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मुजफ्फरपुर: लॉकडाउन के बीच स्वतंत्रता सेनानियों के इस गांव को खाली कराने का आदेश

समाजवादी नेता और राष्ट्रीय जैविक खेती अभियान के अध्यक्ष क्रांति प्रकाश ने कहा कि लॉकडाउन के समय सरकार के आदेश को मानना संभव नहीं है.

समाजवादी नेता और राष्ट्रीय जैविक खेती अभियान के अध्यक्ष क्रांति प्रकाश ने कहा कि लॉकडाउन के समय सरकार के आदेश को मानना संभव नहीं है.

लॉकडाउन के बीच मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले के गांव गंगेया (Gangeya) की जमीन अधिग्रहण करने का आदेश जारी कर दिया गया है.

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    पटना. कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर देश में लगातार बढ़ता जा रहा है. इसको फैलने से रोकने के लिए देश भर में 3 मई तक लॉकडाउन (Lockdown) लागू है. इस बीच बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी के किनारे बसे विधानसभा के पहले स्पीकर रामदयालु सिंह (Ram Dayalu Singh) समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों के गांव गंगेया (Gangeya) की जमीन अधिग्रहण करने का आदेश जारी कर दिया है.

    रुन्नीसैदपुर के कार्यपालक अभियंता की ओर से गंगेया के 405 लोगों के नाम के साथ जारी आम सूचना में कहा गया है कि बिहार रैयती लीज नीति के तहत बागमती तटबंध के बीच पड़ने वाले मुजफ्फरपुर जिले में गंगेया उर्फ परमानंदपुर गांव की 9.48 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना अपेक्षित है. इसलिए, सूचना प्रकाशन की तिथि से 15 दिन के भीतर अपनी भूमि देने के लिए सहमति या आपत्ति आवेदन पत्र कार्यापालक अभियंता के कार्यालय को समर्पित करें.

    लॉकडाउन में लोगों का घर से निकलना मुश्किल, आमसूचना पर उठ रहे सवाल
    इस सूचना पर इस गांव के कई लोग आपत्ति जता रहे हैं. इसी गांव के निवासी, समाजवादी नेता और राष्ट्रीय जैविक खेती अभियान के अध्यक्ष क्रांति प्रकाश ने कहा कि लॉकडाउन में लोगों का घर से निकलना मुश्किल है. गांव में ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों या अलग-अलग देशों में हैं. ऐसे में सरकार के आदेश को मानना संभव नहीं है.

    क्या है पूरा मामला
    मुजफ्फरपुर के औराई कटरा और गायघाट इलाके में 2007 से ही बागमती परियोजना के तहत बागमती नदी के दोनों किनारे भांग बनाने का काम चल रहा है. इसके लिए जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता होती है. औराई और कटरा इलाके में बांध निर्माण का काम काफी हद तक पूरा भी कर लिया गया है. लेकिन लेकिन बांध के भीतर जमीन कमाने वाले इलाके के लोग चास और बास की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करते रहें हैं.

    सही तरीके से मुआवजा नहीं मिलने से परेशान हैं लोग
    औराई, कटरा और गायघाट के 36 गांव के लोग आज की सही तरीके से मुआवजा नहीं मिलने से परेशान हैं.  योजना के तहत बागमती तटबंध के लोगों को तटबंध के बाहर जमीन अधिग्रहण कर बसाया जाना है. लेकिन यह काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है. जिन लोगों को अपना घर तटबंध के भीतर पाला पड़ा है उन्हें अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है. बागमती परियोजना द्वारा तक बांध की ऊंचाई को बढ़ाने की मंजूरी सरकार ने दे दी है. इसके तहत नेपाल से सटे सीतामढ़ी जिले से तटबंध की ऊंचाई को बढ़ाने का काम किया जाना है. लेकिन 2007 की या परियोजना अब तक इलाके के हजारों लोगों को फंड रहने के बावजूद मुआवजा नहीं दिला सका है.

    पहले मुआवजा देने का काम विशेष भू अर्जन विभाग द्वारा किया जाता था. लेकिन 2018 से या काम जिला भू अर्जन विभाग को सरकार ने दिया है. अलग से विभाग को बागमती परियोजना का काम मिला है. तब से कोई विशेष लाभ इलाके के लोगों को नहीं हुआ है. मुजफ्फरपुर के तत्कालीन डीएम आलोक रंजन घोष ने 1 साल पहले टेंट लगाकर औराई कटरा और गायघाट इलाके में तटबंध के भीतर फंसे लोगों को मुआवजा देने के लिए आदेश दिया था लेकिन यह आदेश फाईलों तक में ही सीमित रहा.

    (एजेंसी इनपुट के साथ मुजफ्फरपुर से प्रवीण ठाकुर की रिपोर्ट)

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