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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के आरोपी ब्रजेश ने सरकारी पैसे को निजी हित के लिए ट्रांसफर किया था: ED

भाषा
Updated: December 1, 2019, 11:17 PM IST
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के आरोपी ब्रजेश ने सरकारी पैसे को निजी हित के लिए ट्रांसफर किया था: ED
ठाकुर और उसके परिजनों ने गैरसरकारी संगठन का इस्तेमाल धन शोधन के माध्यम के तौर पर किया. (प्रतीकात्मक चित्र)

ईडी (ED) की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है, ‘ब्रजेश ठाकुर ने संगठन के बैंक खातों से अन्य लोगों के खातों में धन का अवैध रूप से हस्तांतरण किया, जिन्होंने बाद में बिना कोई निशान छोड़े नकद राशि अपने बैंक खाते से निकाल कर ठाकुर को सुपुर्द कर दिया.

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नई दिल्ली/मुजफ्फरपुर. बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक आश्रय गृह में कई लड़कियों से यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर (Brajesh Thakur) ने बच्चों के कल्याण के लिए मिले सरकारी कोष का हस्तांतरण निजी लाभ एवं गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया था. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में यह बात सामने आई है.

संघीय जांच एजेंसी ने ब्रजेश ठाकुर, उसके परिवार के सदस्यों व अन्य के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में धन शोधन का आपराधिक मामला दर्ज किया था. ब्रजेश ठाकुर के गैर सरकारी संगठन सेवा संकल्प विकास समिति की ओर से चलाए जा रहे आश्रय गृह में नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न की खबर सामने आने के बाद यह मामला दर्ज किया गया था. मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कहा गया है, ‘गैर सरकारी संगठन के बैंक खातों के जरिए सीधे ठाकुर और उसके परिवार के सदस्यों के खाते में उनके निजी इस्तेमाल के लिए बड़े पैमाने पर धन हस्तांतरित किया गया था.’

धन शोधन का एक अनोखा मामला
जांच रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इससे यह स्पष्ट होता है कि बच्चों के कल्याण के लिए सरकार और अन्य स्रोतों से प्राप्त धनराशि को ठाकुर ने छुपाया, हस्तांतरित किया और चुराया.’ जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ‘धन शोधन का एक अनोखा मामला’ है जहां बच्चों के कल्याण में इस्तेमाल होने वाले धन को हस्तांतरित किया गया,  विभिन्न खातों के माध्यम से बांटा गया और व्यक्तिगत हित के लिए उसका इस्तेमाल किया गया.

निजी हितों के लिए एनजीओ का कोष चुराया
इसमें कहा गया है कि गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के खातों से ठाकुर और उसके परिजनो के खातों में धन का निर्बाध रूप से हस्तांतरण किया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इससे यह स्पष्ट होता है कि ठाकुर ने निजी संपत्ति के तौर पर गैर सरकारी संगठन के प्रबंधन का इस्तेमाल किया तथा निजी हितों के लिए उसका कोष चुराया.’

धन शोधन के माध्यम के तौर पर किया एनजीओ का इस्तेमाल
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एक विशिष्ट उदाहरण में एजेंसी ने पाया कि गैर सरकारी संगठन के खातों से धन निकाल कर उसका इस्तेमाल ‘सीधे’ उसके बेटे के मेडिकल कालेज की फीस चुकाने में किया गया. इसमें कहा गया है, ‘इससे यह स्थापित होता है कि ठाकुर और उसके परिवार के सदस्यों ने एनजीओ के कोष को व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए अदला-बदली कर उसका हस्तांतरण किया.’

ठाकुर और उनके परिवार ने 1.97 करोड़ बताई थी संपत्ति, जबकि है 5.5 करोड़
जांच एजेंसी ने आयकर विभाग के उस आदेश पर भी भरोसा किया, जिसमें पिछले साल 14 अगस्त को गैर सरकारी संगठन के पंजीयन एवं कर छूट को रद्द कर दिया गया था, क्योंकि विभाग ने यह पाया कि संगठन ‘अपने घोषित उद्देश्यों से पूरी तरह से भटक गया है और अवैध गतिविधियों में शामिल है.’ धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी पाया कि ठाकुर और उनके परिवार ने आयकर रिटर्न में अपनी संपत्ति एक करोड़ 97 लाख से कम बताई थी जबकि उनके पास लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपए की संपत्ति है.

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First published: December 1, 2019, 11:02 PM IST
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