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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस: FIR के बाद भी ब्रजेश ठाकुर को सरकार ने दिया नया प्रोजेक्ट

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस: FIR के बाद भी ब्रजेश ठाकुर को सरकार ने दिया नया प्रोजेक्ट

मुजफ्फरपुर केस का मास्टर माइंड ब्रजेश ठाकुर

मुजफ्फरपुर केस का मास्टर माइंड ब्रजेश ठाकुर

विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की तरफ से ठाकुर को पांच अल्पावास गृहों के संचालन के लिए एक करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता था. वहीं बच्चियों से बलात्कार के मामले में घिरे अल्पावास गृह को सालाना 35 लाख रुपये का अनुदान मिलता था.

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    बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुए यौन शोषण मामले को लेकर रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं. इस कड़ी में एक नई जानकारी सामने आ रही है कि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ के खिलाफ मिली शिकायत के बाद भी उसके संस्था को नया प्रोजेक्ट दिया गया. इसके अलावा ठाकुर को पांच अल्पावास गृहों के संचालन के लिए सरकार की तरफ से हर साल एक करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता था

    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की अप्रैल में आई रिपोर्ट में इस पूरे मामले का खुलासा हुआ था, लेकिन इसके बाद भी बिहार के सामाजिक कल्याण विभाग ने उसी एनजीओ को नया प्रोजेक्ट दे दिया. यहां एक और हैरान करने वाली बात यह है कि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ के खिलाफ जिस दिन एफआईआर दर्ज की, उसी दिन उसे नए प्रोजेक्ट का जिम्मा दिया गया.

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सामाजिक कल्याण विभाग ने ठाकुर की सेवा संकल्प एवं विकास समिति को एक लाख रुपये प्रति महीने के अनुदान पर भिखारियों के पुनर्वास से जुड़ा यह प्रोजेक्ट दिया था. हालांकि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन शोषण से जुड़े इस एफआईआर में ब्रजेश ठाकुर सहित 11 लोगों का नाम आने और फिर विभिन्न आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद विभाग ने इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया.

    विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की तरफ से ठाकुर को पांच अल्पावास गृहों के संचालन के लिए एक करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता था. वहीं बच्चियों से बलात्कार के मामले में घिरे अल्पावास गृह को सालाना 35 लाख रुपये का अनुदान मिलता था. इसके अलावा ठाकुर को वृद्ध गृह के लिए 15 लाख मिलते थे. ठाकुर का परिवार तीन अखबार भी निकालता था, जिसमें प्रात: कमल, हिन्दी अखबार, हालात-ए-बिहार उर्दू दैनिक और न्यूज नेक्स्ट अंग्रेजी दैनिक शामिल है.

    रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ 2013 में ही विभाग को शिकायत मिली थी. तब वह अपने अखबार प्रात: कमल के बिल्डिंग में ही एनजीओ के जरिये बालिका गृह का संचालन करने की तैयारी में था. विभाग के एक अधिकारी ने संस्था को प्रोजेक्ट देने पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन विभाग के ही एक सीनियर अफसर ने उन्हें जुबान बंद करने को कह दिया, जिसके बाद ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ को अल्पावास गृह मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

    Tags: Bihar News, Muzaffarpur Shelter Home Rape Case, PATNA NEWS

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