच कमिटी गठित करने की बात कही. सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी ने कहा है कि एमरजेंसी में कोरोना जांच की औपचारिकता की कोई जरूरत नही है. इस मामले में उस समय एमरजेंसी में तैनात डॉक्टर से पूछताछ की जा रही है. सीएस ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.

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