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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस: फैसला सुनते ही कोर्ट में रोने लगे दो दोषी

तेजस्वी यादव ने कहा बृजेश सिंह का संबंध सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ रहा है यह जगजाहिर है. ऐसे में उन बड़ी मछलियों के नाम भी सामने आने चाहिए जो अब तक पकड़ से बाहर हैं.

मुजफ्परपुर शेल्टर होम कांड (Muzaffarpur Shelter Home Case) पर साकेत कोर्ट (Saket Court) सोमवार को फैसला सामने आने के बाद दोषी कोर्ट में ही रोने लगे.

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    नई दिल्ली. बहुचर्चित मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम मामले में साकेत कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट का निर्णय सुनते ही एक दोषी कोर्ट में रोने लगा. उसने कहा कि जज साहब मैंने कुछ नहीं किया, फिर मुझे मुजरिम करार दे दिया गया. इस पर फैसला सुनाने वाले जज ने कहा कि उसे हायर कोर्ट में अपील करने की पूरी छूट है. इसके अलावा इस मामले में दोषी करार एक महिला भी रोने लगी. बता दें कि इस जघन्‍य मामले में 20 में से 19 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. ब्रजेश ठाकुर बलात्कार और जुवेनाइल जस्टिस एक्‍ट के प्रावधानों के तहत दोषी पाया गया. एक अन्य शख्स को आरोपमुक्त भी कर दिया गया है. सजा पर अब 28 जनवरी को कोर्ट में बहस होगी.

    मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में अदालत ने ब्रजेश ठाकुर और 18 अन्य को कई लड़कियों के यौन शोषण एवं शारीरिक उत्पीड़न का दोषी करार दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने ठाकुर को पॉक्सो कानून के तहत गुरुतर लैंगिक हमला और सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया. अदालत ने मामले के एक आरोपी को बरी कर दिया. आरोपियों में 12 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थीं. आश्रय गृह ठाकुर द्वारा चलाया जा रहा था.

    सात महीने की सुनवाई के बाद आया फैसला
    मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम यौन उत्‍पीड़न मामले में सात महीने की सुनवाई के बाद साकेत कोर्ट ने 20 जनवरी को अपना फैसला सुनाया. मुख्‍य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 19 अभियुक्‍तों को दोषी करार दिया गया है. इन लोगों को रेप के अलावा साजिश रचने के मामले में भी दोषी ठहराया गया है. बता दें कि ब्रजेश ठाकुर बिहार पीपुल्‍स पार्टी का विधायक भी रह चुका है. यह पार्टी अब खत्‍म हो गई है.

    वर्ष 2018 में तय हुआ था आरोप
    मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम केस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्‍ली ट्रांसफर कर दिया गया था. तब से इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में चल रही थी और अब जाकर इसमें फैसला सुनाया गया. अदालत ने इस मामले में 20 मार्च 2018 को आरोप तय किए थे. कोर्ट ने 19 आरोपियों को दोषी करार दिया है. अब इस मामले में 28 जनवरी से दोषियों की सजा पर सुनवाई होगी. बता दें कि जिन धाराओं के तहत उन्‍हें दोषी ठहराया गया है, उसमें बेहद कठोर सजा का प्रावधान है.

    गौरतलब है कि ठाकुर ने 2000 में मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से बिहार पीपुल्स पार्टी (बिपीपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गया था. अदालत ने इस मामले में दोषियों को सुनाई जाने वाली सजा पर दलीलों को सुनने के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है. अदालत ने 30 मार्च, 2019 को ठाकुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और नाबालिगों के यौन शोषण का आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप तय किए थे. अदालत ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न, नाबालिगों को नशा देने, आपराधिक धमकी समेत अन्य अपराधों के लिए मुकदमा चलाया था.



    उत्पीड़न, षड्यंत्र और ड्यूटी में लापरवाही मामले दोषी
    ठाकुर और उसके आश्रय गृह के कर्मचारियों के साथ ही बिहार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, ड्यूटी में लापरवाही और लड़कियों के उत्पीड़न की जानकारी देने में विफल रहने के आरोप तय किए गए थे. इन आरोपों में अधिकारियों के प्राधिकार में रहने के दौरान बच्चों पर क्रूरता के आरोप भी शामिल थे जो किशोर न्याय कानून के तहत दंडनीय है. अदालत ने सीबीआई के वकील और मामले के 20 आरोपियों की अंतिम दलीलों के बाद 30 सितंबर, 2019 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में बिहार की समाज कल्याण मंत्री और तत्कालीन जद (यू) नेता मंजू वर्मा को भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था जब उनके पति के ठाकुर के साथ संबंध होने के आरोप सामने आए थे. मंजू वर्मा ने आठ अगस्त, 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

    उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर इस मामले को सात फरवरी, 2019 को बिहार के मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था. यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) द्वारा 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपने के बाद सामने आया था. इस रिपोर्ट में किसी आश्रय गृह में पहली बार नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ था.

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