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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला: रेप की शिकायत से लेकर फैसले तक हर बात पढ़ें यहां

News18Hindi
Updated: December 12, 2019, 5:35 AM IST
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला: रेप की शिकायत से लेकर फैसले तक हर बात पढ़ें यहां
मुजफ्फरपुर सेल्टर होम से जुड़े हर एक घटनाक्रम को यहां समझिए.

दिल्ली (Delhi) की साकेत कोर्ट (Saket Court) ने 30 मार्च 2019 को सभी आरोपितों पर आरोप तय किए थे. मामले में मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट (Chargesheet) दाखिल किया गया था.

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  • Last Updated: December 12, 2019, 5:35 AM IST
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नई दिल्ली. बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में शेल्टर होम में कई लड़कियों से रेप के मामले में दिल्ली (Delhi) की कोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकती है. यह पूरा मामला बिहार के शेल्टर होम में 40 नाबालिग बच्चियों और लड़कियों से रेप (Rape) से जुड़ा है. आइए आज हम आपको बताते हैं कि मुजफ्फरपुर मामले से जुड़ा हर घटनाक्रम कब क्या हुआ...
12 दिसंबर को दिल्ली की साकेत कोर्ट फैसला सुना सकता है

14 नवंबर 2019: वकीलों की हड़ताल की वजह से कोर्ट फैसला नहीं सुना पाया और फैसले की तारीख 12 दिसंबर तय की गई.

30 सितंबर 2019: साकेत कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा.

25 सितंबर 2019: ED ने ब्रजेश ठाकुर की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू की.

30 मार्च 2019: दिल्ली की साकेत कोर्ट में सभी आरोपितों पर आरोप तय कर दिये हैं. मामले में मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया.

3 मार्च 2019: सीबीआई ने साकेत कोर्ट में कहा कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में कई पीड़िता ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ बयान दिया है. साथ ही, उसके खिलाफ रेप, अपहरण और चोट पहुंचाने के आरोप लगाए.23 फरवरी 2019: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 फरवरी से इस मामले की साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई.

7 फरवरी 2019: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बिहार की सीबीआई कोर्ट से दिल्ली की साकेत कोर्ट में ट्रांसफर किया.

18 दिसंबर, 2018 सीबीआई ने ब्रजेश समेत 21 आरोपियों पर की चार्जशीट.

29 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड में CBI ने आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया.

28 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय रेप कांड में 42 में से 34 बच्चियों से रेप की पुष्टि हुई.

26 जुलाई 2018: बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लड़कियों के यौन उत्पीड़न मामले की जांच सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की.

25 जुलाई 2018: तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेता मुज़फ्फ़रपुर आये. सीबीआई जांच की मांग. रवि रोशन की पत्नी ने समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति पर गंभीर आरोप लगाये.

24 जुलाई 2018: लोकसभा में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर बिहार सरकार चाहे तो हम सीबीआाई जांच के लिए तैयार हैं.

23 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह के परिसर में ज़मीन की खुदाई हुई, मगर शव का कोई अवशेष नहीं मिला. इसके अलावा इसी दिन संसद में भी यह मामला उठा.

20 जुलाई 2018: पॉक्सो कोर्ट ने बालिका गृह में मृत बच्ची के शव की खोज के लिए ज़मीन खोदने का आदेश दिया. इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि हुई.

19 जुलाई 2018: पटना में एक बच्ची ने बयान दिया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में एक बच्ची की रेप के बाद का हत्या कर दी गई. इसके बाद मामला और भी ज्यादा गरमा गया.

09 जुलाई 2018: मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों के साथ बलात्कार मामले में पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा.

03 जुलाई 2018: सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर.

27 जून 2018: मुजफ्फरपुर बाल संरक्षण अधिकारी रवि रोशन को पुलिस ने गिरफ्तार किया.

25 जून 2018: बालिका गृह की 22 बच्चियों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए गये. बच्चियों ने कोर्ट के समक्ष बताया कि उसे नशे की दवा खिला कर उसके साथ गलत काम किया जाता था.

15 जून 2018: मुजफ्फऱपुर जिले में तैनात समाज कल्याण के दो अधिकारी को निलंबित किया गया.

03 जून 2018: बालिका गृह के संरक्षक और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया.

02 जून 2018: पुलिस ने मुख्य आरोपी और बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत एनजीओ से जुड़े करीब 8 लोगों को थाने में बुलाकर पूछताछ शुरू की और बालिका गृह को सील किया गया.

31 मई, 2018: मामले के 11 आरोपियों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

29 मई, 2018: टिस की रिपोर्ट के मद्देनजर मुजफ्फरपुर बालिका गृह को खाली कराया गया और वहां की बच्चियों को पटना, मोकामा अन्य बालिका गृह में शिफ्ट किया गया.

26 मई, 2018 : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग के निदेशक, बिहार सरकार तक पहुंची.

फरवरी, 2018 : टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी कि टिस टीम ने बिहार के बालिका आश्रय गृह पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को सौंपी. इस टीम ने अनपी ऑडिट में पाया था कि बालिका गृह का रख रखाव सही नहीं है और रिपोर्ट में बच्चियों के साथ दुर्रव्यवहार की शिकायतें भी मिली थीं.

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First published: December 12, 2019, 5:35 AM IST
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